Blind Date
Blind Date

आर्यन ने कभी सोचा नहीं था कि एक साधारण-सी स्वाइप उसकी ज़िंदगी को उलट-पुलट कर देगी। रात के करीब नौ बजे थे जब वह “सोलमेट” नाम की डेटिंग ऐप पर स्क्रॉल कर रहा था। तभी उसकी नज़र एक प्रोफाइल पर रुकी—नाम था रिया मल्होत्रा। तस्वीर में उसकी मुस्कान रहस्यमयी थी, और बायो में सिर्फ एक लाइन लिखी थी— मुझे सच जानना पसंद है।

आर्यन ने हिचकिचाते हुए मैसेज किया। जवाब तुरंत आया। बातों का सिलसिला इतना सहज था कि मानो दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते हों। उसी रात रिया ने मिलने का प्रस्ताव रखा—एक पुराने, शांत रेस्टोरेंट में।

रेस्टोरेंट की हल्की पीली रोशनी और धीमा संगीत माहौल को रोमांटिक बना रहे थे, लेकिन आर्यन के दिल में अजीब-सी घबराहट थी। जैसे ही रिया अंदर आई, उसने सीधे उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
तुम हमेशा लेफ्ट पॉकेट में चाबी रखते हो… और अपने अतीत से भागते हो, है ना?

आर्यन चौंक गया। उसने कभी ये बात किसी को नहीं बताई थी। रिया मुस्कुराई, तुम्हारी माँ का एक्सीडेंट… वो तुम्हें अब भी परेशान करता है।

उसके हाथ कांप गए। ये सब उसे कैसे पता?

डिनर के दौरान रिया उसकी हर आदत, हर डर और हर राज का ज़िक्र करती रही। हर बार उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन शब्दों में अजीब गहराई।

अचानक रिया ने झुककर फुसफुसाया,
आर्यन, आज की रात तुम्हारी ज़िंदगी बदलने वाली है।

और उसी पल बाहर पुलिस की गाड़ियों की लाल-नीली लाइटें चमकने लगीं…

रेस्टोरेंट के बाहर चमकती लाल-नीली लाइटें कुछ ही सेकंड में गायब हो गईं, जैसे वे वहाँ कभी थीं ही नहीं। आर्यन ने घबराकर दरवाज़े की ओर देखा, फिर रिया की तरफ। वह बिल्कुल शांत बैठी थी, जैसे सब कुछ पहले से तय हो।

डरो मत, रिया ने पानी का गिलास उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा, अभी तुम्हें कोई पकड़ने नहीं आया।

तो फिर वो पुलिस? आर्यन की आवाज़ काँप रही थी।

रिया मुस्कुराई, कभी-कभी सायरन सिर्फ याद दिलाने के लिए बजते हैं… कि सच पास ही है।

आर्यन का दिमाग सुन्न हो रहा था। उसने खुद को संभालते हुए पूछा, तुम्हें मेरे बारे में इतना सब कैसे पता? मेरी माँ का एक्सीडेंट… मेरा पुराना घर… मेरी नौकरी बदलने की वजह… ये सब पब्लिक नहीं है।

रिया ने अपने पर्स से एक छोटा-सा टैबलेट निकाला और स्क्रीन उसकी ओर घुमा दी। उसमें आर्यन की तस्वीरें थीं—ऑफिस के बाहर, जिम में, यहाँ तक कि उसके अपार्टमेंट की बिल्डिंग के बाहर की भी।

तुम पिछले छह महीनों से निगरानी में हो, रिया ने धीमे स्वर में कहा।

क…क्यों? आर्यन की सांसें तेज़ हो गईं।

रिया ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, क्योंकि तुम तीन हत्याओं से जुड़े हो।

आर्यन की कुर्सी पीछे खिसक गई। क्या बकवास है! मैं किसी को जानता तक नहीं!

रिया ने शांत लहजे में कहा, रोहित मेहरा… समीर खन्ना… और नीलिमा वर्मा। तीनों की मौत से पहले आखिरी कॉल तुम्हारे नंबर से गया था।

आर्यन के माथे पर पसीना छलक आया। उसे याद आया—कुछ अजीब कॉल्स, जो उसने नहीं किए थे… कुछ ब्लैंक मैसेज, जो उसके फोन से भेजे गए थे।

मैंने कुछ नहीं किया… उसकी आवाज़ टूट गई।

रिया ने झुककर फुसफुसाया, मुझे पता है। और यही वजह है कि मैं यहाँ हूँ।

आर्यन ने हैरानी से उसकी ओर देखा।

क्योंकि, आर्यन, रिया की आँखों में अब सख्ती थी, तुम कातिल नहीं हो… लेकिन किसी बहुत बड़े खेल का हिस्सा जरूर हो।

बाहर फिर से दूर कहीं सायरन की आवाज़ गूँजी… इस बार पहले से ज्यादा करीब।

सायरन इस बार सच में रेस्टोरेंट के बाहर आकर रुका। कांच के दरवाज़ों पर लाल-नीली रोशनी तेजी से चमकने लगी। आर्यन की धड़कनें उसके कानों में गूंज रही थीं।

ये तुमने किया है? उसने रिया की ओर घूरते हुए पूछा।

रिया ने कोई जवाब नहीं दिया। बस सीधी बैठी रही।

अगले ही पल दरवाज़ा खुला और चार पुलिस अधिकारी अंदर घुस आए।
आर्यन मलिक? एक सख्त आवाज़ गूंजी।

आर्यन खड़ा भी नहीं हो पाया था कि दो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया।
आपको तीन हत्याओं की साजिश और डिजिटल सबूतों में छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है।

ये झूठ है! आर्यन चिल्लाया। मैंने कुछ नहीं किया!

