Chita se uthi dulhan
Chita se uthi dulhan

गांव के बाहर श्मशान घाट की तरफ जाने वाली कच्ची सड़क पर उस रात अजीब सन्नाटा था।

आसमान में बादल थे और हवा में धुएं की हल्की गंध फैली हुई थी।

गांव के लोग अभी-अभी एक अंतिम संस्कार से लौटे थे।

जिस लड़की की चिता जली थी उसका नाम था मीरा।

मीरा की शादी को अभी सिर्फ दो महीने हुए थे। लेकिन गांव में अचानक खबर फैल गई कि उसने अपने ससुराल में आत्महत्या कर ली।

लोगों ने तरह-तरह की बातें कीं।

कोई बोला—
दहेज का मामला रहा होगा।

कोई बोला—
नई बहू थी… घर में एडजस्ट नहीं कर पाई होगी।”

लेकिन उस रात जब मीरा की चिता जल रही थी, तभी श्मशान में मौजूद एक बूढ़े पंडित ने अचानक धीमी आवाज़ में कहा—

इस लड़की की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी…

पास खड़े लोगों ने पूछा,
ऐसा क्यों कह रहे हो पंडित जी?

पंडित ने चिता की आग को घूरते हुए कहा—

क्योंकि यह मौत सामान्य नहीं है…

उसके बाद अचानक हवा तेज हो गई।

चिता की लपटें अचानक बहुत ऊँची उठीं।

और उसी पल…

आग के बीच किसी को लगा जैसे मीरा की आंखें एक पल के लिए खुली हों।

लेकिन सबने इसे अपना भ्रम समझकर नजरअंदाज कर दिया।

अगले दिन से जिंदगी फिर सामान्य होने लगी।

समय बीतता गया।

धीरे-धीरे 18 साल गुजर गए।

अब वही घर, जहां कभी मीरा दुल्हन बनकर आई थी, वहां उसकी ननद राधिका की शादी की तैयारियां चल रही थीं।

घर में ढोलक बज रही थी।

लाइटें लग रही थीं।

लेकिन उसी रात…

जब सब लोग सो चुके थे…

मुख्य दरवाज़े पर अचानक धीरे-धीरे दस्तक हुई।

ठक… ठक… ठक…

राधिका के पिता ने दरवाज़ा खोला।

दरवाज़े के बाहर एक औरत खड़ी थी।

सफेद साड़ी… बिखरे बाल… और आंखों में अजीब ठंडक।

और जैसे ही उस औरत ने सिर उठाया…

राधिका के पिता के हाथ से दीया गिर गया।

क्योंकि वह चेहरा…

मीरा का था।

जिसे उन्होंने 18 साल पहले अपनी आंखों से जलते देखा था।

दरवाज़े पर खड़ी उस औरत को देखकर राधिका के पिता का चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ गया।

उनके हाथ कांपने लगे।

उन्होंने घबराकर पीछे कदम लिया।

लेकिन वह औरत वहीं खड़ी रही।

उसकी आंखें बिल्कुल स्थिर थीं… जैसे वह किसी को पहचानने की कोशिश कर रही हो।

घर के अंदर से राधिका की मां की आवाज़ आई—

कौन है दरवाज़े पर इतनी रात को?

जैसे ही वह बाहर आईं, उनकी नजर उस औरत पर पड़ी।

और अगले ही पल उनकी चीख पूरे आंगन में गूंज उठी।

मीरा…!!!

आवाज़ सुनकर घर के बाकी लोग भी बाहर आ गए।

सबके चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था।

क्योंकि सामने खड़ी औरत बिल्कुल वैसी ही दिख रही थी जैसी मीरा 18 साल पहले थी।

न उम्र बढ़ी थी…

न चेहरा बदला था।

जैसे समय ने उसे छुआ ही न हो।

कुछ पल तक वहां सन्नाटा छाया रहा।

फिर उस औरत ने धीरे-धीरे कहा—

मैं… वापस आ गई हूं…

उसकी आवाज़ बेहद धीमी और ठंडी थी।

राधिका की मां घबराकर बोलीं—

यह… यह कैसे हो सकता है?

तुम तो…

लेकिन वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाईं।

क्योंकि उसी समय गांव के दो-तीन पड़ोसी भी शोर सुनकर वहां आ गए।

सब उस औरत को घूर रहे थे।

तभी भीड़ में से एक बूढ़ा आदमी आगे बढ़ा।

वह वही पंडित था जिसने 18 साल पहले श्मशान में कहा था कि मीरा की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

उसने उस औरत को ध्यान से देखा…

और अचानक उसके चेहरे का रंग बदल गया।

उसने कांपती आवाज़ में कहा—

यह मीरा नहीं है…

भीड़ में खुसर-फुसर शुरू हो गई।

फिर कौन है यह?

