रात के 10 बजे थे। बारिश की हल्की बूंदे शहर की सूनी गलियो पर टपक रही थी। आरव एक पुराने लाइब्रेरी में घुस रहा था, जहा वो अक्सर अपना स्ट्रैस दूर करने जाता था। लेकिन आज लाइब्रेरी कुछ ज्यादा ही सूनी और अजीब लग रही थी।
उसकी नज़र एक पुरानी वुड़न शैल्फ पर गई, जहा एक ड़स्ट कवर्ड डायरी रखी थी। कवर पर कोई नाम या कोई तारीख़ नहीं, बस एक सिंबल- जैसे किसी सीक्रेट सोसाइटी का लोगो. ये देखते ही उसे सब कुछ जानने की इच्छा हुई और उसने वो डायरी उठा ही ली। जैसे ही उसने खोला, एक थंड़ी हवा का झटका लगा और बारिश की बूंद खिड़कियो में जोर जोर से टपक्ने लगी।
डायरी की पहली लाईन ने ही उसका पूरा ध्यान खीच लिया, उसमे लिखा था जो इस डायरी को पड़ेगा, उसका कल कभी पुराना नहीं रहेगा।
और ये पड़ते ही उसकी हसी छूट गई और वो अगला पन्ना पलटकर आगे पड़ने लगा। पर जैसे ही वो आगे बड़ा, पर पेज़ में इवैन्टस का जिक्र था जो कुछ ही घंटो पहले उसके साथ हुए थे। ये सब पड़ते ही उसकी रीड़ की हड्डी क़ॉप उठी। और वो सोच में पड़ गया, क्या डायरी में लिखा ,सच में फ्यूचर प्रेडिक्ट कर रही थी?
और उस रात, आरव ने नोटिस किया- डायरी के लास्ट पेज़ में एक खाली स्पेस था। पर जैसे ही उसने उसमे पैन रखा, पन्ने का इंक खुद से लिखने लगा…
बताए, आरव के लिए क्या लिखा जा रहा है, और क्या ये सिर्फ शुरूआत है ?
आरव ने डायरी को गौर से देखा। इंक धीरे धीरे पेज़ पर वर्ड़स लिख रही थी:
“कल रात को तुम्हारे सामने जो होगा, वो पहले कभी नहीं हुआ “
उसका दिल तेज धडकने लगा। हर शब्द के साथ उसकी टैन्शन बड़ रही थी। आरव ने सोचा, ये सिर्फ इत्तेफाक हो सक्ता है। लेकिन फिर डायरी के एक और पन्ने ने लिखना शुरू किया और उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। हर शब्द के साथ टैन्शन बड़ रही थी। आरव ने सोचा, ये इत्तेफाक़ हो सक्ता है। लेकिन फिर डायरी के एक और पेज़ ने लिखा:
” तुम्हार फ़ोन बजेगा रात 11:15 पर,और जो फोन उठाएगा, उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी”
आरव ने अपने फोन को चैक किया — स्क्रीन पर 11:10 का टाइम दिख रहा था । उसके हाथ थोड़े ठंडे हो गए। क्या ये सच डायरी का असर है या सिर्फ उसके दिमाग का एक खेल?
11:15 का टाईम हुआ। फोन ने रिंग किया। आरव ने हाथ बड़ाए, और जैसे ही लाईन उठाई, एक अजीब सी आवाज सुनाई दी- जैसे कोई उसके अंदर के सब सीक्रेट अच्छे से जानता हो।
“कल सिर्फ शुरूआत है… सबसे बड़ा राज़ अब सामने आएगा”
अब आरव के साथ एक ही सवाल था ये डायरी की राज क्या है, और क्या अब उसके सारे फैसले उसके होंगे भी या अब वो डायरी के कंट्रोल में चलेगा?
आरव ने फोन रखते ही अपनी सांसे काबू करने की कोशिश की। लेकिन डायरी का एफैक्ट जैसे अब उसके आस-फास हर जगह फील हो रहा था। हर कार्नर में परछाई उसके पीछे पीछे थी और हर आवाज़, बारिश की टपकने वाली बूंदे, उसके लिए वार्निंग जैसे लग रही थी। उसने डायरी को दोबारा खोला और देखा की इंक के शब्द अपने आप चेंज़ हो रहे थे। अब पन्ने में लिखा था
“आज रात तुम्हे लाइब्रेरी के बेसमैंट में जाना होगा। वहॉ तुम्हारा सबसे बड़ा सच सामने आएगा। “
बेसमैन्ट के बारे में पहले कभी किसी ने कुछ नहीं बताया था, और आरव के लिए ये आइडिया बहुत ज्यादा अजीब और डरावना था। पर उसके अंदर मानो कोई कीड़ा काट रहा हो और उसे वहा जाने के लिए बोल रहा हो। आरव ने भी टॉर्च उठाई और धीरे-धीरे लाइब्रेरी की पुरानी सीडियों से नीचे उतरना शुरू कर दिया। हर कदम के साथ उसका दिल तेज़ धड़कने लगा, और बेसमैन्ट में ठंड़ी हवा का झौका उसकी रीड़ की हड्डी से नीचे उतर रहा था।
जब वो नीचे पहुंचा, तो देखा की एक छोटा सा टेबल और एक पुरानी लैंप रखी थी। और लैंप के नीचे एक लिफाफा था। लिफाफे पर एक और लाईन लिखी हुई थी:
“ये तुम्हारे लिए लेकिन ध्यान रहे, जो भी पड़ोगे वापिस नार्मल लाईफ वापिस नहीं मिलेगी। “
आरव ने लिफाफा खोला, और जैसे ही उसने देखा,उसके होश उड़ा गए , मूह खुला का खुला रह गया और एसा लगा जैसे उसके लिए उस चीज़ पर भरोसा करना नांमुम्किन हो जिसे वो पड़ रहा है। दरसल उस लिफाफे में एक तस्वीर और एक खत था, जिसमे उसकी अपनी पुरानी यादें लिखी थी- पर एसे तरीके से, जो सिर्फ डायरी जान सक्ती थी। आरव समझ गया की ये डायरी सिर्फ भविष्य नहीं, बल्कि उसके अतीत के राज़ भी खोल रही है।
आरव ने फोटो और खत को हाथ में कसकर पकड़ लिया। हर लाइन और हर तस्वीर उसके बचपन के hidden moments को एक्सपोज़ कर रही थी, उसने कभीकिसी के साथ नहीं बांटे थे और न कभी किसी को बताए थे। डायरी ने लिखा:
जिसे तुम्ने भूला दिया, वो अब तुम्हारा सामने करेगा। क्या तुम तैयार हो ?
