हर जुर्म खून से नहीं होता।
कुछ जुर्म ऐसे होते हैं,
जो सालों तक सांस लेते रहते हैं—
दीवारों के भीतर,
फाइलों के नीचे,
और सबसे ज़्यादा…
क़ातिल के भीतर।
हर रात ठीक 2:17 AM।
ना 2:16
ना 2:18
ठीक 2:17 पर आरव मल्होत्रा की नींद उसी सेकंड टूटती थी।
उसका फोन vibrate नहीं करता था।
रिंग नहीं होती थी।
बस स्क्रीन पर एक notification आता था—
New Voicemail
पहली बार जब आया,
आरव ने उसे एक गलती समझा।
दूसरी बार—
उसने network glitch समझा।
और तीसरी बार—
तीसरे बार उसने उसे play कर ही दिया।
उसमे किसी के बोलने की कोई आवाज़ नहीं।
बस…
सांसों की आवाज़ आ रही थी।
धीमी।
टूटी हुई।
जैसे कोई बोलना चाहता हो…
पर गला साथ न दे रहा हो।
आरव ने फोन कान से हटाया।
बकवास,
उसने खुद से ही कहा।
वो दिल्ली पुलिस में Senior Investigating Officer रह चुका था।
तीस साल के career में
बहुत लाशें देखी थीं,
confessions सुने थे,
चीखें रिकॉर्ड की थीं।
पर ये…
ये सबसे अलग था।
चौथी रात भी उसे ठीक उसी समय voicemail आया।
इस बार…
सांसों के बीच एक शब्द था।
बहुत हल्का।
लगभग दबा हुआ।
पर साफ।
तुमने मुझे बंद किया था।
अचानक आरव का हाथ काँप गया।
फोन फिसलते-फिसलते बचा।
उसका दिमाग उसी पल
पाँच साल पीछे चला गया।
Case File No. 317/2019
Victim: Siya Verma
Status: Missing, Presumed Dead
सिया—
एक 27 साल की बहुत होनहार RTI activist थी।
उसका काम था
सरकारी घोटालों पर सवाल उठाना, ये काम जितना जोखिम भरा था उतना ही उसे पसंद था और उतनी ही इमानदारी के साथ वो करती थी।
उसका आख़िरी केस—
Delhi Housing Redevelopment Project था।
और उस केस का IO था—
Inspector Aarav Malhotra.
इस केस के दौरान ही उनकी मुलाकात हुई और उस सुनसान काली रात ही सिया आख़िरी बार
आरव से मिलने गई थी।
उसके बाद से ही वो—
लापता हो गई।
कई कोशिशे के बाद भी वो नहीं मिली पूछताछ लंबा चला, लगभग तीन महीने search चला।
CCTV, call records, river scan… सब कुछ किया लेकिन।
कुछ नहीं मिला।
और Case बंद हुआ।
इस बीच आरव ने कई केस देखे और उसको promotion भी मिला।
पाँचवीं रात voicemail के साथ
एक location pin आया।
आरव ने देखा और उसकी सिट्टी-पिट्टी गुल हो गई… वो कितना भी सख्त बनने की कोशिश कर रहा हो लेकिन ड़र उसे भी लग रहा था।
उसकी सांस रुक गई।
Shivaji Apartments – Block C
Abandoned since 2018
मैसेज में ये जो जगह थी इसे…
वो जानता था।
बहुत अच्छे से, कई राज़ और यादे जो जुड़ी थी इस जगह से।
रात के 3 बजे, वो अकेले ही निकल गया…
आरव खुद गाड़ी चला रहा था।
कोई पुलिस नहीं।
कोई backup नहीं।
Apartment की लाइटें बुझी थीं।
सीढ़ियाँ चढ़ते वक़्त
हर कदम पर ऐसा लगा
जैसे कोई पीछे है या जैसे कोई साथ ही चल रहा हो बस दिख ना रहा हो।
कमरा 217।
दरवाज़ा पहले से ही खुला हुआ था। आरव बिना सोचे सीधा अंदर चला गया जैसे किसी ने उसे जोर से खीचा हो
अंदर—
उस सुनसान कमरे में एक बहुत पुराना tape recorder चल रहा था।
वही सांसें सुनाई दे रही थी जिसे वो हर रात फोन पर सुनता था।
इतने में उसकी नज़र दीवार पर पड़ी… उसपर,
