dulhan ka kamra
dulhan ka kamra

शहर के बीचों-बीच खड़ा राजमहल होटल बाहर से जितना शानदार दिखता था, अंदर उतनी ही रहस्यमयी कहानियाँ छिपी थीं।

लोग कहते थे कि इस होटल में एक कमरा है — कमरा 307 — जिसे पिछले 15 सालों से बंद रखा गया है।

होटल के पुराने कर्मचारी भी उस कमरे का नाम सुनते ही चुप हो जाते थे।

कहानी यह थी कि कई साल पहले इसी होटल में एक शाही शादी हुई थी।
दुल्हन बेहद खूबसूरत थी — लाल जोड़े में, हाथों में मेहंदी और आँखों में नए जीवन के सपने।

लेकिन शादी की रात कुछ ऐसा हुआ… जिसने सब कुछ बदल दिया।

सुबह जब होटल स्टाफ कमरे में गया, तो दुल्हन छत के पंखे से लटकी हुई मिली

उसके बाद से कमरा 307 बंद कर दिया गया।

लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि रात के समय उस कमरे से पायल की आवाज़ आती है…
कभी-कभी किसी के रोने की आवाज़ भी सुनाई देती है।

होटल का नया मैनेजर अभिषेक इन सब बातों को सिर्फ अफवाह मानता था।

एक दिन होटल में भीड़ ज्यादा हो गई। सारे कमरे भर चुके थे।

रिसेप्शन पर खड़ा एक युवक बोला —
मुझे आज ही कमरा चाहिए… कोई भी चलेगा।

अभिषेक कुछ देर सोचता रहा।

फिर उसने धीरे से रजिस्टर उठाया… और चाबी निकालकर युवक के सामने रख दी।

चाबी पर लिखा था — 307

पास खड़े पुराने वेटर की आँखें अचानक डर से फैल गईं।

उसने धीरे से कहा —
सर… वो कमरा…

अभिषेक मुस्कुराया।

भूत-प्रेत कुछ नहीं होते।

युवक चाबी लेकर सीढ़ियों से ऊपर चला गया।

लेकिन जैसे ही कमरा 307 का दरवाज़ा खुला…

अंदर से हल्की सी पायल की आवाज़ आई।

कमरा 307 कई सालों से बंद था।

जैसे ही युवक आरव ने दरवाज़ा खोला, एक ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया।

कमरे में हल्की-हल्की धूल थी, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि बिस्तर बिल्कुल साफ था… जैसे किसी ने अभी-अभी उसे ठीक किया हो।

आरव थोड़ा हँसा।

लोग भी ना… कैसी-कैसी कहानियाँ बना लेते हैं।

उसने बैग रखा और कमरे की लाइट ऑन कर दी।

कमरे में एक बड़ा आईना था, दीवार पर पुरानी पेंटिंग्स लगी थीं, और खिड़की से होटल का बगीचा दिखाई दे रहा था।

सब कुछ सामान्य लग रहा था।

रात धीरे-धीरे गहरी होने लगी।

करीब रात के 1 बजे, अचानक आरव की नींद खुल गई।

उसे लगा जैसे किसी ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया हो।

उसने उठकर देखा… दरवाज़ा पहले की तरह बंद था।

आरव वापस बिस्तर पर बैठ गया।

तभी उसे पायल की हल्की आवाज़ सुनाई दी।

छन… छन… छन…

जैसे कोई धीरे-धीरे कमरे में चल रहा हो।

आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।

उसने इधर-उधर देखा।

कमरे में कोई नहीं था।

आवाज़ अचानक बंद हो गई।

आरव ने गहरी सांस ली और खुद को समझाया कि यह शायद उसका वहम है।

वह फिर से लेट गया।

लेकिन कुछ ही देर बाद उसे लगा कि कोई उसके बिस्तर के पास खड़ा है।

धीरे-धीरे उसने आँखें खोलीं।

आईने में उसे कुछ दिखाई दिया।

उसके पीछे…

लाल जोड़े में खड़ी एक दुल्हन की परछाई।

आरव झटके से पलटा।

लेकिन कमरे में कोई नहीं था।

डर के बावजूद वह जैसे-तैसे रात काट गया।

सुबह जब वह उठा… तो उसकी नज़र दीवार पर पड़ी।

वहाँ एक नई फोटो टंगी हुई थी।

और उस फोटो में…

आरव दूल्हे के कपड़ों में खड़ा था…

और उसके पास वही लाल जोड़े वाली दुल्हन मुस्कुरा रही थी।

सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी, लेकिन आरव के चेहरे का रंग उड़ चुका था।

