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तेज़ बारिश वाली उस रात सड़क पर सिर्फ़ हेडलाइट्स की चमक थी। दिया की कार अचानक अनियंत्रित हुई और खाई की ओर फिसल गई। जब उसकी आँख खुली, वह अस्पताल के सफ़ेद कमरे में थी। डॉक्टरों ने बताया—वह ज़िंदा है, पर उसकी याददाश्त का बड़ा हिस्सा मिट चुका है। उसे अपना नाम तक धुंधला-सा याद था, बाकी सब कुछ खाली।

कुछ दिनों बाद उसे एक और झटका लगा। उसके पिता की करोड़ों की संपत्ति, जो उसके नाम थी, अब किसी और के नियंत्रण में थी। दस्तावेज़ों पर उसके ही हस्ताक्षर थे—पर उसे याद नहीं था कि उसने कभी कुछ साइन किया हो। हर काग़ज़ पर तारीख वही थी, जिस दिन उसके हादसे की ख़बर अख़बारों में छपी थी।

वकील ने ठंडे स्वर में कहा, आपने खुद अधिकार छोड़े हैं। दिया की उंगलियाँ काँप गईं। अगर उसने साइन किए, तो क्यों? और अगर नहीं किए, तो किसने किए?

बेबस होकर उसे अपने पूर्व पति आर्यन के घर जाना पड़ा। वही एक व्यक्ति था जो उसकी पुरानी ज़िंदगी का हिस्सा था। आर्यन ने दरवाज़ा खोला तो उसकी आँखों में आश्चर्य कम और संकोच ज़्यादा था। उसने कहा, मैंने तुम्हें खो दिया था… पर तुम लौट आई।

दिया को उसकी आवाज़ में अपनापन नहीं, एक अजीब-सी घबराहट महसूस हुई। घर की दीवारों पर लगी तस्वीरों में वह मुस्कुरा रही थी, पर उसे उन मुस्कानों की कोई पहचान नहीं थी। रात को जब वह सोने गई, उसे लगा जैसे कोई दरवाज़े के बाहर खड़ा है।

धीमे कदमों की आहट, और फिर फुसफुसाहट—उसे अभी कुछ याद नहीं… समय हमारे पास कम है।

दिया की धड़कन तेज़ हो गई। अगर यह सिर्फ़ हादसा नहीं था, तो असली खेल अभी शुरू हुआ था।

अगली सुबह दिया ने तय कर लिया कि वह सच जाने बिना चैन से नहीं बैठेगी। उसने घर के हर कोने को गौर से देखना शुरू किया। अलमारी के एक गुप्त खाने में उसे अपनी पुरानी डायरी मिली। पन्नों पर लिखी आख़िरी पंक्तियाँ थीं—मुझे शक है कि आर्यन कुछ छिपा रहा है। अगर मेरे साथ कुछ हो जाए, तो यह कोई दुर्घटना नहीं होगी बल्कि किसी की साजिश होगी।

दिया के हाथ ठंडे पड़ गए। क्या वह अपने ही पति से डरती थी? तभी पीछे से आर्यन की आवाज़ आई, “क्या ढूँढ रही हो?” वह मुस्कुराया, पर उसकी मुस्कान आँखों तक नहीं पहुँची।

दिया ने अनजान बनने का अभिनय किया। पर उसी रात उसे एक अजीब सपना आया—तेज़ बहस, टूटता हुआ गिलास, और आर्यन की कठोर आवाज़—तुम्हें सच जानने की ज़रूरत नहीं है। वह हड़बड़ाकर उठ बैठी। यह सपना नहीं, शायद यादों का टुकड़ा था।

अस्पताल की रिपोर्ट में भी एक विसंगति थी। दुर्घटना की जगह का नक्शा बताता था कि ब्रेक फेल हुए थे। लेकिन मैकेनिक की रिपोर्ट गायब थी। और अब सवाल ये था कि आखिर वो किसने हटाई?

