जिस दिन उसने ‘I Love You’ कहा, उसी दिन मैं ग़ायब हो गया

उस दिन सब कुछ बिल्कुल सामान्य था, इतना सामान्य कि मुझे याद भी नहीं रहता अगर वही दिन मेरी ज़िंदगी का आख़िरी साधारण दिन न बन गया होता। शहर अपनी रोज़मर्रा की आवाज़ों में डूबा हुआ था, लोग अपने-अपने कामों में उलझे थे, और मैं भी उन्हीं में से एक था—ज़िंदा, मौजूद, पहचान वाला। लेकिन … Read more

एक लाश, तीन क़बूलनामा — सच जो किसी एक का नहीं था

 कहानी क्यों लिखी गई? हर क़त्ल में खून ज़रूरी नहीं होता। हर अपराध में हथियार ज़रूरी नहीं होता। कुछ अपराध धीरे-धीरे होते हैं— इतने धीरे कि जब तक सच सामने आता है, तब तक सब अपने-अपने सच के साथ खड़े हो चुके होते हैं। यह कहानी उसी तरह के एक क़त्ल की है। रामनगर पुलिस … Read more