शादी को अभी सिर्फ तीन दिन हुए थे। हल्दी और मेहंदी की खुशबू अभी भी घर की दीवारों से चिपकी हुई थी। सबको लगता था कि रिया की ज़िंदगी अब किसी सपने जैसी हो गई है। रोहन पढ़ा-लिखा, सुसंस्कृत और बेहद शांत स्वभाव का लड़का था। दोनों की शादी परिवार की मर्ज़ी से हुई थी, लेकिन रिया ने कभी विरोध नहीं किया। वह चुप थी… शायद बहुत ज़्यादा चुप।
तीसरी रात, जब घर के सभी लोग गहरी नींद में थे, अचानक रोहन के कमरे से एक हल्की-सी आवाज़ आई। सुबह सभी एक एक कर उठते रहे पर दुल्हे का दरवाज़ा नहीं खुला। पहले तो ये बात आम लगी पर जब ज्यादा देर हो गई, तो मेहमानो ने बहुत कोशिश की दरवाजा खोलने की लेकिन दुल्हे ने खोला ही नहीं, जब समय ज्यादा हो गया तो दरवाज़ा तोड़ा गया, और जो अंदर देखा, उसने सबके होश उड़ा दिए, अंदर रोहन बिस्तर पर निर्जीव पड़ा था। कमरे में कोई संघर्ष के निशान नहीं थे। बस एक खाली दवा की शीशी और रिया कुर्सी पर बैठी थी — बिल्कुल शांत, जैसे कुछ हुआ ही न हो। सभी मेहमान और घरवाले हैरान रह गए। एक शख्स ने कहा- पुलिस को बुलाना ही सही होगा।
पुलिस आई। सवाल हुए। लेकिन रिया ने एक ही बात दोहराई — मैंने उसे मारा… क्योंकि मैं उससे प्यार करती थी।
सब स्तब्ध थे- किसी को गुस्सा आया, तो किसी ने उसे पागल कह डाला।
प्यार? हत्या? ये कैसा तर्क था?
रिया की आँखों में डर नहीं था, पछतावा भी नहीं था। बस एक अजीब-सी राहत थी। उसने बताया कि रोहन को नींद की गोलियाँ दी थीं — इतनी कि वह कभी न जागे। पर क्यों?
जब पुलिस ने रोहन का फोन खंगाला, तो उसमें एक अनजान नंबर से आए मैसेज मिले — तीन दिन पूरे होने दो… फिर सब खत्म।
क्या रोहन किसी साजिश में शामिल था? या रिया किसी गहरे राज़ को छुपा रही थी?
कहानी यहीं से शुरू होती है… क्योंकि असली सवाल ये नहीं कि रिया ने रोहन को क्यों मारा। असली सवाल ये है — क्या सच में रोहन मरा था?
रोहन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। मौत की वजह ओवरडोज़ बताई गई, लेकिन एक बात अजीब थी — शरीर में उतनी दवा नहीं मिली, जितनी खाली शीशी से अंदाज़ा लगाया जा रहा था। यानी किसी ने सबूत जानबूझकर गढ़े थे।
रिया को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहाँ भी वह एक ही बात कहती रही — मैंने उसे बचाया है… इस दुनिया से।
इसी बीच, शादी के वीडियो की रिकॉर्डिंग देखी गई। तीसरे दिन की रात का एक छोटा-सा क्लिप मिला, जिसमें रोहन किसी से फोन पर फुसफुसा रहा था — वो कुछ नहीं जानती… तीन दिन बाद सब उसके नाम हो जाएगा।
सब उसके नाम? कौन-सी चीज़?
जाँच में पता चला कि रोहन ने शादी से ठीक पहले एक भारी-भरकम लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी — नॉमिनी रिया थी। लेकिन चौंकाने वाली बात ये थी कि पॉलिसी के असली कागज़ात घर में नहीं मिले।
उसी रात, पुलिस स्टेशन के बाहर लगे सीसीटीवी में एक परछाईं दिखी — बिल्कुल रोहन जैसी। वही कद, वही चाल।
रिया ने जब वो फुटेज देखा, तो उसके चेहरे पर पहली बार डर उभरा। उसने फुसफुसाकर कहा, मैंने तो उसे सुलाया था… हमेशा के लिए।
तो फिर ये कौन था?
