भागी हुई बहूं
रात के सन्नाटे को चीरती हुई वह दुल्हन खाली सड़क पर भागी जा रही थी। लाल लहंगे का घेरा उसके…
रात के सन्नाटे को चीरती हुई वह दुल्हन खाली सड़क पर भागी जा रही थी। लाल लहंगे का घेरा उसके…
रेलवे स्टेशन सुबह-सुबह किसी ज़िंदा शहर जैसा होता है— घड़ियों की टिक-टिक, चाय की केतली, ट्रेन की सीटी, और भागते…
सुबह की बस में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं — और इसी उतार चडाव में कुछ…