भागी हुई दुल्हन
भागी हुई दुल्हन

रात के सन्नाटे को चीरती हुई वह दुल्हन खाली सड़क पर भागी जा रही थी। लाल लहंगे का घेरा उसके पैरों में उलझ रहा था, फिर भी वह उसे दोनों हाथों से उठाए दौड़ती जा रही थी। माथे का टीका तिरछा हो चुका था, कंगन खनक रहे थे और पायल की आवाज़ उसके डर को और गहरा कर रही थी। हर कुछ कदम पर वह पीछे मुड़कर देखती—जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो।

आज ही उसकी शादी हुई थी। सुबह तक सब कुछ सामान्य था—हँसी, शगुन, आशीर्वाद। लेकिन रात होते-होते उसकी दुनिया बदल गई। सुहाग के कमरे में रखी पुरानी अलमारी से मिली एक डायरी ने उसके होश उड़ा दिए। डायरी में इस घर की पहली बहू का जिक्र था—जो अचानक लापता हो गई थी। आखिरी पन्ने पर लिखा था— अगर यह पढ़ रही हो, तो समझ लो तुम अगली हो…

उसका दिल जोर से धड़कने लगा। क्या यह मज़ाक था या चेतावनी? कमरे के बाहर किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला… और उसी पल उसने भागने का फैसला कर लिया।

लेकिन अब, सुनसान सड़क पर अचानक उसके सामने एक परछाईं आकर रुक गई।
वह जानी-पहचानी आवाज़ फुसफुसाई—
इतनी जल्दी हार मान ली… बहू?

उसके कदम वहीं थम गए। कहानी अब शुरू हुई थी।

सड़क के बीचों-बीच वह ठिठक गई। सामने खड़ी परछाईं धीरे-धीरे रोशनी में आई—वह उसका पति, आर्यन था। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं… बल्कि अजीब-सी बेचैनी थी।

भाग क्यों रही हो? उसने धीमे स्वर में पूछा।

उसके होंठ काँप रहे थे। उसने काँपते हाथों से डायरी आगे बढ़ा दी। आर्यन ने जैसे ही आखिरी पन्ना पढ़ा, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। कुछ पल के लिए दोनों के बीच सन्नाटा छा गया।

तुम्हें ये कहाँ मिली?

हमारे कमरे की अलमारी में… और इसमें जो लिखा है, वो क्या है? पहली बहू सच में गायब हुई थी या… उसकी आवाज़ भर्रा गई।

आर्यन ने गहरी साँस ली। हाँ, वो मेरी भाभी थी। पाँच साल पहले अचानक लापता हो गई। पुलिस आई, पूछताछ हुई… लेकिन कुछ नहीं मिला। तब से इस घर में उस नाम का जिक्र तक नहीं होता।

तो फिर ये चेतावनी?

आर्यन ने चारों तरफ नज़र दौड़ाई, जैसे कोई सुन रहा हो। इस घर में सब कुछ वैसा नहीं है जैसा दिखता है। लेकिन तुमसे वादा करता हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।

तभी दूर हवेली की बालकनी में सफेद साड़ी पहने एक आकृति दिखाई दी। दुल्हन का दिल जोर से धड़क उठा। उसने आर्यन का हाथ कसकर पकड़ लिया।

वो… कौन है?

आर्यन ने ऊपर देखा—पर वहाँ कोई नहीं था।

यहाँ डर को सच समझने की गलती मत करना, उसने कहा, लेकिन अब हमें सच जानना ही होगा।

हवेली की ओर लौटते उनके कदम भारी थे… क्योंकि आज पहली बार नई बहू ने महसूस किया—यह घर सिर्फ उसका ससुराल नहीं, एक अधूरा राज़ है।

हवेली के मुख्य दरवाज़े पर कदम रखते ही उसके भीतर फिर वही घुटन लौट आई। रात और गहरी हो चुकी थी। आर्यन ने उसका हाथ थाम रखा था, पर उसके मन का डर कम नहीं हो रहा था। जैसे ही वे अंदर पहुँचे, आँगन की घड़ी ने तीन बार घंटी बजाई। आवाज़ पूरे घर में गूँज गई।

अब क्या करेंगे? उसने धीमे से पूछा।

सच जानेंगे, आर्यन ने दृढ़ स्वर में कहा।

दोनों सीधे उस पुराने कमरे की ओर बढ़े जहाँ से डायरी मिली थी। दरवाज़ा बंद था। आर्यन ने धक्का दिया—दरवाज़ा अंदर से कुंडी लगा हुआ था। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। पर… हमने तो इसे खुला छोड़ा था, वह घबराकर बोली।

अचानक अंदर से हल्की-सी आहट आई… जैसे कोई फर्नीचर घसीट रहा हो। उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। आर्यन ने जोर से दरवाज़ा पीटना शुरू किया। तभी पीछे से सास की कड़क आवाज़ सुनाई दी—इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हो तुम दोनों?