दिया ने चुपचाप अपने पुराने वकील से मिलने का निश्चय किया। वहाँ उसे पता चला कि संपत्ति का ट्रांसफर किसी विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत हुआ था—जिसके गवाह के रूप में आर्यन का नाम दर्ज था।

अब शक यक़ीन में बदल रहा था।

घर लौटते समय उसे लगा कोई उसका पीछा कर रहा है। काली कार कुछ दूरी पर लगातार साथ चल रही थी। जब उसने मुड़कर देखा, कार अचानक गायब हो गई।

रात को उसके फोन पर एक अनजान संदेश आया—
अगर ज़िंदा रहना चाहती हो, तो अतीत को मत कुरेदो।

दिया की आँखों में डर नहीं, आग थी। अगर कोई उसे मिटाना चाहता था, तो वह पहले सच को उजागर करेगी। खेल अब बराबरी का होने वाला था।

दिया अब डरने वाली नहीं थी। उसने तय कर लिया था कि वह हर हाल में सच्चाई तक पहुँचेगी। अगले दिन वह उस जगह गई जहाँ उसका एक्सीडेंट हुआ था। खाई के पास खड़े होकर उसने नीचे झाँका। अचानक उसकी आँखों के सामने एक दृश्य कौंधा—आर्यन कार के पास खड़ा है, फोन पर किसी से कह रहा है, काम हो जाएगा… उसे कुछ याद नहीं रहेगा।

दिया का सिर दर्द से फटने लगा। यह कोई कल्पना नहीं थी, यह उसकी यादों का लौटता हुआ हिस्सा था।

वह सीधे पुराने मैकेनिक के गैराज पहुँची। पहले तो वह आदमी कुछ भी बताने से मुकर गया, पर जब दिया ने कड़ी आवाज़ में पूछा, तो उसका चेहरा पीला पड़ गया। उसने धीमे स्वर में कहा, मैडम, आपकी कार के ब्रेक किसी ने जानबूझकर ढीले किए थे… पर मुझे पैसे देकर चुप रहने को कहा गया।

किसने? दिया की आवाज़ काँपी नहीं।

मैकेनिक ने सिर्फ़ एक नाम लिया—आर्यन साहब।

दिया के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मैकेनिक ने यह भी बताया कि आर्यन अकेला नहीं था। उसके साथ एक और शख्स था, जिसका चेहरा उसने साफ़ नहीं देखा।

अब यह साफ़ था कि हादसा एक साज़िश थी। पर सवाल था—क्यों? क्या सिर्फ़ संपत्ति के लिए? या कोई और राज़ भी था?

उसी रात दिया ने आर्यन के कमरे में छिपकर उसकी फाइलें देखीं। एक फोल्डर में उसे बीमा पॉलिसी के काग़ज़ मिले—उसके नाम पर भारी रकम का बीमा, जिसमें लाभार्थी आर्यन था।

दिया की आँखों में ठंडा संकल्प उतर आया। वह अब शिकार नहीं, शिकारी बनने वाली थी।

दिया ने अगले कुछ दिनों तक ऐसा जताया जैसे उसे कुछ भी याद नहीं। वह आर्यन के सामने वही भोली, असहाय और टूटी हुई औरत बनी रही। पर भीतर ही भीतर वह हर कदम सोच-समझकर रख रही थी।

एक रात उसने आर्यन को फोन पर कहते सुना—वह धीरे-धीरे सब समझ रही है… हमें जल्दी करना होगा।

हमें? यह शब्द दिया के कानों में गूंज उठा। तो साज़िश में कोई और भी शामिल था।

अगले दिन उसे एक अजीब फोन आया। दूसरी तरफ़ से एक महिला की आवाज़ थी—अगर सच जानना चाहती हो, तो पुराने बंगले में आओ। अकेली।

वह वही बंगला था जहाँ उसकी और आर्यन की शादी के बाद पहली पार्टी हुई थी। दिया ने जोखिम उठाया। रात के सन्नाटे में वह वहाँ पहुँची। अंदर अंधेरा था, पर ड्राइंग रूम में एक परछाई खड़ी थी।

लाइट जली, और दिया का दिल थम गया। सामने आर्यन की बिजनेस पार्टनर, रिद्धिमा खड़ी थी।

रिद्धिमा ने हँसते हुए कहा, तुम्हें लगता था सिर्फ़ आर्यन ने धोखा दिया? असली खेल मैंने शुरू किया था।

दिया स्तब्ध रह गई। रिद्धिमा ने बताया कि कंपनी घाटे में थी, और संपत्ति हड़पना ही एकमात्र रास्ता था। आर्यन लालच में उसके साथ हो गया।

लेकिन तुम्हें खत्म करना ज़रूरी था, रिद्धिमा की आँखें ठंडी थीं।

उसी क्षण पीछे से दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई। आर्यन अंदर आ चुका था।

दिया समझ गई—यह जाल उसी के लिए बिछाया गया था।

पर उन्हें नहीं पता था कि इस बार दिया तैयार होकर आई है… और उसके पास भी एक ऐसा राज़ है, जो सब कुछ बदल सकता है।

बंगले के भीतर हवा भारी थी। आर्यन और रिद्धिमा को पूरा विश्वास था कि दिया इस बार बच नहीं पाएगी। पर दिया के चेहरे पर डर नहीं था। उसने शांत स्वर में कहा, तुम दोनों को लगा मैं अकेली आई हूँ?

