राज अपनी प्रेमिका रिया के साथ रहता था, दिन में उसे देखकर राज को लगता था कि उसकी दुनिया पूरी हो गई। सपनो जैसी प्रेमिका, उसकी मुस्कान में मिठास और आँखों में कुछ अनकहा था।
लेकिन रात होते ही सब बदल जाता था। रवि को सपने आने लगे—जहाँ रिया की परछाईं किसी और की बाहों में होती। वह देखता, छूता, लेकिन कोई नहीं था। उसकी धड़कन तेज़ हो जाती, पर दिन में रिया वही मीठी, वही प्यारी दिखती।
तुम ठीक हो? रिया ने पूछा, जैसे उसकी चिंता उसके सच को छुपा रही हो।
हाँ… बस अजीब सा सपना आया। राज ने झूठ बोला। उसके बाद से राज को रोज़ सपने आने लगे पर एक रात, जब वह उसे देखने गया, उसकी परछाईं आईने में उसके सामने थी—लेकिन वह राज से बात नहीं कर रही थी। वह किसी और मर्द से बात कर रही थी, मुस्कुरा रही थी और उसकी आँखों में वही घृणा और प्यार का अजीब मिश्रण था।
राज को महसूस हुआ कि सिर्फ़ प्यार ही नहीं, धोखा और खौफ़ भी उसके साथ खेल रहे हैं।
वो पहली बार सोचने लगा—क्या मैं उसे पूरी तरह जान भी पाया हूँ?, क्या वो मुझे सच में धोखा दे रही है
उस रात के बाद, एक दिन रिया ने अचानक हँसते हुए कहा, कुछ बातें जानने के लिए… दिल तैयार होना चाहिए।
राज को लगा कि यह सिर्फ़ प्रेम कहानी नहीं है कहीं कुछ छुपा हुआ है, और वो उसे धीरे-धीरे सामने ला रही है।
राज ने तय किया कि अब वह परछाईं का सच जाने बिना चैन से नहीं सोएगा। उसने रात को अपने कमरे में कैमरा लगवा दिया।
जैसे ही रात हुई, परछाईं आई—लेकिन सिर्फ़ आईने में। वह किसी और मर्द की बाहों में झुक रही थी, मुस्कुरा रही थी और उसके पास कोई नहीं था।
राज की साँसें रुक गईं। उसने कैमरा देखा—recorded footage में परछाईं सच में किसी और के पास जाती दिख रही थी।
ये कैसे हो सकता है? रवि ने गुस्से में फुसफुसाया।
रिया ने सुबह उसे मुस्कुराकर देखा, क्या हुआ?
राज ने कहा, मैंने तुम्हारा असली चेहरा देखा।
रिया की आँखों में एक अजीब चमक थी, जैसे वह भी नाटक करके धक गई हो और कह रही हो—अब खेल शुरू हो चुका है।
दिन बीतते गए। परछाईं और रिया का फर्क रोज़ उजागर होता गया। राज का प्यार अब धीरे-धीरे डर में बदल रहा था क्योकि जो रिया सुबह राजसे प्यार करती थी वो रात को अलग अलग मर्द के साथ होती थी, और फिर पहली बार उसे एहसास हुआ कि कोई उसकी जगह उसे धोखा दे रहा है—और कोई उसकी आत्मा से खेल रहा है।
उस रात, उसने देखा कि परछाईं ने उसकी तरफ़ देखा और मुस्कुराई—लेकिन मुस्कान में घृणा और साज़िश थी। रवि अब सिर्फ़ प्यार नहीं, बचाव की कोशिश कर रहा था। परछाईं के खेल ने उसके जीवन को बदल दिया।क्योकि उसने कभी रंगे हाथ रिया को नहीं पक्ड़ा था बल्कि उसकी परछाई को देखा था। वो रात जब रिया सो रही थी, रवि ने आईने के सामने खुद को देखा। परछाईं आई—लेकिन इस बार सीधे उसके सामने।
तुम सच जानना चाहते हो? परछाईं ने फुसफुसाया।
राज ने सिर हिलाया, डरते हुए।
तो अब तुम्हें भुगतना होगा।
उस रात सपनों और हकीकत की सीमा धुंधली हो गई। परछाईं ने उसे कमरे में घसीटा, जहाँ उसकी खुद की पुरानी गलतियाँ और छुपे ग़ुस्से projections की तरह सामने थे कि वो किस तरह अपनी रिया से प्यार तो बहुत करता है लेकिन उसकी खूबसूरती ही राज के शक का कारण भी है, क्योकि वे उसे गलत नज़रो से देखता था अगर वो किसी से भी बात कर लेती थी उसपर सिर्फ शक करता था और अब तो उसके शक ने सारी सीमाए पार होने लगी क्योकि अब सिर्फ हकीकत में ही नहीं बल्कि सपने में भी वो यही गंद देख रहा था जैसे उसका शक दिमाग तक पहुच गया हो।
