एक छोटे से गाँव में 18 साल की मासूम लड़की काव्या की शादी अचानक एक अमीर लेकिन रहस्यमयी परिवार में कर दी जाती है।
शादी की सारी रस्में खत्म हो चुकी थीं। रात गहरा चुकी थी और हवेली के आंगन में अब सिर्फ धीमी रोशनी और थकी हुई फुसफुसाहटें रह गई थीं।
18 साल की काव्या अपने लाल जोड़े में चुपचाप खड़ी थी। उसके हाथों की मेहंदी अभी भी गीली थी और दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था जैसे सीने से बाहर निकल आएगा।
यह उसकी शादी की पहली रात थी।
सास ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और उसे हवेली के एक लंबे, सुनसान गलियारे की तरफ ले जाने लगी।
काव्या ने पहली बार उस हवेली को ध्यान से देखा। ऊँची-ऊँची दीवारें, पुराने झूमर और अजीब सा सन्नाटा… जैसे यह घर कुछ छुपा रहा हो।
जब वे कमरे के दरवाज़े तक पहुँचे, सास अचानक रुक गई।
उसने काव्या के कंधे पर हाथ रखा और उसके कान के बिल्कुल पास आकर धीरे से कहा—
“चुपचाप सह लेना… बिल्कुल मत रोना।”
काव्या के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई।
उसके दिमाग में एक ही ख्याल घूमने लगा—
क्या आज रात उसके साथ कुछ गलत होने वाला है?
उसने डरते हुए सास की तरफ देखा, लेकिन सास का चेहरा बिल्कुल सख्त था।
सास ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा—
अंदर जाओ… तुम्हारा पति इंतज़ार कर रहा है। काव्या कांपते कदमों से कमरे के अंदर चली गई। लेकिन जैसे ही वह अंदर पहुंची…
उसका दिल जोर से धड़क उठा। कमरे में उसका पति अमित नहीं था। और कमरे के बीचोंबीच फर्श पर सफेद चादर बिछी थी… और उसके ऊपर एक पुरानी सी लकड़ी की कुर्सी रखी थी।
और उस कुर्सी के सामने दीवार पर टंगी थी— एक औरत की बड़ी सी तस्वीर।
तस्वीर में वह औरत भी बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई थी। लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब डर था। और तस्वीर के नीचे लिखा था—
“दुल्हन – 2006”
काव्या अभी तस्वीर को देख ही रही थी कि अचानक…
कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ सुनकर काव्या घबरा गई। उसने तुरंत पीछे मुड़कर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। लेकिन दरवाज़ा अंदर से नहीं खुल रहा था। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वो पूरी तरह सहम गई,
कोई है…? उसने धीरे से आवाज़ लगाई।
लेकिन पूरे कमरे में सिर्फ सन्नाटा था। काव्या की नजर फिर दीवार पर लगी उस तस्वीर पर गई। वह दुल्हन बिल्कुल उसी की तरह लाल जोड़े में थी…
लेकिन उसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। जैसे वह किसी अनहोनी से पहले की आखिरी तस्वीर हो। तभी अचानक कमरे की लाइट हल्की-हल्की झिलमिलाने लगी। काव्या घबराकर पीछे हट गई। और उसी पल उसे महसूस हुआ कि कमरे में वह अकेली नहीं है।
उसने धीरे-धीरे सिर घुमाया। कमरे के कोने में अंधेरे के बीच कोई खड़ा था। काव्या की सांस अटक गई। वह एक बूढ़ी औरत थी।
सफेद साड़ी, झुकी हुई कमर और आंखों में अजीब सी चमक। काव्या डरते हुए बोली— आप… कौन हैं?
बूढ़ी औरत धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी। मैं वही हूँ… जिसकी तस्वीर तुम देख रही हो। काव्या के हाथ से उसका दुपट्टा गिर गया। लेकिन… वह तो 2006 में…
बूढ़ी औरत अचानक मुस्कुरा दी। हाँ… उस रात के बाद कोई भी नई दुल्हन यहाँ चैन से नहीं सोई। ये सुनते ही काव्या का गला सूख गया।
क्यों…?