क्या रोहन ने अपनी ही मौत का नाटक रचा? क्या रिया किसी खेल का मोहरा बनी? या सच में उसने प्यार के नाम पर कोई ऐसा कदम उठाया, जिसका सच अभी बाकी है?
तीन दिन की शादी… एक मौत… और एक ज़िंदा साया।
अगले एपिसोड में सच की परतें और गहरी होंगी।
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने केस को और उलझा दिया था। दवा की मात्रा कम थी… यानी मौत सिर्फ गोलियों से नहीं हुई। पुलिस ने रोहन की इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क किया। पता चला, पॉलिसी की रकम करोड़ों में थी — और नॉमिनी सिर्फ रिया।
लेकिन असली झटका तब लगा, जब कंपनी ने बताया कि पॉलिसी एक्टिवेट होने की शर्त थी — शादी के तीन दिन पूरे होना।
तीन दिन…
यानी अगर रोहन की मौत तीसरे दिन के बाद होती, तो पूरी रकम रिया को मिलती।
क्या ये सब पहले से प्लान था?
रिया से पूछताछ हुई। उसने पहली बार चुप्पी तोड़ी — वो मुझसे प्यार नहीं करता था… वो किसी और से प्यार करता था।
उसने बताया कि शादी की पहली रात उसने रोहन के फोन में एक लड़की की तस्वीर देखी थी। चैट में लिखा था — बस तीन दिन की बात है, फिर हम आज़ाद।
रिया ने सोचा था कि रोहन उसे धोखा दे रहा है, शादी सिर्फ पैसों के लिए थी। गुस्से और टूटे भरोसे में उसने वो कदम उठाया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
पुलिस को रोहन के लैपटॉप से एक वीडियो मिला — जिसमें वो किसी अनजान शख्स से मिल रहा था। वीडियो में साफ़ आवाज़ आई —
अगर प्लान फेल हुआ, तो लड़की को फँसा देना।
लड़की… यानी रिया?
अब सवाल बदल चुका था। क्या रोहन ने खुद अपनी मौत की स्क्रिप्ट लिखी थी? या कोई तीसरा खिलाड़ी था, जो दोनों को इस्तेमाल कर रहा था?
और सबसे बड़ा सवाल — अगर रोहन जिंदा है, तो वो छुपा कहाँ है?
सीसीटीवी फुटेज को बार-बार देखा गया। चेहरा साफ़ नहीं था, लेकिन चाल, कद, हाव-भाव… सब रोहन जैसे थे। पुलिस ने शहर के होटल्स और बस स्टैंड्स खंगाले।
तभी एक चौंकाने वाली खबर मिली — शहर के बाहरी इलाके में एक प्राइवेट अस्पताल में एक अज्ञात आदमी भर्ती हुआ था। उसकी हालत गंभीर थी, लेकिन चेहरा रोहन से मिलता-जुलता था।
रिया को पहचान के लिए ले जाया गया।
जैसे ही उसने उस आदमी को देखा, उसकी सांसें रुक गईं। वो फुसफुसाई — ये रोहन नहीं है…
लेकिन तभी उस आदमी की उंगलियाँ हल्की-सी हिलीं। मॉनिटर की बीप तेज़ हो गई।
उसकी आँखें आधी खुलीं… और उसने बमुश्किल कहा —
रिया… भाग जाओ…
कमरे में सन्नाटा छा गया।
अगर ये रोहन नहीं था, तो उसे रिया का नाम कैसे पता? और अगर रोहन था, तो घर में जो लाश मिली, वो किसकी थी?
पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड्स खंगाले। पता चला, रोहन का एक जुड़वां भाई था — करण — जो बचपन में लापता हो गया था।
क्या करण वापस आया था? क्या दोनों भाइयों ने मिलकर बीमा का खेल रचा? या रिया किसी ऐसे सच के करीब थी, जो उसकी जान ले सकता था?
