उसने मुझे बचाया… या फँसाया?

राहुल अपने दोस्तों के साथ कॉलेज की लाइब्रेरी में बैठा हुआ था। तभी उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी —उस लड़की का नाम था, शालिनी। उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था कि राहुल खुद को रोक न सका और उसके पास जाकर दोस्ती का हाथ बड़ा दिया वो लड़की भी राहुल की दोस्ती को कबूल कर लेती है।

जिसके बाद दोनों कॉलेज में पूरा दिन एक दूसरे के साथ ही रहते, और कॉलेज में जब भी राहुल को छोटी-छोटी परेशानियाँ होती थी—जैसे उसके नोट्स चोरी होना, प्रोजेक्ट मिस होना—शालिनी हमेशा समय पर मदद के लिए आ ही जाती थी।

एक बार राहुल के दोस्तों ने हंसते हुए उससे कहा,
यार, ये लड़की तो तुम्हारे लिए देवदूत लग रही है।

राहुल ने सोचा, शायद सच में यही सही है। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ अजीब सा डर भी था—हर बार शालिनी के पास आने के बाद, कोई न कोई लड़का गायब जो हो जाता था या किसी न किसी परेशानी में फंस जाता था।

एक रात राहुल को लगा कि कोई उसे ट्रैक कर रहा है। जब उसने पीछे मुड़कर देखा—शालिनी वहां थी, मगर उसकी आंखों में एक अजीब चमक थी।

वो बोली,
डरो मत, मैं तुम्हारी मदद कर रही हूँ।

राहुल को लगा ये सिर्फ डर का एहसास है। लेकिन अगले दिन उसका सबसे करीबी दोस्त रोहन एक सड़क हादसे में घायल हो गया।जिसके बाद राहुल को समझ आया—शालिनी सिर्फ बचाने नहीं, फँसाने भी आ सकती है। उसका दिल शालिनी की तरफ खिंचता था, लेकिन दिमाग बहुत डर रहा था।

राहुल ने शालिनी को पकड़ने की कोशिश की। उसने उसके कमरे में चोरी-छिपे कैमरा लगाया। लेकिन शालिनी ने उसे पहले ही पकड़ लिया, और मुस्कुराते हुए बोली:
राहुल, तुम समझ भी नहीं पाए कि कौन असली खतरा है—मैं या ये दुनिया?

अगले ही दिन, कॉलेज में एक भयानक धोखाधड़ी का केस सामने आया, और राहुल की मदद से शालिनी ने उस लड़के को बचाया।लेकिन राहुल के दिमाग में सवाल था—क्या शालिनी वास्तव में देवदूत है या किसी खतरनाक खेल की मास्टरमाइंड?

राहुल अब शालिनी से दूर भी नहीं जा पा रहा था और पास भी नहीं आ रहा था, वो अपने दिल और दिमाग की बातों के बीच फस गया था। उसकी मौजूदगी में उसे सुकून मिलता था, और उसकी गैरमौजूदगी में डर।

एक शाम शालिनी उसे शहर से बाहर एक पुराने रिसॉर्ट में ले गई। बारिश, खाली सड़कें और शालिनी का हाथ—सब कुछ किसी फिल्म जैसा रोमांटिक लग रहा था।

वहाँ शालिनी पहली बार राहुल के सामने टूटी। उसने कहा, राहुल, जिन लड़कों को तुम मेरे साथ जोड़ रहे हो… वो सब मासूम नहीं थे।

राहुल चुप रहा। शालिनी ने बताया कि हर लड़का किसी न किसी काले सच में शामिल था— कोई लड़की को ब्लैकमेल करता था, कोई फेक केस बनाता था, कोई मौत का सौदागर था। मैं बस उन्हें जेल तक पहुँचाती हूँ… या उनकी कब्र तक, ये कहते हुए शालिनी की आवाज़ कांप रही थी।

राहुल ने पहली बार महसूस किया कि वो लड़की देवदूत भी हो सकती है, और जल्लाद भी। लेकिन उसका दिल उस रात शालिनी के करीब जाए बिना रह ही नहीं सका या ये कहलो की दोनों की जवानी, उन्हे एक दूसरे के बहुत करीब ले आई… दोनों रात को एक दूसरे की बाहों में ही सो गए। और अचानक उसी रात पुलिस ने रिसॉर्ट को घेर लिया, चारों तरफ सायरन बजने लगे थे। और शालिनी अचानक गायब थी।

अगली सुबह राहुल को गिरफ्तार कर लिया गया। चार्ज था— एक पुराने केस में सबूत मिटाने और अपराधियों की मदद करना। हर सबूत उसके खिलाफ था।लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, गवाह—सब कुछ।

एक ही नाम हर फाइल में था— शालिनी।

जेल की दीवारों के बीच बैठा राहुल सोच रहा था—क्या वो प्यार था, या एक परफेक्ट ट्रैप?

