बारिश की हल्की फुहारों से भीगा हुआ शहर उस शाम कुछ ज़्यादा ही उदास लग रहा था। अवनि अपनी बालकनी में खड़ी थी, हाथ में अधूरी कॉफी और आँखों में अधूरी ज़िंदगी। तीन साल पहले हुए ब्रेकअप के बाद उसने खुद से वादा कर लिया था—अब प्यार उसके लिए नहीं बना।
उसी रात उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया— तुम्हें बारिश पसंद है… लेकिन भीगना नहीं।
अवनि का दिल एक पल को थम गया। ये बात उसने कभी किसी को नहीं बताई थी। उसने जवाब नहीं दिया, पर अगला मैसेज तुरंत आया— डर मत… मैं तुम्हें दुख देने नहीं आया। बस सात दिन… सिर्फ सात दिन।
अवनि को लगा कोई मज़ाक है। उसने नंबर ब्लॉक करने की कोशिश की, लेकिन नंबर बार-बार बदलकर सामने आ जाता।
अगले दिन ऑफिस जाते वक्त, एक लड़का उसके सामने खड़ा था। सफेद शर्ट, भीगी पलकें, और मुस्कान में अजीब सी शांति।
मैं आर्यन हूँ, उसने धीमे से कहा, और मैं सिर्फ सात दिन तुम्हारी ज़िंदगी में रहूँगा।
अवनि हँस पड़ी—क्या मतलब? कोई चैलेंज चल रहा है?
आर्यन की आँखों में हल्की उदासी उतर आई।
नहीं… वादा है।
उसकी आवाज़ में कुछ ऐसा था जो झूठ नहीं लग रहा था। उस दिन उन्होंने साथ कॉफी पी। बातें कीं। और अजीब बात ये थी कि आर्यन को अवनि के बारे में सब पता था—उसकी पसंद, उसकी नफरत, उसका बचपन का सपना, यहाँ तक कि वो डर जो उसने कभी किसी से नहीं कहा।
रात को अवनि ने खुद से पूछा—ये कौन है? और मुझे इतना क्यों जानता है?
पर उसके दिल ने फुसफुसाया—
शायद ये वही है… जिसका इंतज़ार था।
उसे नहीं पता था— ये सात दिन उसकी ज़िंदगी बदल देंगे। और आठवां दिन… उसकी रूह हिला देगा।
तीसरे दिन तक अवनि खुद को समझा चुकी थी कि ये बस एक अजीब इत्तेफाक है… लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं था। उस शाम आर्यन उसे शहर के पुराने पुल पर ले गया—वही पुल जहाँ अवनि बचपन में जाया करती थी। हवा तेज़ थी, आसमान धुंधला, और नीचे बहती नदी जैसे किसी राज़ को छुपाए बैठी हो।
तुम यहाँ पहले भी आई हो, आर्यन ने धीमे से कहा।
अवनि ने चौंककर उसकी ओर देखा। हाँ… लेकिन ये जगह तो अब बंद रहती है। तुम्हें कैसे पता?
आर्यन ने जवाब नहीं दिया। बस रेलिंग पर उँगलियाँ फेरते हुए बोला, कुछ जगहें वक्त से नहीं… यादों से बंद होती हैं।
उसी पल अवनि की नज़र पुल के किनारे लगे पुराने, जंग लगे बोर्ड पर पड़ी। उस पर सात साल पहले हुए एक भयानक एक्सीडेंट की धुंधली खबर चिपकी थी—युवा व्यवसायी आर्यन मेहरा की मौके पर मौत। अवनि की साँस अटक गई। नाम पढ़ते ही उसके कानों में शोर गूँजने लगा। उसने काँपते हाथों से खबर को छुआ… और फिर धीरे-धीरे नज़र उठाकर सामने खड़े लड़के को देखा।
आर्यन वही खड़ा था। शांत। मुस्कुराता हुआ।
डर मत, उसने फुसफुसाया, मैं तुम्हें नुकसान पहुँचाने नहीं आया…
अवनि की रूह काँप उठी।अगर ये सच है… तो उसके साथ खड़ा कौन है? और अगर झूठ है… तो ये खेल कौन खेल रहा है?
तीन दिन बीत चुके थे। अब सवाल सिर्फ प्यार का नहीं था… सच का था।
पुल वाली खबर देखने के बाद अवनि सारी रात सो नहीं पाई। उसने इंटरनेट खंगाला, पुराने न्यूज़ आर्काइव्स देखे—नाम वही था, चेहरा वही था, तारीख़ सात साल पुरानी। एक्सीडेंट… कार नदी में गिरी… लाश मौके पर मिली। उसकी उंगलियाँ ठंडी पड़ गईं। अगर आर्यन सच में मर चुका था, तो पिछले तीन दिनों से उसके साथ कौन चल रहा था?