राज ने पहली बार महसूस किया कि वह सिर्फ़ रिया के प्यार में नहीं फँसा, बल्कि उसके अंदर की हिंसा, घृणा और जलन के जाल में भी फँसा हुआ था क्योकि रिया ये सब सह तो रही थी लेकिन उदास वो भी रहती थी बस राज से सामने नही दिखाती थी पर वो भी चाहती थी की राज को अपनी गलती का एहसास हो,
सुबह हुई—रिया ने फिर मुस्कुराया, पर राज ने अब महसूस किया कि यह मुस्कान उसका दोस्त नहीं, दुश्मन थी।
अब खेल शुरू हुआ है, उसने खुद से ही कहा।
राज अब डर और प्यार के बीच फंसा हुआ था। दिन में रिया वही मीठी, हँसमुख लड़की थी, लेकिन रात आते ही परछाईं का खेल शुरू हो जाता। हर रात, रिया के आईने में वह परछाईं दिखती—जो उसके दिमाग को हिला देती थी।
राज ने तय किया कि अब वह passive नहीं रहेगा। उसने परछाईं का सामना करने के लिए रात में कमरे में खुद को रखा। कमरा ठंड और अजीब shadows से भरा था।
जैसे ही घड़ी की सुई 12 पर पहुँची, परछाईं आई—इस बार शांत नहीं, आक्रामक थी।
तुमने सोचा कि तुम मुझे देख नहीं सकते? उसने फुसफुसाया।
राज ने झिझकते हुए कहा, मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा। अब मैं जानना चाहता हूँ… सच क्या है।
परछाईं ने अचानक आईने में रिया को उसके सामने खड़ा कर दिया और बोला खेल तूने शुरू किया था मै अंत करने आई हूं। रिया मुस्कुराई, पर उसके चेहरे पर वही अजीब चमक थी। तुमने मेरी दुनिया में घुसकर खेल शुरू किया है। अब भुगतना होगा।
राज ने महसूस किया कि अब यह सिर्फ़ प्यार नहीं रहा। परछाईं ने उसके अंदर छुपे डर, जलन और गुस्से को उजागर किया। वह उसे लगातार psychological torture दे रही थी।
रात बितने के बाद, राज थक गया, पर अब अंदर की आग जल रही थी। उसने तय किया कि अगर वह जीवित रहना चाहता है और रिया को बचाना चाहता है, तो उसे परछाईं के खेल का reverse गेम खेलना होगा।
और यही वो रात थी, जब राज ने पहली बार परछाईं को अपने ही अंदर के डर और ग़ुस्से से हराने का फैसला किया लेकिन परछाई ने उसे उसी की हकीकत दिखा दी और राज को अपनी गलती का एहसास भी हुआ
अगली रात, कमरे में सब शांत था। रवि ने देखा कि परछाईं आई—लेकिन अब वह passive नहीं थी। उसकी आँखों में आग थी, और वह हर कदम पर रवि की आत्मा को चुनौती दे रही थी।
तुमने सब देखा, अब भुगतोगे, परछाईं ने कहा।
राज ने गहरी साँस ली। मैं डर नहीं रहा। अब मैं तुम्हें खत्म कर दूँगा—लेकिन सिर्फ़ मुझे धोखा देने वाली नहीं, मेरी खुद की कमजोरियों को और गलतियो को।
परछाईं ने हमला किया, पर राज ने समय रहते उसके आगे हाथ जोड़ लिए और मांफी मांग ली।
धीरे-धीरे, परछाईं रिया की मुस्कान में merge होने लगी। हर सपना अब खत्म होने लगा। रिया ने सामने आकर कहा, अब तुमने सब देखा और समझ लिया। शक्की मोहब्बत कभी पूरी नहीं होती, लेकिन जो भरोसा करता है, उसे कभी धोखा नहीं मिलता।
राज ने महसूस किया कि परछाईं उसकी खुद की डर और jealousy का projection थी। वह रिया को खोना नहीं चाहता था, पर अपनी कमजोरियों और jealousy से भी लड़ना सीख गया।
अगली सुबह, कमरे में सब शांत था। आईने में सिर्फ़ रिया और रवि की परछाईं के निशान नहीं थे—सिर्फ़ उनकी आँखों में समझ और प्यार था।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योकी अब राज जान गया कि मोहब्बत में शक करने से पहले विशवास करना पड़ता है और विशवास ही रिश्ते की सबसे बड़ी ड़ोर होती है।
मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।