जिस दिन उसने ‘I Love You’ कहा, उसी दिन मैं ग़ायब हो गया

उस दिन सब कुछ बिल्कुल सामान्य था, इतना सामान्य कि मुझे याद भी नहीं रहता अगर वही दिन मेरी ज़िंदगी का आख़िरी साधारण दिन न बन गया होता। शहर अपनी रोज़मर्रा की आवाज़ों में डूबा हुआ था, लोग अपने-अपने कामों में उलझे थे, और मैं भी उन्हीं में से एक था—ज़िंदा, मौजूद, पहचान वाला। लेकिन … Read more

खून का सच बना, प्यार की सज़ा

शादी के बाद की पहली रात ही अदिति ने पहली बार आरव का हाथ पकड़ा था और हाथ पकड़कर उससे बोली अगर ज़िंदगी ने हमें अलग कर दिया तो भी तुम मुझे याद रखोगे न? आरव हँसा और बोला तुम बड़ी ड्रामेबाज़ हो बाबू। उसे नहीं पता था— ये सवाल भविष्य की चेतावनी था। उनकि … Read more

आख़िरी आवाज़

मै आरव, मेरा ट्रांस्फर एक नए शहर मे हुआ था और जल्द बाजी में मैने अपने लिए मकान भी आँफिस के पास ही ले लिया था… आज उस घर में मेरा पहला दिन था दिनभर का थका हुआ मैं, रात को जल्दी सो गया की तभी ठीक 2:17 बजे मुझे एक लड़की की चीखने की … Read more

शादी के बाद दुल्हन की रिपोर्ट में लिखा था: Already Dead

अक्सर जब लड़को की पड़ लिखकर अच्छी नौकरी लग जाती है तो घर में माँ जवान बेटे के लिए एक सुंदर और सुशील लड़की ढूड़ना शुरू कर देती है और आम जिंदगी में एसा ही होता भी है। एसे ही राघव की माँ ने भी अपने बेटे के लिए लड़की ढूंड़ी, राघव को कभी शक … Read more

एक दिन की दुल्हन, नौ महीने का सच

शर्मा जी के घर में पिछले एक महीने से जैसे मेला लगा था। रिश्तेदार, फोन कॉल, पंडित की तारीखें, कपड़ों के ढेर, और हर बातचीत के अंत में वही लाइन— लड़की बहुत संस्कारी है… ज़्यादा बोलती नहीं। लड़की का नाम था अनन्या। लड़का—आदित्य, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सीधा-सादा, ज़िंदगी को प्लान में जीने वाला इंसान। पहली मुलाकात … Read more

कुछ लोग लौटते नहीं, बस मिलते हैं

शाम की लोकल ट्रेन में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं और देखा जाए तो ये रोज़ की जिंदगी का आम सा हिस्सा है लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो किसी स्टेशन पर नहीं उतरते— बस एक याद में अटक जाते हैं। अर्जुन भी उन्हीं में से था। हर शाम वो … Read more

हर इंकार की कीमत मौत!

वो मेरी ज़िंदगी में अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे घुसी थी। कभी चाय पर, कभी माँ की दवाइयों के बहाने। माँ को वो बहुत पसंद थी, माँ हमेशा कहती थीं, लड़की शांत है… घर संभाल लेगी लेकिन मुझे उसका शांत होना कभी-कभी डराने लगता,  ज़्यादा सवाल नहीं, ज़्यादा भावनाएँ नहीं। बस सब कुछ ध्यान से देखती … Read more

मोहब्बत थी… या सज़ा?

उससे पहली मुलाक़ात बिल्कुल फ़िल्मी नहीं थी। ना बारिश थी, ना स्लो मोशन। बस एक जेल की दीवार थी… और मैं, जो वहाँ एक crime story cover करने गया था। वो सलाखों के उस पार खड़ी थी। आँखों में डर नहीं, बल्कि ऐसा सुकून जैसे उसने सब पहले से स्वीकार कर लिया हो। उसने मुझसे … Read more

उसने कहा था इंतज़ार करना… मैं मर गया

उसने जाते वक़्त बस एक ही बात कही थी— इंतज़ार करना… मैं लौटूँगी। उस पल उसकी आँखों में मैंने कोई झूठ नहीं देखा। बस एक अजीब-सी मजबूरी थी, जैसे वो खुद भी अपने फैसले से डर रही हो। मैं रोज़ शाम उसी बेंच पर बैठता, जहाँ आख़िरी बार वो हँसी थी। वही जगह, वही समय… … Read more

मेरी प्रेमिका की परछाईं मुझे धोखा दे रही थी

राज अपनी प्रेमिका रिया के साथ रहता था, दिन में उसे देखकर राज को लगता था कि उसकी दुनिया पूरी हो गई। सपनो जैसी प्रेमिका, उसकी मुस्कान में मिठास और आँखों में कुछ अनकहा था। लेकिन रात होते ही सब बदल जाता था। रवि को सपने आने लगे—जहाँ रिया की परछाईं किसी और की बाहों … Read more