जुर्म जो दीवारों में दफ़्न था

हर जुर्म खून से नहीं होता। कुछ जुर्म ऐसे होते हैं, जो सालों तक सांस लेते रहते हैं— दीवारों के भीतर, फाइलों के नीचे, और सबसे ज़्यादा… क़ातिल के भीतर। हर रात ठीक 2:17 AM। ना 2:16 ना 2:18 ठीक 2:17 पर आरव मल्होत्रा की नींद उसी सेकंड टूटती थी। उसका फोन vibrate नहीं करता … Read more

उस अजनबी की ख़ुशबू

सुबह की बस में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं — और इसी उतार चडाव में कुछ चेहरे हमें ऐसे दिख जाते हैं जो उतरते ही नहीं… दिमाग में बैठ जाते हैं। राहुल को नहीं पता था कि उसकी ज़िंदगी की सबसे अहम कहानी,जिसे वो ना भुला पाएगा और ना कभी उसपर … Read more