तीन दिन का प्यार अब एक खतरनाक पहेली बन चुका था।
अस्पताल में भर्ती उस आदमी की हालत स्थिर हुई। पुलिस ने जब डीएनए टेस्ट करवाया, तो रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया — वह रोहन का ही खून था… लेकिन पूरी तरह नहीं। उसमें मिलान था, पर सौ प्रतिशत नहीं।
डॉक्टर ने धीरे से कहा — ये जुड़वां हो सकता है।
रोहन का बचपन खंगाला गया। सच सामने आया — उसका एक जुड़वां भाई था, करण। बचपन में मेले से लापता हो गया था। परिवार ने मान लिया था कि वह मर चुका है।
लेकिन क्या वो सच था?
इसी बीच, घर में मिली लाश की दोबारा जाँच हुई। चेहरा जलाया गया था, ताकि पहचान मुश्किल हो। दाँतों के रिकॉर्ड ने साफ किया — वो करण था।
यानी… अस्पताल में जो था, वह असली रोहन था।
तो फिर रोहन ने अपने ही भाई की लाश घर में क्यों रखी?
पुलिस को रोहन के पुराने ईमेल्स में एक और राज़ मिला — भारी कर्ज़। करोड़ों का। और उसे चुकाने का एक ही रास्ता — बीमा का पैसा।
प्लान साफ था।
रोहन और करण ने मिलकर नकली मौत की साजिश रची। शादी, तीन दिन की शर्त, बीमा… और फिर मौत। रिया को नॉमिनी बनाकर फँसा देना।
लेकिन प्लान में एक गलती हो गई — रिया ने सच में गोलियाँ दे दीं।
रिया ने रोहन को मारने की कोशिश की, क्योंकि उसने वो चैट पढ़ ली थी। उसे लगा वो धोखा खा रही है।
पर सच ये था — वो एक खेल का हिस्सा थी, जिसे उसने समझने में देर कर दी।
अब सवाल था — क्या रोहन बचेगा? और अगर बच गया… तो क्या रिया जेल जाएगी, या प्यार की वजह सच में उसे बचा लेगी?
रोहन ने होश में आते ही सच कबूल कर लिया।
हाँ, प्लान उसी का था।
करण ज़िंदा था। दोनों ने मिलकर बीमा कंपनी को धोखा देने की योजना बनाई। शादी सिर्फ एक मोहरा थी।
लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं था कि रिया उससे सच में प्यार करने लगेगी… और उसी प्यार में उसे मारने की कोशिश करेगी।
रिया ने पुलिस के सामने आख़िरी बार कहा —
मैंने उसे इसलिए मारा… क्योंकि मैं उसे खोना नहीं चाहती थी। वो मुझे छोड़ देता… या किसी और के लिए इस्तेमाल करता।
रोहन बच गया, लेकिन करण मर चुका था।
बीमा क्लेम रद्द हो गया। धोखाधड़ी का केस दोनों भाइयों पर चला — अब सिर्फ रोहन पर।
कोर्ट में फैसला आया —
रिया ने जानबूझकर हत्या नहीं की, बल्कि भावनात्मक उकसावे और धोखे में आकर कदम उठाया। उसे सज़ा कम मिली।
रोहन को साज़िश, धोखाधड़ी और अपने भाई की मौत के लिए कड़ी सज़ा हुई।
आख़िरी मुलाक़ात में रोहन ने रिया से कहा —
तुमने प्यार में मुझे मारा…
रिया की आँखों में आँसू थे।
नहीं… मैंने प्यार में खुद को मारा।
तीन दिन की शादी ने तीन ज़िंदगियाँ खत्म कर दीं।
एक मर गया।
एक जेल में सड़ गया।
और एक ज़िंदा रहकर भी हर रोज़ मरती रही।
कहानी खत्म नहीं होती… क्योंकि कभी-कभी प्यार ही सबसे खतरनाक साज़िश बन जाता है।