पंडित ने धीमी आवाज़ में कहा—

यह वही है जो उस रात चिता के साथ खत्म नहीं हुआ था…

इतना कहकर उसने उस औरत की कलाई पकड़ ली।

और जैसे ही उसने कलाई को पलटा…

सबकी सांसें रुक गईं।

क्योंकि उसकी कलाई पर एक पुराना जला हुआ निशान था।

वही निशान…

जो मीरा के हाथ पर चिता जलने से पहले ही मौजूद था।

अब सवाल सिर्फ एक था—

अगर मीरा सच में मर चुकी थी…

तो 18 साल बाद वापस कौन आया था?

आंगन में खड़े लोगों के बीच अब डर साफ दिखाई दे रहा था।

सबकी निगाहें उस औरत पर टिकी थीं जो खुद को मीरा कह रही थी।

राधिका के पिता ने हिम्मत करके पूछा,
अगर तुम सच में मीरा हो… तो 18 साल तक कहाँ थी?

कुछ सेकंड तक वह औरत चुप रही।

फिर उसने घर के अंदर की तरफ देखा… जैसे वह इस जगह को बहुत अच्छे से पहचानती हो।

उसने धीरे से कहा—

“जहाँ से कोई वापस नहीं आता…”

यह सुनकर वहां खड़े लोगों के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

तभी अचानक घर के अंदर से ढोलक की आवाज़ बंद हो गई।

शादी की तैयारी कर रही औरतें डरकर बाहर झांकने लगीं।

राधिका, जिसकी शादी होने वाली थी, भी दरवाज़े पर आकर खड़ी हो गई।

जैसे ही उसकी नजर उस औरत पर पड़ी…

वह अचानक ठिठक गई।

क्योंकि उस औरत की आंखें सीधे उसी को घूर रही थीं।

मीरा धीरे-धीरे राधिका की तरफ बढ़ी।

उसके कदमों की आवाज़ पूरे आंगन में गूंज रही थी।

सब लोग रास्ते से हटते चले गए।

जब वह राधिका के सामने पहुंची तो कुछ सेकंड तक उसे ध्यान से देखती रही।

फिर उसके होंठों पर एक अजीब मुस्कान आई।

और उसने धीमी आवाज़ में कहा—

तो… आखिर तुम्हारी शादी होने वाली है…

राधिका घबराकर पीछे हट गई।

तुम… क्या चाहती हो? उसने डरते हुए पूछा।

मीरा ने बिना पलक झपकाए कहा—

मैं सिर्फ वही लेने आई हूँ… जो 18 साल पहले मुझसे छीन लिया गया था।

यह सुनते ही आंगन में खामोशी छा गई।

लेकिन उसी पल अचानक घर की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं।

पूरा घर अंधेरे में डूब गया।

और अंधेरे में किसी के धीरे-धीरे हंसने की आवाज़ गूंजने लगी।

जब दोबारा लाइट जली…

तो सबकी सांसें रुक गईं।

क्योंकि मीरा वहां से गायब थी।

मीरा के अचानक गायब हो जाने से पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।

सब लोग उसे ढूंढने लगे।

आंगन, कमरे, छत… हर जगह देखा गया।

लेकिन वह कहीं नहीं थी।

जैसे वह कभी वहां आई ही न हो।

राधिका की मां डर के मारे रोने लगीं।

यह अच्छा संकेत नहीं है… शादी रोक दो…

लेकिन राधिका के पिता ने गुस्से में कहा—

यह सब किसी का मजाक है। कोई हमें डराने की कोशिश कर रहा है।

तभी अचानक भीड़ में खड़े उस बूढ़े पंडित ने गहरी सांस ली।

उसने धीमी आवाज़ में कहा—

यह मजाक नहीं है…

सबकी नजरें उसकी तरफ मुड़ गईं।

पंडित ने आकाश की तरफ देखते हुए कहा—

18 साल पहले जो हुआ था… उसका सच आज सामने आने वाला है।

राधिका के पिता घबरा गए।

तुम क्या कहना चाहते हो?

पंडित कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

मीरा ने आत्महत्या नहीं की थी।

आंगन में खड़े लोगों के बीच फुसफुसाहट शुरू हो गई।

तो फिर क्या हुआ था?

पंडित ने सीधे राधिका के पिता की तरफ देखा।

उसकी आवाज़ भारी हो गई।

उसे जिंदा जलाया गया था…

यह सुनते ही राधिका की मां जमीन पर बैठ गईं।

राधिका के पिता के चेहरे से खून उतर गया।

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ पूछ पाता…

अचानक ऊपर की मंजिल से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।

सबने एक साथ सिर ऊपर उठाया।

सीढ़ियों के पास अंधेरे में कोई खड़ा था।

और अगले ही पल वहां से एक धीमी आवाज़ आई—

सच… अब छुप नहीं सकता…

जैसे ही टॉर्च की रोशनी उस तरफ पड़ी…

सबके हाथ कांपने लगे।

क्योंकि वहां खड़ी लड़की…

राधिका थी।

लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि…

उसकी आंखों में वही ठंडक थी…

जो अभी थोड़ी देर पहले मीरा की आंखों में थी।

सीढ़ियों पर खड़ी राधिका को देखकर पूरे घर में डर की लहर दौड़ गई।

कुछ देर पहले तक जो लड़की अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त थी, अब उसकी आंखों में अजीब सी ठंडक थी।

राधिका धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी।

उसके कदम बिल्कुल शांत थे… लेकिन हर कदम जैसे आंगन में खड़े लोगों के दिलों पर पड़ रहा था।

राधिका की मां रोते हुए बोलीं,
राधिका… बेटा क्या हुआ तुम्हें?