बूढ़ी औरत ने दीवार की तरफ इशारा किया। क्योंकि इस घर में पहली रात दुल्हन अपने पति के साथ नहीं… अपने डर के साथ बिताती है।
तभी अचानक कमरे के बाहर से भारी कदमों की आवाज़ आने लगी।
ठक… ठक… ठक…
काव्या की सांसें थम गईं। क्योंकि वह कदम धीरे-धीरे दरवाज़े के ठीक बाहर रुक गए उन भारी कदमों की आवाज़ ने काव्या की सांसें रोक दीं।
कमरे में अजीब सा सन्नाटा फैल गया। काव्या ने धीरे से उस बूढ़ी औरत की तरफ देखा जो अभी कुछ पल पहले उसके सामने खड़ी थी।
लेकिन अब…
वह वहाँ नहीं थी। कमरा फिर से पूरी तरह खाली हो गया था। काव्या का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। क्या वह सच में किसी से बात कर रही थी या यह सिर्फ उसका डर था?
तभी दरवाज़े के बाहर से धीरे-धीरे किसी के खुरचने की आवाज़ आने लगी। जैसे कोई नाखूनों से लकड़ी को रगड़ रहा हो।
काव्या ने डरते-डरते पूछा— क…कौन है?
कोई जवाब नहीं आया। लेकिन अगले ही पल दरवाज़े का हैंडल धीरे-धीरे हिलने लगा। काव्या घबराकर पीछे हट गई। हैंडल कुछ सेकंड हिला…
फिर अचानक सब शांत हो गया। काव्या ने राहत की सांस ली ही थी कि तभी कमरे के कोने में रखा पुराना आईना अपने आप हिलने लगा।
उसकी नजर आईने पर पड़ी…
और उसके हाथ कांपने लगे। क्योंकि आईने में उसे अपने पीछे एक दुल्हन खड़ी दिखाई दे रही थी।
लाल जोड़ा… झुका हुआ चेहरा… और बाल चेहरे पर बिखरे हुए।
लेकिन जैसे ही काव्या घबराकर पलटी… तो पीछे कोई नहीं था।
उसकी सांसें तेज़ हो गईं। वह फिर से आईने की तरफ देखने लगी। इस बार उस दुल्हन ने धीरे-धीरे अपना चेहरा ऊपर उठाया।
और जैसे ही चेहरा साफ दिखाई दिया… काव्या के मुंह से चीख निकल गई।
क्योंकि वह चेहरा बिल्कुल उस तस्वीर वाली दुल्हन का था। और वह दुल्हन आईने के अंदर से काव्या को घूरते हुए धीरे से बोली—
भाग जाओ… अभी भी वक्त है…
लेकिन तभी अचानक कमरे की लाइट पूरी तरह बुझ गई। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया। और उसी अंधेरे में किसी की धीमी आवाज़ गूंजी—
अब भागना मुमकिन नहीं है…
अंधेरे कमरे में काव्या का दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे अपनी ही सांसें सुनाई दे रही थीं। उसने कांपते हाथों से दीवार टटोलने की कोशिश की।
उसे किसी तरह लाइट का स्विच मिल गया। जैसे ही उसने स्विच दबाया…
कमरा फिर से रोशनी से भर गया। लेकिन सामने जो था, उसे देखकर काव्या का खून जम गया।
कमरे के बीचोंबीच जो लकड़ी की कुर्सी रखी थी…
उस पर अब कोई बैठा हुआ था।
लाल जोड़ा… झुका हुआ सिर… और लंबे काले बाल।
वही दुल्हन।
वही जो तस्वीर में थी। काव्या के पैरों में जैसे जान ही नहीं रही। तुम… कौन हो? उसकी आवाज़ कांप रही थी।
धीरे-धीरे उस दुल्हन ने सिर उठाया। उसकी आंखों के नीचे काले गहरे निशान थे। और होंठों पर एक अजीब सी मुस्कान।
मैं… इस घर की पहली बहू थी।
काव्या को अचानक याद आया— तस्वीर के नीचे लिखा था 2006।
दुल्हन ने धीरे से कहा— उस रात… मेरे साथ भी यही हुआ था जो आज तुम्हारे साथ होने वाला है।
काव्या का गला सूख गया। क…क्या?
दुल्हन की आवाज़ भारी हो गई।
इस घर में हर नई दुल्हन की पहली रात… एक सौदे की रात होती है।
काव्या समझ नहीं पाई।
किसका सौदा?