वे पलटकर खड़े हो गए। सास की आँखों में अजीब-सी सख्ती थी। कुछ नहीं, माँ… बस यूँ ही, आर्यन ने बात टालने की कोशिश की।

सास ने दुल्हन को ऊपर से नीचे तक देखा, जैसे उसके मन को पढ़ लेना चाहती हों। इस घर में जितना कम जानो, उतना अच्छा है, उन्होंने ठंडे स्वर में कहा और चली गईं।

दरवाज़े के अंदर से फिर वही आहट आई… और इस बार साफ़ आवाज़—
मुझे बाहर निकालो…

दुल्हन का दिल थम गया।
क्या सचमुच उस कमरे में कोई है? या फिर यह किसी बड़े खेल की शुरुआत है?

मुझे बाहर निकालो… आवाज़ फिर गूँजी—इस बार और साफ़, और पास से। दुल्हन के हाथ बर्फ जैसे ठंडे हो गए। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर पास रखी लोहे की छड़ उठाई और पूरी ताकत से दरवाज़े पर वार किया। दूसरी चोट में कुंडी टूट गई। दरवाज़ा चरमराता हुआ खुला… लेकिन अंदर कोई नहीं था।

कमरा खाली था। बस पुरानी अलमारी खुली पड़ी थी और फर्श पर धूल में किसी के पैरों के ताज़ा निशान बने हुए थे—नंगे पाँव के निशान, जो सीधा पिछली दीवार तक जाते थे… और वहीं गायब हो जाते थे।

ये कैसे हो सकता है? वह फुसफुसाई।

आर्यन दीवार के पास गया। उसने हाथ फेरकर देखा—एक हिस्सा खोखला लगा। जोर लगाने पर दीवार का लकड़ी वाला पैनल हिल गया। पीछे एक संकरा रास्ता था, अंधेरे में उतरती सीढ़ियाँ।

दोनों ने मोबाइल की रोशनी जलाई और नीचे उतरने लगे। हर कदम के साथ हवा भारी होती जा रही थी। नीचे एक छोटा-सा तहखाना था। कोने में टूटी चारपाई… और दीवार पर खरोंचों से लिखा एक नाम—सिया।

दुल्हन का दिल जोर से धड़क उठा। यही नाम डायरी में था—पहली बहू का।

तभी पीछे से दरवाज़ा जोर से बंद होने की आवाज़ आई। ऊपर से किसी ने पैनल वापस खिसका दिया था।

वे अंधेरे में कैद थे।

और उसी अंधेरे में एक धीमी हँसी गूँजी—
अब सच जानकर भी कहाँ जाओगे…?

तहखाने के अंधेरे में उसकी साँसें तेज हो रही थीं। ऊपर से बंद हो चुके रास्ते को आर्यन ने कई बार धक्का दिया, पर पैनल हिला तक नहीं। तभी मोबाइल की हल्की रोशनी में दुल्हन की नज़र कोने में रखे एक लोहे के बक्से पर पड़ी। बक्सा आधा खुला था। काँपते हाथों से उसने उसे खोला—अंदर कुछ पुराने कपड़े, एक टूटी चूड़ी… और एक मोबाइल फोन।

यह… सिया का हो सकता है, उसने फुसफुसाया।

फोन बंद था, लेकिन जैसे ही आर्यन ने उसे चार्जिंग पावर बैंक से जोड़ा, स्क्रीन झिलमिला उठी। आखिरी रिकॉर्डिंग खुली—सिया की डरी हुई आवाज़ गूँज उठी, अगर कोई ये सुन रहा है, तो समझ लेना… मुझे इस घर ने नहीं, घर के किसी अपने ने कैद किया है… सच बाहर मत आने देना, यही उनका डर है…

दुल्हन की आँखों में आँसू आ गए। अपने… मतलब परिवार का कोई?