लाल रंग से जो लिखा था… उसे देखकर उसका गला सूख गया — वहां लिखा था…
हर रात तुम मेरी चीख़ सुनते थे।
अचानक से आरव के कानों में सालो पुरानी
उस रात की आवाज़ गूँज गई।
तब सिया जिंदा थी और उस रात सिया रो रही थी, गिड़गिड़ा रही थी।
Sir, मैं बस सबूत चाहती हूँ।
सिया को यू रोता देख आरव ने ज़ोर से दरवाज़ा बंद किया था क्योकि उसे लगा की कही कोई उन दोनों को यू अकेले में देख ना ले और गलत अफ्वाह न फैला दे… आरव को अपनी वर्दी और अपने काम से बहुत प्यार था, इस लिए वो खुद पर कोई दाग नहीं लगाना चाहता था।
आरव ने थप्पड़ नहीं मारा।
गोली नहीं चलाई।
बस…
उसे पीछे ज़ोर से धक्का दिया।
और अचानक से दीवार का panel खुल गया था क्योकि वहा।
पुरानी construction चल रही थी।
सिया उसी वक्त गिर गई।
आरव समझ तो गया था की कुछ गलत हो गया है लेकिन उसे ड़र था कि कही सिया उसपर कोई इल्ज़ाम लगाकर उसे बर्बाद ना कर दे… इसलिए उसने अपने लालच और ड़र की वजंह से तुरंत बिना कुछ सोचे, बिना सिया पर तरस खाए panel बंद कर दिया।
उसे लगा—
वो मर चुकी है… अगर बचाने गया तो केस की जांच होगी और मै पक्ड़ा जाऊंगा।
पर वो इस बात से अंज़ान था की वो ज़िंदा थी।
तीन दिन।
तीन रात।
वो उस दीवार के पैनल के अंदर तड़पती रही, चीख़ती रही, खुद को बचाने की आवाज़ लगाती रही… लेकिन वो चीखे सिर्फ उन दीवारो के बीच दबकर रह गई… और बाहर का उजाला देखने की चॉह में उसने उन्ही दीवारो के बीच तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया… और उसकी बहुत दर्दनाक मौत हुई।
Tape recorder अचानक बंद हुआ।
आरव को पछतावा होने लगा वो खुद गिड़गिड़ाकर मांफी मांगने लगा की तभी पीछे से आवाज़ आई—
अब मेरी बारी, बदला लेने की।
आरव पछतावे के साथ मुड़ा।
कोई नहीं था।
उसने ड़र ड़रकर और पछतावे की नज़रो के साथ शीशे में देखा।
तो उसे एक कमज़ोर आरव दिखा जो वो खुद था और उसकी आँखो में इल्ज़ाम था। अचानक कमरे की वो हल्की रोशनी भी गुल हो गई और चारो तरफ सिर्फ सन्नाटा और अँधेरा हो गया।
सुबह 6:40 बजे, चारो तरफ उजाला हो गया और
सफाईकर्मी सभी कमरो में सफाई करते करते उस कमरे में पहुच गए और वहा पहुचते ही उनके होश उड़ गए क्योकि उन्होने वहा जो देखा उसे देखकर कोई भी होश खो बैठता क्योकि वहॉ लाश थी। आरव मल्होत्रा की।
कमरा 217।
आरव मल्होत्रा।
Post-mortem रिपोर्ट में जो आया उसे जानकर आप जरूर दंग रह जांएगे क्योकि :
Cause of Death:
Extreme guilt-induced cardiac arrest था और इसी के बाद…
Case closed।
मौत के तीन हफ्ते बाद
एक पत्रकार को लावारिस पड़ा हुआ envelope मिला।
उसके अंदर—
एक pendrive थी।
उसमें audio file थी।
वही सांसों की आवाज़ थी।
और एक लाइन लिखी हुई थी—
मैं मरने से पहले नहीं…
मारे जाने के बाद बोली।
वो Tape recorder आज भी उसी कमरे में चल रहा है और ड़र के कारण वहॉ कोई नहीं जाता।
क्योकि हर रात।
ठीक 2:17 AM।
पर वहॉ वो Tape recorder उन्ही गहरी सासो को सुनाता है…जैसे आज भी उसकी आत्मा उन दीवारो के बीच तड़प रही हो और आज भी उसे मोक्ष न मिला हो।