शादी के बाद की पहली सुबह हमेशा बहुत ही खास होती है। घर में हँसी, मेहमानों की फुसफुसाहट, और नई दुल्हन के चेहरे पर हल्की सी लाज। क्योकि उस दुल्हन के चेहरे पर ही सबकी नज़र होती हैा लेकिन इस घर में कुछ अलग सा ही था।
सुबह के दस बज चुके थे, पर दूल्हा अपने कमरे से बाहर नहीं आया। पहले सबने सोचा—थका होगा वो ज्यादा देर तक सो रहा होगा। सुबह से दिन हो गई लेकिन दुल्हा अभी भी बाहर नहीं आया, फिर दरवाज़ा खटखटाया गया। तो कोई जवाब नहीं मिला। दरवाज़ा अंदर से ही बंद था।
दुल्हन, आर्या, मुस्कुराकर बोली— वो तो रात भर मेरे पास थे… अभी सो रहे होंगे।
सबने एक-दूसरे को देखा। जब बात हद से ज्यादा बड़ गई तो सब ड़र गए और दरवाज़ा तोड़ा गया।
कमरा एकदम खाली था। खिड़की बंद। बालकनी की ग्रिल जमी हुई। बाथरूम सूखा। एसा लग रहा था कि अंदर कोई था ही नहीं, और सबसे डरावनी बात तो ये थी की— बिस्तर का एक ही हिस्सा दबा हुआ था। जैसे वहाँ सिर्फ एक ही इंसान सोया हो।
घर में सन्नाटा फैल गया। CCTV फुटेज निकाली गई।
रात 2:13 AM… आर्या कमरे में अकेली दाखिल होती दिखी। उसके बाद कोई अंदर नहीं गया। और ना ही कोई बाहर आया।
लेकिन सुबह… वो सबको यकीन से बता रही थी— उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा था कि अब हम कभी अलग नहीं होंगे।
उसकी आँखों में डर नहीं था। सिर्फ अजीब-सी शांति थी। और उसी शांति में छिपा था—
एक ऐसा राज़… जो शादी से पहले ही खून से लिखा जा चुका था।
दूल्हे के गायब होने की खबर पूरे घर में आग की तरह फैल चुकी थी। रिश्तेदारों की फुसफुसाहट अब शक में बदल रही थी। नई बहूँ को अपशगुनी बोला जा रहा था, और उसके जो भी लोग अब तक लाड़ कर रहे थे अब वो उसे घणा भरी नज़रो से देख रहे थेा
पुलिस आई, कमरे की दोबारा तलाशी हुई। दरवाज़ा सच में अंदर से बंद था, ताला टूटा हुआ पड़ा था, लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं। आर्या शांत बैठी थी, जैसे उसे किसी बात की जल्दी ही न हो। इंस्पेक्टर ने उससे पूछा, आखिरी बार आपने उन्हें कब देखा? आर्या ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया—रात को… उन्होंने मुझे बाँहों में लेकर कहा था कि अब सब ठीक हो जाएगा।
क्या ठीक हो जाएगा?
इस सवाल पर पहली बार उसके चेहरे की मुस्कान हल्की-सी डगमगाई।
CCTV फुटेज फिर से देखी गई। रात 2:13 के बाद कमरे का दरवाज़ा नहीं खुला। लेकिन 3:07 पर कमरे की लाइट अपने-आप जली… और 3:09 पर बंद हो गई। अंदर कोई दिखा नहीं।
पुलिस ने मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले। दूल्हे का फोन शादी से एक दिन पहले से बंद था। एक और चौंकाने वाली बात सामने आई—दूल्हे की पुरानी मंगेतर की रहस्यमयी मौत।
आर्या ने धीरे से कहा— आप लोग गलत जगह तलाश रहे हैं… वो यहीं हैं। कमरे की हवा अचानक भारी लगने लगी।
क्या आर्या सच बोल रही थी… या सच उससे भी ज्यादा डरावना था?
