नैना को हमेशा भीड़ में भी अकेलापन महसूस होता था। दिल्ली के उस पुराने फ्लैट में वह पिछले छह महीनों से अकेली रह रही थी। नई नौकरी, नया शहर… और कोई अपना नहीं।
एक रात अचानक उसके फोन पर एक मैसेज आया —
तुम आज बहुत उदास लग रही थीं।
नैना चौंक गई। उसने ऑफिस में किसी से बात भी नहीं की थी। उसने जवाब दिया, आप कौन?
कुछ देर बाद रिप्लाई आया —
कोई, जो तुम्हें दूर से देखता है… और समझता भी है।
पहले तो नैना ने इसे मज़ाक समझा। पर अगले कुछ दिनों में वह अनजान नंबर उसकी हर छोटी बात जानता था। वह कौन-सी किताब पढ़ रही है, किस समय बालकनी में खड़ी होती है, यहाँ तक कि उसने रात के खाने में क्या बनाया।
डर और जिज्ञासा के बीच झूलती नैना ने आखिर मिलने का फैसला किया।
उसने मैसेज किया — अगर हिम्मत है, तो कल शाम 7 बजे सेंट्रल पार्क में मिलो।
शाम ठीक 7 बजे पार्क में हल्की बारिश हो रही थी। नैना छतरी लिए खड़ी थी। तभी पीछे से आवाज़ आई —
तुम आईं… मुझे पता था।
वह मुड़ी। सामने एक साधारण-सा लड़का खड़ा था। आँखों में अजीब-सी गहराई।
मैं आरव हूँ, उसने मुस्कुराकर कहा।
उसकी मुस्कान में सुकून था।
जहां नैना को थाड़ा सा गुस्सा कि कौन है ये, तो वही उसका चेहरा देखते ही उसका सारा गुस्सा दूर हो गया-
और वो उसमे एक पल के लिए खो गई।
नैना को नहीं पता था — यह मुलाक़ात उसकी ज़िंदगी बदलने वाली है।
सेंट्रल पार्क की उस मुलाक़ात के बाद नैना और आरव की बातें रोज़ होने लगीं। आरव अजीब तरह से परफेक्ट था। वह वही गाने पसंद करता था जो नैना सुनती थी, वही फिल्में जिन पर वह रोती थी। जैसे वह उसे सालों से जानता हो।
पर एक बात अजीब थी — आरव कभी दिन में नहीं मिलता था। हमेशा शाम या रात।
एक दिन नैना ने हँसते हुए पूछा, क्या तुम वैंपायर हो? धूप में नहीं निकलते?
आरव कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, कुछ लोग उजाले में दिखते नहीं…
उसकी आवाज़ में एक अजीब ठंडक थी।
धीरे-धीरे नैना को महसूस होने लगा कि आरव को उसके बारे में जितना पता है, उतना उसने कभी बताया ही नहीं। एक रात उसने अचानक पूछा, तुम्हें मेरी माँ की तस्वीर कहाँ से मिली?
आरव ठहर गया। तुम्हारे घर की दीवार पर लगी है… बेडरूम के बाईं तरफ।
नैना के हाथ से फोन छूटते-छूटते बचा। वह तो कभी आरव को अपने घर नहीं लाई थी।
उसने तुरंत कॉल काट दी और पूरे घर की लाइट्स जला दीं। दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद थीं। सब कुछ सामान्य।
लेकिन अगली सुबह उसे अपने दरवाज़े के बाहर एक छोटा-सा कागज़ मिला।
उस पर लिखा था —
डर मत। मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।
नैना के भीतर पहली बार डर ने जगह बनाई।
क्या आरव सच में वही है जो वह कहता है?
या वह सिर्फ़ एक परछाई है… जो उसके बहुत करीब आ चुकी है?