उसने रिया की तरफ देखा—उम्मीद, गुस्सा और डर सब एक साथ उसकी आँखों में थे।
रिया, तुम कुछ बोलो! इन्हें बताओ!

रिया धीरे-धीरे खड़ी हुई। उसकी मुस्कान अब गायब थी। उसने अपने पर्स से एक कार्ड निकाला और पुलिस अधिकारी को दिखाया।

आर्यन की नजर उस कार्ड पर पड़ी—
क्राइम ब्रांच – स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट।
ऑफिसर रिया मल्होत्रा।

उसका गला सूख गया।

सॉरी, आर्यन, रिया ने ठंडे स्वर में कहा, ये सिर्फ डेट नहीं थी।

तो तुम शुरू से… उसकी आवाज़ टूट गई।

हाँ, रिया ने कहा, मैं तुम्हारी जांच कर रही थी।

हथकड़ी की ठंडी धातु उसकी कलाई पर जकड़ दी गई। रेस्टोरेंट में बैठे लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे। हर निगाह में शक था।

उसे बाहर ले जाया जा रहा था कि उसने आखिरी बार रिया से पूछा,
अगर मैं कातिल नहीं हूँ… तो ये सब क्यों?

रिया कुछ सेकंड चुप रही, फिर बोली,
क्योंकि किसी ने तुम्हें चुना है।

पुलिस वैन का दरवाज़ा बंद हुआ। अंदर अंधेरा था।

आर्यन के दिमाग में सिर्फ एक सवाल गूंज रहा था—
किसने? और क्यों?

क्राइम ब्रांच की इमारत के अंदर ठंडी सफ़ेद रोशनी थी। आर्यन को एक छोटे, बंद कमरे में बैठाया गया। सामने कैमरा, ऊपर टिमटिमाती लाइट… और टेबल के उस पार बैठी थी रिया।

अब वह डेट वाली रिया नहीं थी। उसकी आवाज़ सख्त, आँखें पेशेवर और चेहरा बिल्कुल भावहीन।

आर्यन मलिक, उसने फाइल खोलते हुए कहा, तीनों मृतकों के फोन में एक ही पैटर्न मिला है। मौत से पहले उन्हें एक एन्क्रिप्टेड मैसेज मिला… तुम्हारे IP एड्रेस से।

आर्यन ने सिर पकड़ लिया। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मेरा लैपटॉप तो महीनों से खराब है।

रिया ने तुरंत जवाब दिया, लेकिन लॉगिन तुम्हारे घर से हुआ है। और टाइम वही है जब तुम घर पर थे।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

मुझे याद है… आर्यन ने धीरे से कहा, कुछ रातें ऐसी थीं जब मुझे कुछ भी याद नहीं। जैसे नींद में था… लेकिन सुबह फोन में अजीब नोटिफिकेशन मिलते थे।

रिया ने उसकी ओर गौर से देखा। ब्लैकआउट?

आर्यन ने सिर हिलाया। मैं डॉक्टर के पास भी गया था… उन्होंने स्ट्रेस बताया।

रिया ने टेबल पर एक फोटो रखी। उसमें आर्यन किसी अंजान आदमी के साथ पार्किंग में खड़ा था।

ये कौन है? उसने पूछा।

आर्यन ने तस्वीर को ध्यान से देखा। चेहरा धुंधला था… लेकिन कपड़े वही थे जो वह अक्सर पहनता था।

ये मैं नहीं हूँ… उसने फुसफुसाया।

रिया आगे झुकी। चेहरा मैच करता है। ऊंचाई, चाल… सब।

अचानक दरवाज़ा खुला। एक सीनियर ऑफिसर अंदर आया और रिया के कान में कुछ फुसफुसाया।

रिया का चेहरा एक पल को बदल गया।

क्या हुआ? आर्यन ने घबराकर पूछा।

रिया ने उसकी ओर देखा—इस बार उसकी आँखों में पहली बार शक नहीं, बल्कि चिंता थी।

अभी-अभी एक और हत्या हुई है, उसने कहा।
और कातिल की शक्ल… तुम जैसी है।

कमरे की हवा भारी हो गई।

अगर आर्यन यहाँ है… तो बाहर कौन है?