जांच अब औपचारिकता नहीं रही थी, शक की रेखा सीधे आर्या पर आकर टिक गई थी।उसका जवाब देना और दो तरफा बातें करना सबको हैरान कर देता था..,  इंस्पेक्टर ने दूल्हे आरव के पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। शादी से एक हफ्ते पहले उसने अपनी बैंक से बड़ी रकम निकाली थी, लेकिन वह रकम कहीं ट्रांसफर नहीं हुई। उसके कॉल रिकॉर्ड में एक ही नंबर बार-बार दिख रहा था—आर्या का। पर चौंकाने वाली बात ये थी कि शादी से दो दिन पहले दोनों के बीच 27 मिनट की लंबी बातचीत हुई थी… जबकि उस समय दोनों एक ही घर में थे।
जब इंस्पेक्टर ने यह बात आर्या से पूछी, वह कुछ पल के लिए चुप रही, फिर बोली—मुझे कुछ याद नहीं… शायद नेटवर्क की समस्या रही होगी। उसकी आवाज़ में हल्की कंपकंपी थी, लेकिन आँखों में एक भी आँसू नहीं थे।
तलाशी के दौरान घर के स्टोर रूम से एक और अजीब चीज़ मिली—आरव की शेरवानी का दूसरा सेट, जिस पर हल्के-से गहरे धब्बे थे,उसे देखकर लगा जैसे किसी ने धोकर मिटाने की कोशिश की हो।
उसी रात, आर्या अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी थी। अचानक उसका चेहरा सख्त हो गया। उसने आईने में खुद को देखते हुए धीमे से कहा—तुमने वादा किया था… हमें छोड़कर नहीं जाओगे।
अगले ही पल, वही चेहरा नरम पड़ गया—मैं कहीं नहीं गया, आर्या… मैं यहीं हूँ।
कमरे में कोई और नहीं था।
पर पहली बार लगा—शायद आरव सच में गायब नहीं हुआ…
शायद वह आर्या के अंदर ही कहीं जिंदा था। 😈
पुलिस की जांच अब सीधे आर्या की मानसिक स्थिति की ओर मुड़ चुकी थी। डॉक्टर बुलाए गए। बातचीत के दौरान आर्या कभी शांत, संयमित और सामान्य दिखती… तो कभी अचानक उसकी आवाज़ भारी हो जाती, जैसे कोई और उसके भीतर से बोल रहा हो। डॉक्टर ने धीरे से पूछा, क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि आप दो लोग हैं? आर्या मुस्कुरा दी—नहीं… हम तो हमेशा दो जिस्म एक जान थे।
उसी रात, पुलिस को एक बड़ा सुराग मिला। शादी से तीन दिन पहले पास के एक फार्महाउस में खून के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, खून आरव का था। इसका मतलब साफ था—आरव की मौत शादी से पहले ही हो चुकी थी। इस खुलासे ने मानों सब कुछ पलट दिया हो लेकिन अब भी बड़ा सवाल ये था की—शादी किससे हुई?
शादी की वीडियो फुटेज दोबारा देखी गई। दूल्हे का सेहरा पूरे समय उसके चेहरे को ढके रहा। फेरे के दौरान आर्या की आँखें किसी अदृश्य व्यक्ति से बात करती दिखीं, जैसे वह सच में किसी के साथ वचन ले रही हो।
आर्या अपने कमरे में बैठी थी, मांग का सिंदूर सहलाते हुए फुसफुसाई— तुमने कहा था ना… हम सात जन्म साथ रहेंगे। कमरे में सन्नाटा था। पर शायद… उसके भीतर कोई अब भी ज़िंदा था। सच्चाई अब परत-दर-परत खुलने लगी थी। फार्महाउस से मिली रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी—आरव की मौत शादी से तीन दिन पहले हो चुकी थी। मौत का कारण सिर पर गहरी चोट। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उस रात फार्महाउस पर आर्या भी मौजूद थी। CCTV में उसकी कार साफ दिख रही थी।
जब पुलिस ने आर्या से सख्ती से पूछताछ की, तो वह अचानक रोने लगी—मैं उसे छोड़ नहीं सकती थी… उसने मुझे धोखा दिया था… पर वो मुझसे प्यार भी करता था… उसकी आवाज़ बदल रही थी। कभी वह खुद को पीड़ित बताती, कभी आरव को गुनहगार।
डॉक्टर की रिपोर्ट सामने आई—आर्या को डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर था। उसके भीतर एक और व्यक्तित्व था—जो खुद को आरव मानता था। वही उससे बातें करता, उसे गले लगाता, उससे वादे करता।
शादी के दिन मंडप में जो दूल्हा बैठा था… उसका चेहरा पूरे समय सेहरे से ढका रहा। किसी ने गौर नहीं किया कि फेरों के दौरान उसकी आवाज़ बहुत कम सुनी गई। वीडियो में कुछ अजीब था—एक पल के लिए सेहरा हटता है… और चेहरा साफ नहीं दिखता, जैसे कैमरा फोकस खो देता हो।
क्या आर्या ने सच में शादी से पहले आरव को मार दिया… और फिर अपने ही बनाए भ्रम से शादी रचा ली? या फिर कहानी में अभी भी कोई ऐसा सच छिपा था— जो सबको हैरान करने वाला था?
सच्चाई आखिरकार अदालत में सामने आई। फार्महाउस से मिले सबूत, खून के धब्बे, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट—सबने साबित कर दिया कि आरव की मौत शादी से पहले हो चुकी थी। उस रात फार्महाउस में आर्या और आरव के बीच तीखी बहस हुई थी। आरव ने कबूल किया था कि वह पहले भी अपनी मंगेतर को धोखा दे चुका है… और उसकी रहस्यमयी मौत भी एक हादसा नहीं थी।
गुस्से, दर्द और टूटे विश्वास के बीच आर्या के भीतर कुछ बिखर गया। उसी पल उसका दूसरा व्यक्तित्व जन्मा—जो खुद को आरव मानता था। बहस धक्का-मुक्की में बदली… और एक भारी लोहे की मूर्ति आरव के सिर पर जा गिरी।
खून बहता रहा।
आर्या बैठी रही।
लेकिन अगले ही दिन… उसने शादी की रस्में पूरी कीं। क्योंकि उसके भीतर आरव जिंदा था। वही उससे बात करता, वही उसे गले लगाता, वही वचन लेता।
जब अदालत ने उसे मानसिक उपचार केंद्र भेजने का फैसला सुनाया, आर्या मुस्कुरा दी।
उसने आईने में खुद को देखा और फुसफुसाई— देखा, मैंने कहा था ना… हम कभी अलग नहीं होंगे।
आईने में उसका प्रतिबिंब हल्का-सा मुस्कुराया… पर वो मुस्कान उसकी अपनी नहीं थी। क्योकि वो प्यार में सचमुच पागल हो चुकी थी

अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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