लेकिन राधिका ने कोई जवाब नहीं दिया।

वह सीधे अपने पिता के सामने आकर रुक गई।

कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर राधिका के होंठ धीरे-धीरे हिले।

लेकिन आवाज़ उसकी नहीं थी।

वह आवाज़ बिल्कुल मीरा जैसी थी।

पहचाना मुझे…?

यह सुनते ही राधिका के पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई।

पंडित ने तुरंत मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया।

लेकिन राधिका हंसने लगी।

उसकी हंसी पूरे घर में गूंजने लगी।

मंत्रों से मुझे नहीं रोका जा सकता…

फिर उसने धीरे से कहा—

18 साल पहले जब मुझे जिंदा जलाया जा रहा था… तब भी मैंने मदद के लिए पुकारा था।

सबकी नजरें राधिका के पिता की तरफ चली गईं।

उनका चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।

मीरा की आवाज़ फिर गूंजी—

लेकिन उस रात… सबसे पहले आग लगाने वाला कौन था… याद है?

आंगन में सन्नाटा छा गया।

राधिका के पिता की आंखों से आंसू निकल आए।

वह कांपती आवाज़ में बोले—

मैं… मजबूर था…

लेकिन इससे पहले कि वह कुछ और कह पाते…

अचानक तेज हवा चलने लगी।

घर की खिड़कियां जोर-जोर से हिलने लगीं।

और उसी पल राधिका जोर से चिल्लाई—

आज… वही आग फिर जलेगी…

और अचानक आंगन के बीच रखे हवन कुंड की आग भड़क उठी।

लपटें इतनी ऊंची उठीं कि सब पीछे हट गए।

और उसी आग की रोशनी में…

सबको ऐसा लगा जैसे मीरा की परछाईं राधिका के पीछे खड़ी मुस्कुरा रही हो।

आंगन में उठती आग की लपटों के बीच अब सच्चाई छिपी नहीं रह सकती थी।

राधिका के पिता जमीन पर गिर पड़े।

उनकी आवाज़ कांप रही थी।

हाँ… यह सच है…

सब लोग सन्न रह गए।

उन्होंने रोते हुए कहा—

मीरा ने आत्महत्या नहीं की थी…

उसे हमने… जिंदा जलाया था।

यह सुनते ही पूरे आंगन में सन्नाटा छा गया।

राधिका की मां रोते हुए बोलीं—

लेकिन ऐसा क्यों किया…?

राधिका के पिता ने सिर झुका लिया।

क्योंकि मीरा ने हमारे गैरकानूनी काम देख लिए थे…

अब सब कुछ साफ हो रहा था।

18 साल पहले यह परिवार अवैध कारोबार में शामिल था।

मीरा ने सच जान लिया था।

और उसी सच को छुपाने के लिए…

उसे चिता में जिंदा जला दिया गया।

पंडित ने गहरी आवाज़ में कहा—

अन्याय की आग कभी शांत नहीं होती…

उसी समय अचानक राधिका जोर से चीखी।

उसका शरीर कांपने लगा।

कुछ पल बाद वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई।

आंगन में सन्नाटा छा गया।

आग धीरे-धीरे शांत होने लगी।

पंडित ने राधिका की नाड़ी देखी और कहा—

अब डरने की बात नहीं… आत्मा चली गई है।

सब लोग धीरे-धीरे सामान्य होने लगे।

लेकिन उसी समय…

घर के बाहर खड़े एक आदमी ने अचानक चिल्लाकर कहा—

अरे… यह देखो!

सब लोग दौड़कर बाहर आए।

दरवाज़े के सामने मिट्टी में किसी के ताज़ा पैरों के निशान बने हुए थे।

नंगे पैरों के निशान…

जो घर से बाहर जंगल की तरफ जा रहे थे।

और उन निशानों के साथ…

एक लाल दुपट्टा हवा में उड़ रहा था।

बिल्कुल वैसा ही…

जैसा मीरा ने अपनी शादी की रात पहना था।

उस रात के बाद…

गांव में किसी ने फिर कभी उस घर में शादी की बात नहीं की।

लेकिन आज भी गांव के लोग कहते हैं—

कभी-कभी आधी रात को…

श्मशान की तरफ जाने वाली सड़क पर

एक लाल दुपट्टा पहनी दुल्हन दिखाई देती है…

जो धीरे-धीरे आग की लपटों में गायब हो जाती है।

और तब लोगों को याद आता है—

मीरा का बदला अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

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