दुल्हन ने धीरे-धीरे कमरे की छत की तरफ इशारा किया।
इस हवेली को बचाने के लिए… किसी की इज़्ज़त कुर्बान करनी पड़ती है।
काव्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। तभी अचानक दरवाज़ा जोर से खुला। दरवाज़े पर तीन आदमी खड़े थे।
उनके पीछे काव्या की सास खड़ी थी। और उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था।
सास ने ठंडी आवाज़ में कहा— यही है… आज की दुल्हन।
और उसी पल काव्या को समझ आ गया…
कि सास ने दरवाज़े पर क्यों कहा था—
चुपचाप सह लेना… रोना मत।
दरवाज़े पर खड़े उन तीन आदमियों को देखकर काव्या के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसकी सांसें तेज़ हो गईं और दिल जैसे सीने को तोड़कर बाहर निकलना चाहता था।
सास ने ठंडी नजरों से उसे देखा और धीरे से कहा— डरने की जरूरत नहीं है… बस चुपचाप सह लेना।
काव्या की आंखों में आंसू भर आए।
उसे अब समझ आ रहा था कि इस घर में नई दुल्हनों के साथ क्या होता है।
तीनों आदमी धीरे-धीरे कमरे के अंदर आने लगे। लेकिन तभी अचानक कमरे के अंदर की हवा ठंडी हो गई। झूमर हल्के-हल्के हिलने लगा।
और अगले ही पल कमरे की लाइट तेजी से टिमटिमाने लगी।
सब लोग घबराकर चारों तरफ देखने लगे।
तभी अचानक कमरे के बीच रखी उस कुर्सी पर फिर से वही दुल्हन दिखाई देने लगी।
लाल जोड़ा… झुका हुआ चेहरा…
लेकिन इस बार उसका चेहरा गुस्से से भरा हुआ था।
एक आदमी घबराकर बोला— ये… ये क्या है?
सास चिल्लाई— कोई ड्रामा मत करो!
लेकिन तभी अचानक कमरे का दरवाज़ा अपने आप जोर से बंद हो गया।
एक तेज़ झोंका आया और दीवार पर लगी 2006 वाली तस्वीर जमीन पर गिरकर टूट गई। तभी कमरे में एक भारी आवाज़ गूंजी—
आज फिर वही गलती करोगे…?
सबके चेहरे डर से सफेद पड़ गए। क्योंकि उस आवाज़ में दर्द भी था और गुस्सा भी। और अगले ही पल…
कुर्सी पर बैठी दुल्हन धीरे-धीरे खड़ी हो गई। उसकी आंखें अब लाल चमक रही थीं। और उसने सीधे सास की तरफ देखकर कहा—
18 साल पहले तुमने मुझे नहीं बचाया था…
लेकिन आज मैं किसी और दुल्हन को बर्बाद नहीं होने दूंगी।
कमरे के अंदर अचानक ऐसा लगा जैसे तूफान आ गया हो। खिड़कियां जोर-जोर से हिलने लगीं। तीनों आदमी डरकर पीछे हट गए।
सास पहली बार घबराई हुई दिखाई दी।
वह चिल्लाई— ये सब बंद करो… ये सब झूठ है!
लेकिन उसी पल वह दुल्हन धीरे-धीरे हवा में उठने लगी। उसके लाल जोड़े की चुन्नी हवा में लहरा रही थी।
उसकी आंखों में 18 साल का दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उसने गहरी आवाज़ में कहा—
तुम लोगों ने मेरी इज़्ज़त लूटी…
मेरी जिंदगी खत्म कर दी…
और फिर मुझे इसी कमरे में मार दिया।
कमरे में खड़े सभी लोग कांपने लगे।
सास पीछे हटते हुए बोली—मुझे माफ कर दो…
लेकिन दुल्हन की आवाज़ और ठंडी हो गई— अब बहुत देर हो चुकी है।
अचानक झूमर जोर से टूटकर जमीन पर गिर पड़ा। तीनों आदमी डर के मारे दरवाज़े की तरफ भागे।
लेकिन दरवाज़ा खुल ही नहीं रहा था। कुछ ही सेकंड में कमरे के अंदर सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया।
और अचानक…
सब कुछ शांत हो गया। जब दरवाज़ा आखिरकार खुला और लोग अंदर पहुंचे…
तो कमरे में सिर्फ काव्या बेहोश पड़ी थी। तीनों आदमी गायब थे। और सास…
फर्श पर बैठी कांप रही थी। दीवार पर लगी टूटी तस्वीर के कांच में अब एक अजीब चीज़ दिखाई दे रही थी— तस्वीर में वह पुरानी दुल्हन मुस्कुरा रही थी। और उसके पीछे अब एक और लड़की खड़ी थी…
काव्या।
जैसे अब वह भी इस हवेली की कहानी का हिस्सा बन चुकी हो। उस रात के बाद…
उस कमरे का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन आज भी गांव के लोग कहते हैं—
कभी-कभी आधी रात को उस हवेली से दो दुल्हनों के रोने की आवाज़ सुनाई देती है।

