जुर्म जो दीवारों में दफ़्न था

हर जुर्म खून से नहीं होता। कुछ जुर्म ऐसे होते हैं, जो सालों तक सांस लेते रहते हैं— दीवारों के भीतर, फाइलों के नीचे, और सबसे ज़्यादा… क़ातिल के भीतर। हर रात ठीक 2:17 AM। ना 2:16 ना 2:18 ठीक 2:17 पर आरव मल्होत्रा की नींद उसी सेकंड टूटती थी। उसका फोन vibrate नहीं करता … Read more

उस अजनबी की ख़ुशबू

सुबह की बस में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं — और इसी उतार चडाव में कुछ चेहरे हमें ऐसे दिख जाते हैं जो उतरते ही नहीं… दिमाग में बैठ जाते हैं। राहुल को नहीं पता था कि उसकी ज़िंदगी की सबसे अहम कहानी,जिसे वो ना भुला पाएगा और ना कभी उसपर … Read more

कब्र के नीचे से कोई बुलाता है

कुछ जगहें मरी हुई नहीं होतीं… बस इंतज़ार करती हैं — किसी के लौट आने का। वह कॉल जो नहीं आनी चाहिए थी रात के 2:17 बजे मेरा फोन बजा। इतनी रात फोन… वो भी Unknown Number से — और वो भी तब, जब मैं जानता था कि जिसे मैं सुनने वाला हूँ, वो ज़िंदा … Read more

एक लाश, तीन क़बूलनामा — सच जो किसी एक का नहीं था

 कहानी क्यों लिखी गई? हर क़त्ल में खून ज़रूरी नहीं होता। हर अपराध में हथियार ज़रूरी नहीं होता। कुछ अपराध धीरे-धीरे होते हैं— इतने धीरे कि जब तक सच सामने आता है, तब तक सब अपने-अपने सच के साथ खड़े हो चुके होते हैं। यह कहानी उसी तरह के एक क़त्ल की है। रामनगर पुलिस … Read more

उसने मुझसे प्यार नहीं, मुझसे सच छुपाया था

मुझे लगता था कि राघव मुझे सबसे ज्यादा चाहता है, कि उसकी दुनिया में मैं उसकी ज़िंदगी की सबसे अहम चीज़ हूँ, कि उसके हर मुस्कान और हर छुपी हुई झलक में सिर्फ मेरा ही नाम लिखा है। लेकिन सच यह था कि वो मुझे पास इसलिए रख रहा था ताकि मैं कभी भी असली … Read more