आर्यन के चेहरे पर गहरी सोच उतर आई। उसे याद आया—सिया के गायब होने के बाद सबसे ज्यादा चुप रहने वाली उसकी माँ ही थीं। और उसी दिन से तहखाने वाला हिस्सा बंद कर दिया गया था।

अचानक ऊपर से पैनल हटने की आवाज़ आई। रोशनी की एक पतली लकीर अंदर आई। सीढ़ियों पर किसी की परछाईं दिखी—सख्त, स्थिर।

बहुत खोज लिया तुमने, सास की आवाज़ गूँजी, हर सच जानना जरूरी नहीं होता… बहू।

दुल्हन ने पहली बार डर के बजाय साहस महसूस किया। उसने मोबाइल कसकर पकड़ लिया। अब सच उनके हाथ में था।

लेकिन क्या वे इस घर से जिंदा बाहर निकल पाएँगे… या इतिहास खुद को दोहराएगा?

सीढ़ियों पर खड़ी सास की परछाईं धीरे-धीरे नीचे उतरी। उनके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक अजीब-सी कठोर शांति थी। मोबाइल मुझे दे दो, उन्होंने ठंडे स्वर में कहा, वरना इस घर की इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी।

दुल्हन ने पहली बार उनकी आँखों में सीधा देखा। इज़्ज़त सच से बनती है, झूठ से नहीं, उसकी आवाज़ काँपी जरूर, पर टूटी नहीं।

आर्यन स्तब्ध था। माँ… क्या ये सब सच है? सिया भाभी के साथ क्या हुआ था?

कुछ पल के सन्नाटे के बाद सास की आँखों में दबा हुआ दर्द उभर आया। वो इस घर को छोड़कर जाना चाहती थी। हमारे खिलाफ पुलिस में जाने वाली थी। तुम्हारे पिता की गैरकानूनी जमीन के सौदों का राज़ उसे पता चल गया था। अगर वो बाहर जाती… तो सब खत्म हो जाता।

तो आपने उन्हें कैद कर दिया? आर्यन की आवाज़ भर्रा गई।

मैंने नहीं… तुम्हारे पिता ने। मैं बस… चुप रही, उनकी आवाज़ टूट गई। एक रात वो भागने की कोशिश में सीढ़ियों से गिर गईं। हादसा था… पर हम डर गए। हमने सच छुपा दिया।

दुल्हन के हाथ काँप उठे। और ये रिकॉर्डिंग?

उन्हें अंदाज़ा हो गया था कि कुछ गलत होने वाला है, सास ने धीमे से कहा।

अचानक ऊपर से दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। भारी कदमों की आहट गूँजी।
आर्यन के पिता नीचे उतर रहे थे।

उनकी आँखों में सख्ती थी।
बहुत सुन लिया तुम लोगों ने, उन्होंने कहा, अब ये मोबाइल यहाँ से बाहर नहीं जाएगा।

तहखाने में तनाव जम चुका था।
अब फैसला होना था—डर जीतेगा या सच?

तहखाने की हवा जैसे थम गई थी। आर्यन के पिता की आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। ये मोबाइल मुझे दो, उन्होंने कड़क आवाज़ में कहा।

लेकिन इस बार दुल्हन पीछे नहीं हटी। उसने मोबाइल का रिकॉर्डिंग बटन ऑन कर दिया। अब हर शब्द रिकॉर्ड होगा, उसने दृढ़ स्वर में कहा, सच आज यहीं दबेगा नहीं।

आर्यन पहली बार अपनी पत्नी के साथ खड़ा हो गया। पापा, अगर सिया भाभी के साथ अन्याय हुआ है, तो हम उसे छुपाएँगे नहीं। चाहे जो हो।

कुछ पल के लिए सब शांत हो गया। फिर पिता की आवाज़ धीमी पड़ गई। सालों से दबा डर और अपराधबोध उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। मैंने परिवार बचाने के लिए किया… लेकिन शायद उसी दिन सब खो दिया, वे बैठ गए।

ऊपर से पुलिस सायरन की हल्की आवाज़ सुनाई दी। दुल्हन ने पहले ही रिकॉर्डिंग ऑनलाइन भेज दी थी। अब सच बाहर आने वाला था।

सास रो पड़ीं। काश मैंने तब आवाज़ उठाई होती…

दुल्हन ने शांत स्वर में कहा, घर दीवारों से नहीं, सच्चाई से बनता है। अगर प्यार है… तो वो डर पर नहीं टिक सकता।

कुछ महीनों बाद—हवेली की वही बालकनी।
आर्यन और उसकी पत्नी साथ खड़े थे। केस चल रहा था, लेकिन घर में अब खामोशी नहीं, पारदर्शिता थी।

उसने आसमान की ओर देखा और मन ही मन कहा—
सिया, अब तुम्हें न्याय मिलेगा।

क्योंकि प्यार ऐसा भी होता है…
जो बहू को सिर्फ घर की इज़्ज़त नहीं, सच की आवाज़ बना देता है।

 

By अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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