दीवार पर लगी तस्वीर को देखकर उसकी सांस जैसे रुक गई थी।

तस्वीर बिल्कुल नई लग रही थी।

उसमें आरव दूल्हे के कपड़ों में खड़ा था, और उसके बगल में वही लाल जोड़े वाली दुल्हन खड़ी थी… जिसकी परछाई उसने रात को आईने में देखी थी।

आरव धीरे-धीरे तस्वीर के पास गया।

उसने तस्वीर को हाथ में उठाया।

पीछे कुछ लिखा हुआ था।

कांपते हाथों से उसने पढ़ा —

अब तुम मेरे हो… हमेशा के लिए।

आरव का गला सूख गया।

ये… ये कैसे हो सकता है? उसने खुद से कहा।

वह तुरंत कमरे से बाहर भागा और रिसेप्शन पर पहुँचा।

ये फोटो किसने लगाई? उसने घबराते हुए पूछा।

रिसेप्शन पर बैठे मैनेजर अभिषेक ने हैरानी से कहा —
कौन सी फोटो?

आरव ने तस्वीर सामने रख दी।

अभिषेक का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

पास खड़ा पुराना वेटर धीरे-धीरे बोला —

सर… ये वही फोटो है…

जो हर उस आदमी की मिलती है… जो कमरा 307 में रात बिताता है।”

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।

मतलब?

वेटर ने धीरे से कहा —

सालों पहले जिस दुल्हन ने यहाँ जान दी थी… वो हर साल अपना दूल्हा ढूंढती है।”

और जिसे वो चुन लेती है…

वेटर की आवाज़ कांपने लगी।

वो कभी यहाँ से जिंदा नहीं जाता।

आरव तुरंत अपना सामान लेने कमरे की तरफ भागा।

लेकिन जैसे ही वह कमरा 307 के सामने पहुँचा…

दरवाज़ा अपने आप धीरे-धीरे खुल गया।

अंदर से फिर वही आवाज़ आई —

छन… छन… छन…

और किसी लड़की की धीमी आवाज़…

दूल्हे राजा… वापस आ गए?

आरव का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

कमरा 307 का दरवाज़ा आधा खुला था।

अंदर से हल्की खुशबू और पायल की आवाज़ आ रही थी।

आरव धीरे-धीरे अंदर गया।

कमरा अब पहले जैसा नहीं था।

जहाँ कल धूल थी… वहाँ अब सब कुछ चमक रहा था।

बिस्तर पर लाल गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी थीं।

दीवारों पर शादी की सजावट थी।

जैसे कमरे में शादी की रात फिर से जिंदा हो गई हो।

आरव पीछे मुड़कर भागना चाहता था।

लेकिन तभी…

दरवाज़ा जोर से धड़ाम से बंद हो गया।

कमरे में अचानक ठंड बढ़ गई।

आईने के सामने कोई खड़ा था।

लंबे खुले बाल… लाल जोड़ा… हाथों में मेहंदी…

वही दुल्हन।

आरव की आवाज़ गले में ही अटक गई।

दुल्हन धीरे-धीरे उसकी तरफ मुड़ी।

उसकी आँखें अजीब थीं… जैसे उनमें दर्द और गुस्सा दोनों भरे हों।

वह मुस्कुराई।

तुम आ गए…

आरव पीछे हटने लगा।

तुम… तुम कौन हो?

दुल्हन धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।

मैं… इस कमरे की दुल्हन हूँ।

उसकी पायल की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।

मेरी शादी की रात… मेरा दूल्हा मुझे छोड़कर भाग गया था।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

उसने मुझे धोखा दिया…

अचानक उसका चेहरा गुस्से से भर गया।

इसलिए अब हर साल… मैं अपना दूल्हा खुद चुनती हूँ।

आरव का दिल जैसे रुक गया।

दुल्हन उसके बिल्कुल सामने आकर खड़ी हो गई।

उसने धीरे से कहा —

और इस साल… वो दूल्हा तुम हो।

उसी पल कमरे की लाइट झपकने लगी…

और आईने में दिखाई दिया —

आरव दूल्हे के कपड़ों में खड़ा था।

और उसके बगल में…

वही मुस्कुराती हुई मौत की दुल्हन।

कमरे की लाइट बार-बार झपक रही थी।

आरव डर से जमे हुए खड़ा था।

उसके सामने खड़ी दुल्हन धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थी। उसकी पायल की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।

आरव ने हिम्मत जुटाकर पूछा —
तुम… तुम ऐसा क्यों कर रही हो?