क्राइम ब्रांच के कंट्रोल रूम में स्क्रीन पर लाइव फुटेज चल रही थी। एक सुनसान गली… जमीन पर पड़ी एक और लाश… और CCTV में कैद होता एक चेहरा।

वह चेहरा आर्यन का था।

रिया ने स्क्रीन को ज़ूम करवाया। चाल-ढाल, शरीर की बनावट, यहां तक कि जैकेट भी वही। लेकिन आर्यन तो पूछताछ कक्ष में बैठा था।

ये कैसे संभव है… सीनियर ऑफिसर बुदबुदाया।

रिया ने तुरंत आदेश दिया, लोकेशन ट्रैक करो। अभी!

उधर पूछताछ कक्ष में आर्यन बेचैन था। दरवाज़ा खुला और रिया अंदर आई। उसकी आंखों में अब सख्ती नहीं, बल्कि जल्दी थी।

तुम सच बोल रहे थे, उसने पहली बार स्वीकार किया।

मैंने कहा था… आर्यन की आवाज़ कांप गई। मैंने कुछ नहीं किया।

रिया ने उसकी हथकड़ी खुलवाई। लेकिन कोई है… जो तुम्हारी पहचान का इस्तेमाल कर रहा है।

कौन? क्यों?

रिया ने टेबल पर एक नई फाइल रखी। उसमें एक गुप्त प्रोजेक्ट का नाम था—प्रोजेक्ट मिरर।

तीनों मृतक एक ही साइबर-सिक्योरिटी कंपनी में काम करते थे, रिया ने समझाया। और तुम भी… छह महीने पहले उसी कंपनी में इंटर्न थे।

आर्यन के दिमाग में जैसे बिजली कौंधी। उसे याद आया—एक गुप्त सॉफ्टवेयर, चेहरे की पहचान बदलने वाला एल्गोरिथ्म… और अचानक उसका बिना कारण निकाल दिया जाना।

उन्होंने तुम्हारा डेटा इस्तेमाल किया, रिया बोली। चेहरा, वॉइस सैंपल, डिजिटल सिग्नेचर… सब।

मतलब…आर्यन की सांस अटक गई।

मतलब तुम सीरियल किलर नहीं हो, रिया ने गंभीर स्वर में कहा, तुम एक परफेक्ट फ्रेम हो।

तभी वायरलेस पर आवाज़ आई—
सस्पेक्ट स्पॉटेड! वो भाग रहा है!

रिया ने पिस्टल उठाई।

आज सच सामने आएगा, उसने कहा।

अब शिकार और शिकारी… आमने-सामने होने वाले थे।

बारिश तेज़ हो चुकी थी। सुनसान इंडस्ट्रियल एरिया में पुलिस की गाड़ियाँ चारों ओर से घेर चुकी थीं। सामने परछाइयों के बीच खड़ा था—आर्यन का हमशक्ल।

वह बिल्कुल उसी की तरह दिखता था। वही चेहरा। वही आँखें। वही ठंडी मुस्कान।

हथियार नीचे फेंको! रिया चिल्लाई।

हमशक्ल हंसा। आप लोग गलत इंसान को पकड़ने आए हैं।

रिया आगे बढ़ी। प्रोजेक्ट मिरर खत्म हो चुका है। तुम्हारे बॉस पकड़े जा चुके हैं।

हमशक्ल ने आर्यन की तरफ देखा, जो पुलिस की सुरक्षा में खड़ा था।
तुम्हें पता भी है, तुम कितने काम के थे? उसने ताना मारा। परफेक्ट डिजिटल प्रोफाइल। साफ रिकॉर्ड। कोई आपराधिक इतिहास नहीं। तुम्हें फंसाना सबसे आसान था।

सच खुल चुका था—साइबर-सिक्योरिटी कंपनी गुप्त रूप से हाई-प्रोफाइल हत्याएं करवा रही थी। चेहरे और डिजिटल पहचान बदलकर वे मासूम लोगों को फंसा देते थे। आर्यन उनका टेस्ट सब्जेक्ट था।

खेल खत्म, रिया ने ट्रिगर पर उंगली कसी।

अचानक हमशक्ल भागने लगा। गोलियों की आवाज़ गूंजी। कुछ सेकंड बाद वह ज़मीन पर गिर चुका था।

पुलिस ने उसे घेर लिया। उसके चेहरे पर लगा सिलिकॉन मास्क आधा उतर चुका था—अंदर कोई और चेहरा था। एक अनजान आदमी।

रिया ने गहरी सांस ली। तुम आजाद हो, आर्यन।

लेकिन आर्यन की आँखें खाली थीं।
आजाद? वह बुदबुदाया। मेरी पहचान, मेरी ज़िंदगी… सब इस्तेमाल हो चुका है।

रिया ने धीमे स्वर में कहा, सच देर से सही, सामने आ गया।

बारिश थमने लगी थी।

लेकिन आर्यन जानता था—आईने में खुद को देखने से पहले अब उसे हर बार ये सोचना पड़ेगा… कि जो चेहरा दिख रहा है, वो सच में उसी का है या नहीं।

 

 

By अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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