तभी एक महिला अधिकारी उससे मिलने आई। उसने एक फाइल सामने रखी। और फाइल पर लिखा था—ऑपरेशन देवदूत

शालिनी कोई आम लड़की नहीं थी बल्कि वो एक अंडरकवर इन्वेस्टिगेटर थी, जो सालों से ऐसे लड़कों को फँसाती थी जो कानून से बच निकलते थे। लेकिन इस बार कुछ गड़बड़ हो गया था। असली मास्टरमाइंड अब भी बाहर था और वो चाहता था कि राहुल को मोहरा बनाकर शालिनी को खत्म कर दिया जाए।

अधिकारी ने राहुल से कहा,अगर शालिनी जिंदा है,  तो सिर्फ तुम्हें बचाने के लिए जरूर वापस आएगी। ये सुनकर राहुल की सांस अटक गई। और उसके दिल में हल्की सी हवां उठी ये सोचकर की उसने गलत लड़की से प्यार नहीं किया।

कोर्ट का आख़िरी दिन भी आ गया था। ये वो दिन था जब राहुल की सज़ा तय होनी थी और राहुल भी मान चुका था कि उसकी जिंदगी अब खत्म है कि तभी अचानक दरवाज़ा खुला।

शालिनी अंदर आई—थकी हुई, बहुत घायल… लेकिन ज़िंदा।

शालिनी को देखकर राहुल की आंखओ में एक अलग ही चमक आ गई, शालिनी ने भी कोर्ट के सामने सारे सबूत रख दिए। असली अपराधी का नाम, पूरा नेटवर्क, और ये भी कि कैसे उसने खुद को खलनायिका बनाकर सबको बेनकाब किया।

राहुल बरी हो गया।

कोर्ट के बाहर राहुल ने पूछा, अगर मैं भी गलत निकलता तो? शालिनी मुस्कुराई,और बोली तब तुम भी जेल या कब्र में होते। ये कहकर वो पलट गई और जाने लगी। राहुल एक दम से बेचैन होकर बोला, तो मैं क्या था—टारगेट या प्यार?

शालिनी रुकी, और बोली— तुम पहले इंसान थे जिसे मैंने फँसाया नहीं… बल्कि बचाना चाहा और भीड़ में खो गई।

राहुल को शालिनी की ये बातें कुछ समझ नहीं आई और उसने साफ साफ पूछ लिया… क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?

शालिनी के जवाब ने उसे पूरा हिलाकर रख दिया… क्योकि होठों ने तो इंकार किया लेकिन उसकी आंखो में प्यार साफ चमक रहा था.., दरसल शालिनी के इंकार के पीछे बहुत बड़ी वज़ह थी और वो वजह थी उसका काम, क्योकि वो नहीं चाहती थी कि राहुल को दुबारा कोई परेशानी हो या उसे शालिनी की वज़ह से किसी गलत चीज़ का सामना करना पड़े और उसकी जान को खतरा हो। इसलिए वो चुपचाप पीछे हट गई.., औऱ राहुल भी निराश होकर लौट गया।

कुछ लोग देवदूत बनकर आते हैं… लेकिन ये तय नहीं होता कि वो तुम्हें बचाने आए हैं—या सच दिखाने।                                  और कई बार दोतरफा प्यार भी एक नहीं हो पाता… मजबुरियों के कारण। जैसे राहुल और शालिनी के साथ हुआ… दोनों के बीच नज़दीकिया भी बड़ी और प्यार भी हुआ लेकिन रास्ते अलग होने की वज़ह से दोनों हमसफर नहीं बन पाए, बस एक दूसरे के लिए एक खूबसूरत याद बनकर रह गए।

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