उसके मन में ड़र और curiosity दोनों एक साथ धूम रहे थे। आरव ने सोचा, ये डायरी सिर्फ prediction या warning नहीं, ये किसी पॉवरफुल एनटिटी का टूल लग रही थी, जो उसकी लाईफ के हर एस्पैक्ट को कंट्रोल कर रही थी।
फिर एक और शब्द उभर आया:
“एक राज जो तुम्ने कभी किसी को नहीं बताया, अब तुम्हारे सामने खुद उस रूप में खड़ा होगा ।“
आरव ने समझा कि वो शायद अपनी यादो और अतीत के encounters से face-off करने वाला था। बेसमैंट में चॉदी का लाईट फलिक्कर हो रहा था और हर परछाई उसके सामने जिंदा लग रही थी। हर आवाज और हर मूवमैंट को वो बेकाबू होकर फॉलो कर रहा था।
तभी डायरी में इंक के शब्द खुद मूव हुए और एक एड्रैस और टाइम लिखा:
“मौका एक ही है- 12 बजे, पार्क के पुराने fountain के पास। “
आरव का दिमाग मानो जम गया हो उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है- क्या ये real encounter होगा या डायरी का illusion? पर एक चाज़ कंफर्म थी— उसकी लाइफ अब पहले जैसी नहीं रहने वाली है।
रात के ठीक 11:55 बजे थे। आरव पुराने पार्क के टूटे हुए फाउंटेन के पास खड़ा था। हवा में अजीब सी ठंडक थी, जैसे कोई अदृश्य चीज़ उसे देख रही हो। उसके हाथ में डायरी थी, और उसके पन्ने अपने-आप हल्के-हल्के कांप रहे थे। हर सेकंड उसकी बेचैनी बढ़ रही थी।
घड़ी ने जैसे ही 12 बजाए, फाउंटेन के पीछे एक परछाईं उभरी। आरव की सांसें थम गईं। वह शख्स धीरे-धीरे रोशनी में आया… और आरव की आंखें फैल गईं। सामने खड़ा इंसान बिल्कुल उसी जैसा था। वही चेहरा, वही कपड़े, यहां तक कि उसके हाथ में भी वैसी ही डायरी थी।
डर मत, उस दूसरे आरव ने शांत आवाज़ में कहा, मैं तुम्हारा भविष्य हूँ।
आरव का दिमाग सुन्न पड़ गया। “ये कैसे हो सकता है?
दूसरा आरव मुस्कुराया, यह डायरी समय को नहीं देखती… यह समय को बनाती है। तुम जो पढ़ते हो, वही सच बन जाता है। और मैं उस सच का नतीजा हूँ।
इतना कहकर उसने अपनी डायरी खोली। उसके पन्नों में लिखा था —
आज रात, एक आरव बचेगा।
अचानक दोनों डायरियों के पन्ने तेजी से पलटने लगे। हवा और तेज हो गई। आरव समझ गया — यह सिर्फ सामना नहीं, एक फैसला था।
फाउंटेन के पास अंधेरा और गहरा हो गया था। दोनों आरव आमने-सामने खड़े थे। असली कौन था? शायद अब ये सवाल मायने नहीं रखता था। दोनों की डायरियों में एक ही लाइन चमक रही थी —
सच वही होगा, जिसे तुम मानोगे।
दूसरे आरव ने कहा, “तुमने जब पहली बार डायरी खोली थी, उसी पल से तुमने अपनी आज़ादी खो दी। हर फैसला तुम्हारा नहीं था… डायरी का था।
आरव को एहसास हुआ कि हर घटना — फोन कॉल, बेसमेंट, फोटो — सब उसे यहां लाने के लिए था। यह डायरी भविष्य नहीं बता रही थी, यह उसके डर और फैसलों को दिशा दे रही थी।
अगर मैं इसे अभी जला दूं तो? आरव ने कांपती आवाज़ में पूछा।
दूसरा आरव हल्का सा हंसा, फिर शायद मैं कभी बनूंगा ही नहीं।
एक पल के लिए सब कुछ शांत हो गया। आरव ने हिम्मत जुटाई और अपनी डायरी को फाउंटेन के अंदर गिरा दिया। पानी में गिरते ही पन्नों की स्याही घुलने लगी। हवा थम गई।
जब उसने ऊपर देखा… सामने कोई नहीं था। और दूसरा आरव गायब हो चुका था।
घर लौटते समय उसके हाथ खाली थे। कोई डायरी नहीं। कोई भविष्य की भविष्यवाणी नहीं।
लेकिन अगली सुबह, उसके दरवाजे पर एक पैकेट रखा था। अंदर वही डायरी थी — बिल्कुल नई, और पहले पन्ने पर लिखा था:
कहानी अभी खत्म नहीं हुई…