नैना ने तय किया कि अब सच्चाई जानना ज़रूरी है। उसने अपने फ्लैट के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगवा लिया।
उस रात उसने जानबूझकर आरव को मैसेज किया —
आज घर पर अकेली हूँ…
आरव ने तुरंत जवाब दिया —
मुझे पता है।
नैना की धड़कन तेज़ हो गई। उसने कैमरे की लाइव फीड चालू रखी और कमरे की लाइट बंद कर दी।
रात के करीब 11 बजे दरवाज़े के बाहर हल्की आहट हुई। कैमरे में कोई साफ़ नहीं दिख रहा था, बस एक धुंधली-सी छाया।
फिर अचानक उसका फोन बजा।
डरो मत, दूसरी तरफ़ आरव की आवाज़ थी, मैं बस यह देखना चाहता था कि तुम सुरक्षित हो।
तुम बाहर हो? नैना की आवाज़ काँप रही थी।
कुछ सेकंड सन्नाटा रहा। फिर जवाब आया —
नहीं… मैं तो यहीं हूँ।
कहाँ?
धीरे से आरव बोला —
तुम्हारे पीछे।
नैना का शरीर जम गया। उसने धीरे-धीरे मुड़कर देखा। कमरा खाली था।
उसी क्षण दरवाज़े पर जोर से दस्तक हुई।
नैना भागकर दरवाज़े तक पहुँची। बाहर कोई नहीं था।
लेकिन ज़मीन पर एक पुरानी फोटो पड़ी थी —
उसमें नैना थी… और उसके साथ एक लड़का।
लड़के का चेहरा साफ़ था।
वह आरव था।
पर फोटो के नीचे तारीख़ लिखी थी —
तीन साल पहले।
और नैना को याद था —
तीन साल पहले वह किसी आरव को नहीं जानती थी…
या शायद जानती थी?
अब कहानी उस मोड़ पर पहुँच रही है जहाँ प्यार और डर एक हो जाते हैं…
फोटो हाथ में लिए नैना देर तक फर्श पर बैठी रही। तीन साल पुरानी तारीख़… और उसके साथ खड़ा वही चेहरा — आरव।
अचानक उसके दिमाग में तेज़ दर्द उठा। कुछ टूटी-फूटी तस्वीरें उभरने लगीं — बारिश की रात… सड़क पर तेज़ रफ्तार कार… और कोई चिल्ला रहा था, नैना, संभलकर!
नैना हड़बड़ाकर उठी। उसने तुरंत अपनी पुरानी अलमारी खोली, जहाँ वह पुराने कागज़ और यादें रखती थी। बहुत खोजने के बाद उसे एक अख़बार की कतरन मिली।
समाचार था:
युवा व्यवसायी आरव मल्होत्रा की सड़क दुर्घटना में मौत।
तारीख़ — ठीक तीन साल पहले।
नैना की सांसें रुक गईं। तस्वीर वही थी। वही आँखें। वही चेहरा।
अगर आरव तीन साल पहले मर चुका था… तो उससे मिलने वाला कौन था?
उसी क्षण उसका फोन फिर बजा।
स्क्रीन पर नाम चमका — आरव।
काँपते हाथों से उसने कॉल उठाई।
तुमने सब जान लिया… है ना? आवाज़ बेहद शांत थी।
तुम… तुम कौन हो?
कुछ पल चुप्पी रही। फिर धीरे से जवाब आया —
मैं वही हूँ, जिसे तुम भूलना चाहती थीं।
नैना का दिल बैठ गया।
क्या वह सचमुच किसी मरे हुए इंसान से बात कर रही थी?
या उसकी अपनी याददाश्त उसके साथ खेल खेल रही थी?
तभी कमरे की लाइट झपकी… और आईने में उसे एक पल के लिए अपने पीछे किसी की परछाईं दिखी।
जब उसने पलटकर देखा — कमरा खाली था।
लेकिन अब एक बात तय थी —
यह कहानी सिर्फ़ प्यार की नहीं, किसी अधूरी सच्चाई की थी।
नैना ने खुद को संभाला। डर से ज़्यादा उसे सच्चाई जानने की ज़िद थी। उसने उसी रात आरव को मैसेज किया —
अगर तुम सच में वही हो… तो मुझसे सामने मिलो। आख़िरी बार।
जवाब तुरंत आया —
पुराने हाईवे पर… वहीं जहाँ सब खत्म हुआ था।
नैना का दिल जोर से धड़का।
क्या वही जगह… जहाँ दुर्घटना हुई थी?
