एक लाश, तीन क़बूलनामा — सच जो किसी एक का नहीं था

 कहानी क्यों लिखी गई? हर क़त्ल में खून ज़रूरी नहीं होता। हर अपराध में हथियार ज़रूरी नहीं होता। कुछ अपराध धीरे-धीरे होते हैं— इतने धीरे कि जब तक सच सामने आता है, तब तक सब अपने-अपने सच के साथ खड़े हो चुके होते हैं। यह कहानी उसी तरह के एक क़त्ल की है। रामनगर पुलिस … Read more