Missed Call!

कई दिनों से सुबह के ठीक 6:00 बजे मेरा फोन वाइब्रेट हो रहा है लेकिन हर बार मै इसे इत्फाक़ समझ कर भूल जाता हूँ। आज फिर सुबह के ठीक 6:00 बजे ही मेरा फोन वाइब्रेट हुआ। Missed Call.

मैने नंबर देखा तो ये एक Private / Band Number निकला, मैंने भी करवट बदली। सोचा, कोई गलती होगी। लेकिन ये ध्यान नहीं दिया कि ये गलती… पिछले 11 दिनों से रोज़ हो रही थी।

हर सुबह ठीक 6:00 बजे एक ही सेकंड का missed call। न मैसेज, न दोबारा कॉल, न कोई आवाज़।

आज मैंने ठान लिया था— आज जवाब मिलेगा। मैंने उसी वक्त कॉल बैक किया। तो सामने से आवाज़ आई This number does not exist., दिल ज़रा तेज़ धड़कने लगा।

ऑफिस के लिए निकलते वक्त न्यूज़ ऐप खोला तो—BREAKING NEWS आज सुबह 5:55 बजे एक अज्ञात व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत। नीचे छोटी सी लाइन थी— मोबाइल फोन जेब में मिला, SIM dead condition में। फोटो देखी तो मेरे हाथ से फोन गिरते-गिरते बचा।

क्योंकि जेब में दिख रहा फोन वही मॉडल था जो मुझे रोज़ missed call करता था।

मैं सीधा थाने पहुँचा। इंस्पेक्टर ने नंबर सिस्टम में डाला तो कुछ सेकंड चुप्पी रही। फिर उसने मेरी तरफ देखकर कहा- ये नंबर…
आज सुबह 5:55 पर जिस आदमी की मौत हुई— उसी के नाम पर रजिस्टर्ड है।

मेरे मुँह से बस इतना निकला— पर मुझे 6:00 बजे call आया, मेरी इस बात पर इंस्पेक्टर हँसा और कहने लगा, सर dead आदमी call नहीं करते।तो मैंने अपना फोन दिखाया। Call log खुला था। 6:00 AM – Missed Call., इंस्पेक्टर का चेहरा बदल गया।

उसने धीरे से पूछा— पिछले दिनों में आपके आसपास किसी की मौत हुई है क्या?

मैंने सिर हिलाया—नहीं…

वो कुर्सी से उठा, दरवाज़ा बंद किया और बोला— अजीब बात है… इस आदमी की call history में मरने से पहले आपका नंबर आख़िरी outgoing call है— 5:59 AM पर।

मेरे गले से आवाज़ नहीं निकली। मैंने कभी उस आदमी को देखा तक नहीं था।

इंस्पेक्टर ने फाइल बंद की— आज रात फोन साइलेंट मत रखना और अगर कल भी 6:00 बजे call आए… उसने मेरी आँखों में देखा— तो समझ जाइए ये कोई गलती नहीं है। मैं घर लौटा रात को 11:59 पर, मेरा फोन टेबल पर रखा था। स्क्रीन अपने-आप ही जल उठी। Incoming Call…

वही Band Number और इस बार call cut नहीं हुआ और मैने भी फोन बंद होने का इंतज़ार किया।

अब रात हो चुकी थी और मैं भी ड़र ड़रकर सोने चला गया, रात के ठीक बारह बजे फोन की स्क्रीन अपने-आप जल उठी, जैसे किसी ने अँधेरे में मेरी नींद टटोल ली हो। वही बंद नंबर, वही ठंडा सा कंपन। कॉल उठाने की हिम्मत नहीं हुई, लेकिन इस बार एक नई बात थी—कॉल अपने-आप कटने के बजाय पूरे तीस सेकंड तक चलती रही। सुबह जब कॉल लॉग देखा तो दिल बैठ गया। समय लिखा था 5:59 AM। यानी कॉल आने से ठीक एक मिनट पहले, वो आदमी ज़िंदा था—और शायद जानता था कि मरने वाला है। दिन भर दिमाग में यही घूमता रहा कि कोई मरा हुआ इंसान आख़िरी मिनटों में मुझे क्यों याद कर रहा था। शाम होते-होते पुलिस का फोन आया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा था कि मौत से पहले उसकी धड़कन अचानक तेज़ हुई थी, जैसे उसने कुछ देख लिया हो।

उसी रात ठीक 6:00 बजे फोन फिर वाइब्रेट हुआ। इस बार स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन चमकी—“कल तुम्हारी बारी है।” और मुझे समझ आ गया कि ये कॉल अतीत से नहीं, आने वाले कल से आ रहे थे।