आधी रात, सुनसान सड़क। दूर-दूर तक कोई नहीं। हवा में ठंडक और अजीब सन्नाटा।
नैना कार से उतरी।
आरव!” उसने पुकारा।
अचानक पीछे से आवाज़ आई —
तुम मुझे छोड़कर चली गई थीं…
नैना मुड़ी। सामने आरव खड़ा था — वैसा ही जैसा फोटो में।
तीन साल पहले, उसकी आवाज़ भारी थी, उस रात कार तुम चला रही थीं। बहस तुमने शुरू की थी। एक्सीडेंट हुआ… और मैं चला गया। तुम बच गईं।
नैना का सिर चकराने लगा। यादों का सैलाब उमड़ पड़ा —
हाँ… वह झगड़ा… उसकी लापरवाही… आरव का खून से लथपथ चेहरा…
तुम्हें सब याद था, आरव ने कहा, “लेकिन तुम्हारे दिमाग ने खुद को बचाने के लिए मुझे मिटा दिया।
तो तुम…?
आरव की आँखें गहरी हो गईं।
मैं तुम्हारा अपराधबोध हूँ, नैना। तुम्हारा अधूरा प्यार… जो तुम्हें सच्चाई से भागने नहीं देगा।
अचानक तेज़ हेडलाइट्स उनकी ओर बढ़ीं।
नैना ने चीखते हुए आँखें बंद कर लीं।
जब उसने दोबारा आँखें खोलीं —
सड़क पर वह अकेली खड़ी थी।
पर इस बार उसे सब याद था।
आरव नहीं था।
सिर्फ़ उसकी सच्चाई थी… जो अब हमेशा उसके साथ रहने वाली थी।
हाईवे की उस रात के बाद नैना की ज़िंदगी बदल गई। उसे सब याद आ चुका था — झगड़ा, गुस्सा, तेज़ रफ्तार कार… और आरव की मौत।
पर कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई।
कुछ दिनों बाद पुलिस स्टेशन से उसे बुलावा आया। अधिकारी ने बताया कि तीन साल पुराने केस की फाइल दोबारा खोली गई है।
हमें कुछ नया मिला है, अधिकारी ने कहा और एक वीडियो क्लिप चलाया।
वीडियो सड़क किनारे लगे टोल प्लाज़ा के कैमरे का था। उसमें साफ़ दिख रहा था — दुर्घटना वाली रात कार में दो लोग नहीं, तीन लोग थे।
नैना का दिल धड़कना भूल गया।
तीसरा व्यक्ति कौन था?
वीडियो में पीछे की सीट पर बैठा एक साया दिखाई दिया। दुर्घटना से कुछ सेकंड पहले वह दरवाज़ा खोलकर कूद जाता है।
हम उस आदमी को ढूँढ नहीं पाए, अधिकारी बोला, लेकिन हमें शक है कि ब्रेक उसी ने छेड़े थे।
नैना के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
तो क्या वह सिर्फ़ हादसा नहीं था?
क्या किसी ने जानबूझकर सब प्लान किया था?
उस रात घर लौटते समय उसका फोन फिर बजा।
अनजान नंबर।
सच जानकर भी चैन नहीं मिलेगा, दूसरी तरफ़ से ठंडी आवाज़ आई।
नैना ने काँपते हुए पूछा, कौन हो तुम?
हल्की हँसी गूंजी —
जिसे तुमने उस रात कार में बैठाया था…
कॉल कट गई।
नैना के दिमाग में बिजली-सी कौंधी।
उसे याद आया — उस रात पार्टी में आरव का एक बिज़नेस पार्टनर भी साथ आया था।
जिसे वह मुश्किल से जानती थी।
शायद आरव की मौत एक हादसा नहीं…
एक खेल था।
और असली खिलाड़ी अभी भी ज़िंदा था।