दुल्हन की आँखों में अचानक दर्द उतर आया।

वह कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से बोली —

क्योंकि मेरी शादी… कभी पूरी नहीं हुई।

कमरे की हवा अचानक ठंडी हो गई।

दुल्हन आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई।

15 साल पहले… इसी कमरे में मेरी शादी हुई थी।

सब कुछ बिल्कुल ऐसा ही था… फूल, सजावट, रोशनी…

उसकी आवाज़ काँपने लगी।

लेकिन शादी के बाद… मेरा दूल्हा गायब हो गया।

आरव ध्यान से सुन रहा था।

दुल्हन की आँखों में अब गुस्सा था।

मुझे बाद में पता चला… वो किसी और से प्यार करता था। उसने सिर्फ पैसे के लिए मुझसे शादी की थी।

और उसी रात… वो मुझे छोड़कर भाग गया।

कमरे में अचानक तेज हवा चलने लगी।

उस रात मैं टूट गई थी… और मैंने अपनी जान दे दी।

कुछ पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।

फिर दुल्हन धीरे-धीरे आरव की तरफ मुड़ी।

लेकिन मेरी आत्मा इस कमरे में फंस गई।

उसकी आवाज़ अब डरावनी हो चुकी थी।

मेरी शादी अधूरी थी…

इसलिए हर साल… मैं अपना नया दूल्हा चुनती हूँ।

आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।

लेकिन अगर मेरी शादी पूरी हो जाए…

दुल्हन की आँखों में अजीब चमक आई।

तो शायद… मुझे मुक्ति मिल जाए।

वह आरव के बिल्कुल करीब आ गई।

और फुसफुसाकर बोली —

आज रात… हमारी शादी होगी।

कमरा 307 अब पूरी तरह बदल चुका था।

दीवारों पर रोशनी थी, फूलों की खुशबू फैल रही थी।

आरव ने नीचे देखा।

उसके कपड़े बदल चुके थे।

वह सचमुच दूल्हे के कपड़ों में खड़ा था।

उसके हाथ काँप रहे थे।

दुल्हन उसके सामने खड़ी थी।

“डरो मत…” उसने धीमी आवाज़ में कहा।

बस सात फेरे… और सब खत्म हो जाएगा।

कमरे के बीचों-बीच अचानक एक अग्नि कुंड जल उठा।

आरव समझ गया कि अगर उसने कुछ नहीं किया… तो वह कभी यहाँ से बाहर नहीं जा पाएगा।

तभी उसकी नजर दीवार पर लगी पुरानी तस्वीर पर पड़ी।

वह तस्वीर उसी दूल्हे की थी… जिसने दुल्हन को धोखा दिया था।

अचानक आरव के दिमाग में एक ख्याल आया।

उसने दुल्हन से कहा —

अगर शादी पूरी करनी है… तो असली दूल्हे के साथ करो।

दुल्हन की आँखें सिकुड़ गईं।

क्या मतलब?

आरव ने तस्वीर की तरफ इशारा किया।

जिसने तुम्हें धोखा दिया… वही तुम्हारा असली दूल्हा है।

कुछ पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।

दुल्हन धीरे-धीरे तस्वीर के पास गई।

उसकी आँखों में अचानक गुस्सा भड़क उठा।

कमरा जोर-जोर से हिलने लगा।

दीवार पर लगी तस्वीर खुद-ब-खुद गिर गई।

तस्वीर के अंदर से एक काली परछाई निकलकर कमरे में तड़पने लगी।

दुल्हन चीखी —

आज… मेरी शादी पूरी होगी!

और अगले ही पल वह उस परछाई पर टूट पड़ी।

पूरा कमरा तेज रोशनी से भर गया।

कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया।

सुबह जब होटल स्टाफ ने कमरा 307 खोला…

कमरा बिल्कुल खाली था।

फूल, सजावट… सब गायब।

बस दीवार पर एक तस्वीर टंगी थी।

उस तस्वीर में दुल्हन अपने असली दूल्हे के साथ खड़ी मुस्कुरा रही थी।

और नीचे लिखा था —

अब मैं आज़ाद हूँ।

 

 

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