सुबह का उजाला धीरे-धीरे कमरे में फैल रहा था, लेकिन मेरा दिल अभी भी उस डरावनी कॉल से धड़क रहा था। हर दिन सुबह 6:00 बजे वही बंद नंबर, और अब मैं जान चुका था कि ये कोई आम कॉल नहीं थी। कल रात की लाइन—कल तुम्हारी बारी है—दिमाग में गूँज रही थी। जैसे कोई मेरे कदमों की निगरानी कर रहा हो। मैं कोशिश करता रहा कि फोन को साइलेंट कर दूँ, लेकिन हर बार जैसे कॉल खुद ही मेरे पास आती रही। ऑफिस में बैठा भी तो आंखें बार-बार फोन पर टिक गईं। और तभी नोटिस किया—पिछले कॉल्स की हिस्ट्री में छोटे बदलाव थे। हर मृतक के आख़िरी कॉल के ठीक एक मिनट पहले, यही बंद नंबर सक्रिय होता था। मैं डर के साथ समझ गया कि यह कोई साधारण इंसान नहीं बल्कि कोई भूत जैसा अस्तित्व था, जो अपनी मौत के पहले संदेश भेज रहा था। शाम तक थककर सो गया, लेकिन सपने में भी वही धड़कन सुनाई दी—फोन की आवाज़। रात 11:59 बजे फिर वही स्क्रीन चमकी और अब नंबर के साथ सिर्फ़ एक blinking cursor था। और जैसे ही 6:00 बजे हुआ, फोन ने खुद-ब-खुद कॉल कर दी। स्क्रीन पर एक नया संदेश आया—अगला निशाना तैयार है।

रात का अंधेरा कमरे में घुल गया था और फोन टेबल पर चमक रहा था, जैसे कोई छिपा हुआ आंख रखे बैठा हो। हर बार 6:00 बजे कॉल की घंटी मेरी धड़कन बढ़ा देती थी। लेकिन आज कुछ अलग था। कॉल उठाई और इस बार सिर्फ़ silence नहीं थी। हल्की-सी सांस की आवाज़ थी, धीमी और बहुत कमजोर किसी बुढे जैसी। मुझे एहसास हुआ कि यह वही आदमी था, जो मर चुका था, या कुछ उससे भी ज़्यादा डरावना। कॉल के अगले सेकंड में फोन अपने आप ही कट गया। स्क्रीन पर सिर्फ़ एक blinking line थी— समय आ गया है।कि तभी दिल में डर और जिज्ञासा दोनों मिक्स हो गए। पुलिस भी अब मेरी मदद कर रही थी, लेकिन कोई तार नहीं मिल रहा था। अगले दिन सुबह, उसी बंद नंबर से फिर कॉल आई। इस हादसे ने सबका दिमाग हिलाकर रखा हुआ था किसी को सही गलत कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्योकि जो मेरे साथ हो रहा था वो नामुम्किन था, इस बार मोबाइल की स्क्रीन पर नाम नहीं, सिर्फ़ लोकेशन का कोऑर्डिनेट्स लिखा था। मैंने जल्दी से मैप खोला और देखा—लोकेशन मेरे घर के पास एक खाली पार्क की ही थी। समझ आ गया कि यह सिर्फ़ चेतावनी नहीं, बल्कि अगला वार होने वाला है। मेरी नींद हराम हो गई, और हर कदम पर महसूस हुआ कि मेरी परछाईं भी अब सुरक्षित नहीं रही…. ड़र ड़रकर जीने की तो जैसे आदत हो गई थी।

अगले दिन सुबह के 5:55 बजे का समय और वही बंद नंबर। मैं कांपते हाथों से कॉल उठाया। इस बार आवाज़ साफ़ थी, लेकिन किसी ने बात नहीं की, बस एक धीमी गूंज थी—देख लिया। अचानक फोन के स्क्रीन पर एक तस्वीर आई, और मेरी आँखें फैल गईं। तस्वीर में मैं था, ऑफिस की कुर्सी पर, लेकिन पीछे वही आदमी, जो मर चुका था, मेरी पीठ पर खड़ा था। मैं चीख़ना चाहता था, लेकिन आवाज़ अंदर ही अंदर घुल गई और मेरा दिमाग बुरी तरह धूम गया। उसी वक्त दरवाज़ा अपने-आप खुला और कमरे में हल्की हवा चली, जैसे कोई छाया घूम रही हो। फोन गिरा, लेकिन स्क्रीन खुद-ब-खुद active रही। एक आख़िरी संदेश चमका—अब तुम समझोगे। तभी मुझे याद आया—पिछले सभी  नंबर एक्टिव होने से ठीक पहले मेरी मदद मांग रहे थे, और उनका संदेश सिर्फ़ चेतावनी नहीं बल्कि सुरक्षा का तरीका था। अचानक सब समझ में आया—ये कॉल मृतक की आत्मा की नहीं, बल्कि उनकी चेतावनी थी। अब मैं शांत हुआ, लेकिन फोन की स्क्रीन पर अभी भी वही blinking line थी… अब समझ में गया—जो डर और रहस्य रोज़ सुबह मेरे पास आता था, वह मेरी परीक्षा थी, और अब मैं उसे पूरा कर चुका था।

 

 

 

 

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