इतना कहते ही दरवाज़े के बाहर पुलिस की गाड़ियों की आवाज़ गूँज उठी। आर्यन का चेहरा सफेद पड़ गया। रिद्धिमा घबरा गई।

दिया ने अपने पर्स से एक छोटा रिकॉर्डर निकाला। तुम्हारी हर बात रिकॉर्ड हो चुकी है। ब्रेक फेल करवाने से लेकर बीमा पॉलिसी तक… सब।

असल में, जब दिया को पहली बार धमकी वाला संदेश मिला था, तभी उसने अपने पुराने वकील और एक भरोसेमंद पुलिस अधिकारी से संपर्क कर लिया था। वह जानती थी कि सीधे टकराने से बेहतर है उन्हें खुद अपने जाल में फँसाना।

रिद्धिमा ने आख़िरी कोशिश की—तुम्हें लगता है सबूत काफी हैं?

दिया ने मुस्कुराकर कहा, सिर्फ़ रिकॉर्डिंग नहीं… मैकेनिक की गवाही और बैंक ट्रांजैक्शन भी।

आर्यन ने गुस्से में कदम बढ़ाया, पर पुलिस अंदर आ चुकी थी। हथकड़ी की आवाज़ ने सन्नाटा तोड़ दिया।

जाते-जाते आर्यन ने चीखकर कहा, तुम्हें सच कभी पूरा पता नहीं चलेगा!

दिया ठिठक गई। क्या अभी भी कुछ छिपा हुआ था?

पुलिस के साथ बाहर निकलते समय उसकी नज़र ऊपर की बालकनी पर गई। वहाँ कोई खड़ा था—एक धुंधली परछाई, जो तुरंत ओझल हो गई।

क्या खेल यहीं खत्म हो गया? या असली खिलाड़ी अभी भी पर्दे के पीछे था?

दिया ने मन ही मन ठान लिया—अगर कोई तीसरा चेहरा है, तो वह भी सामने आएगा।

आर्यन और रिद्धिमा की गिरफ्तारी के बाद मामला लगभग साफ़ लग रहा था। मीडिया में खबरें फैल गईं—“पत्नी की हत्या की साज़िश नाकाम।”

पर दिया के भीतर एक बेचैनी थी। आर्यन के आख़िरी शब्द उसके कानों में गूंज रहे थे—“तुम्हें सच कभी पूरा पता नहीं चलेगा।”

उसी रात उसे अस्पताल से एक कॉल आया। वह डॉक्टर, जिसने उसकी जान बचाई थी, अचानक उससे मिलना चाहता था।

अस्पताल के केबिन में डॉक्टर ने चुपचाप एक फाइल उसके सामने रख दी। आपकी दुर्घटना वाली रात… आपको यहाँ लाने वाला व्यक्ति आर्यन नहीं था।

तो कौन

डॉक्टर ने धीमे स्वर में कहा, आपके पिता के पुराने बिजनेस पार्टनर—विक्रम मेहरा।

दिया का दिल धड़क उठा। विक्रम वही व्यक्ति था जिसने पिता की मौत के बाद कंपनी संभाली थी।

डॉक्टर ने आगे बताया, आपकी याददाश्त पर असर सिर्फ़ चोट से नहीं, दवाइयों की ओवरडोज़ से हुआ था।

दिया के दिमाग में बिजली-सी कौंधी। अगर दवाइयाँ जानबूझकर दी गईं, तो असली मास्टरमाइंड कौन था?

उसी क्षण उसके फोन पर एक संदेश आया—
तुमने सिर्फ़ मोहरों को हटाया है, खिलाड़ी अभी बाकी है।

संदेश के साथ एक तस्वीर थी—विक्रम मेहरा की थी, जो विदेश जाने की तैयारी में था।

दिया ने गहरी साँस ली। बदला अभी अधूरा था।

अब यह सिर्फ़ संपत्ति या साज़िश की बात नहीं थी, यह उसके अस्तित्व की लड़ाई थी।

कहानी खत्म नहीं हुई थी… बल्कि यह तो बस शुरुआत थी।

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