प्लेटफ़ॉर्म नंबर 4 पर कोई इंतज़ार करता है

रेलवे स्टेशन सुबह-सुबह किसी ज़िंदा शहर जैसा होता है— घड़ियों की टिक-टिक, चाय की केतली, ट्रेन की सीटी, और भागते हुए क़दम। लेकिन इस स्टेशन पर एक प्लेटफ़ॉर्म ऐसा भी था जिसका नाम लोग लेते तो थे, पर उस पर रुकते बहुत कम थे। प्लेटफ़ॉर्म नंबर 4। वहाँ भी पटरियाँ थीं, वहाँ भी ट्रेनें रुकती … Read more