अगली शाम आर्यन खुद उसके दरवाज़े पर खड़ा था। आँखों में पहले से ज़्यादा गहराई थी। तुमने देख लिया, है ना? उसने धीमे से पूछा।
अवनि की आवाज़ काँप गई—तुम… तुम कौन हो?
आर्यन कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, मैं वही हूँ जिसे दुनिया ने मर चुका मान लिया। पर मेरी मौत अधूरी थी… जैसे मेरा प्यार।
उसने बताया—उस रात एक्सीडेंट हादसा नहीं था। किसी ने ब्रेक से छेड़छाड़ की थी। वह मर गया… लेकिन सच दबा दिया गया। मेरी रूह अटकी रही, उसने कहा, जब तक तुम्हें नहीं देखा।
अवनि की आँखों से आँसू बह निकले। मुझे क्यों?
आर्यन ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया—क्योंकि उस रात… तुम भी उसी पुल पर थीं। और तुम्हें पता भी नहीं… तुमने मुझे आख़िरी बार ज़िंदा देखा था। अवनि का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। क्या वह उस हादसे से जुड़ी थी? या कोई उसे इस कहानी में घसीट रहा था?
चार दिन बीत चुके थे। अब प्यार और डर… दोनों साथ चल रहे थे। और-
पाँचवें दिन अवनि का दिल डर और मोहब्बत के बीच फँस चुका था। वह बार-बार उस रात को याद करने लगी—सात साल पहले की वही बरसाती शाम, वही पुल, वही चीखती हुई ब्रेक की आवाज़। धुंधले ख्यालों में उसे याद आया… उसने सच में एक कार को तेज़ी से फिसलते देखा था। वह मदद के लिए दौड़ी भी थी, लेकिन किसी ने उसका हाथ पकड़कर रोक लिया था। एक अनजान आदमी… जिसने कहा था, यह मामला तुम्हारा नहीं है।
अब सब कुछ जुड़ने लगा था। आर्यन उसे उसी जगह फिर ले गया। हवा पहले से ठंडी थी। तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, उसने धीमे से कहा, लेकिन तुम गवाह थीं।
गवाह? अवनि की साँसें तेज़ हो गईं।
आर्यन की आँखों में दर्द चमका। जिसने मेरी कार के ब्रेक से छेड़छाड़ की… वही आदमी उस रात तुम्हें वहाँ से ले गया। उसने तुम्हें डराया… ताकि तुम कभी सच न बोलो।
अवनि का दिल जैसे टूट गया। इतने सालों तक वह अनजाने डर में जीती रही, और असली गुनहगार खुला घूमता रहा।
बस दो दिन और, आर्यन ने फुसफुसाया, फिर या तो मुझे इंसाफ़ मिलेगा… या मैं हमेशा के लिए खो जाऊँगा।
अवनि ने पहली बार उसका हाथ कसकर थामा। अब ये सात दिन का प्यार नहीं रहा—
ये सच, इंसाफ़ और अधूरी मोहब्बत की जंग बन चुका था।
सातवें दिन की सुबह अजीब सी खामोशी लेकर आई। आसमान बिल्कुल साफ़ था, जैसे तूफ़ान से पहले की शांति हो। अवनि ने रातभर सबूत जुटाए, पुराने रिकॉर्ड्स निकाले और आखिरकार उस आदमी तक पहुँच ही गई जिसने सात साल पहले आर्यन की कार के ब्रेक से छेड़छाड़ की थी—वही आदमी, जो उस रात उसे पुल से दूर ले गया था। सच सामने आया, तो अवनी ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया.., पुलिस ने केस फिर खोला, और अवनि का साथ दिया… सबूतों के तहत गुनहगार गिरफ्तार हो गया और उसे सजा भी सुनाई गई, अवनि के दिल में ठंड़क पड़ी कि उसने गुनहेगार को सजा दिलवा ही दी।
शाम को अवनि भारी दिल और आखों में खुशी लेकर उसी पुल पर पहुँची। हवा में अब डर नहीं था… बस विदाई की आहट थी। आर्यन उसके सामने खड़ा था, पहले से हल्का, जैसे किसी बोझ से मुक्त हो गया।
तुमने मुझे आज़ाद कर दिया, उसने मुस्कुराकर कहा।
अवनि की आँखों से आँसू बह निकले। और बोली तुम्ने मुझे फिर से जीना सिखा दिया आर्यन।
धीरे-धीरे आर्यन की परछाई हवा में धुंधली होने लगी। उसने आख़िरी बार उसका चेहरा छुआ—इस बार उसकी उंगलियाँ ठंडी नहीं थीं, उनमें अजीब सी एक गर्माहट थी।
प्यार कभी सात दिन का नहीं होता, अवनि,  ये कहते कहते उसकी आवाज़ हवा में घुल गई, सच्चा प्यार वक्त से भी परे होता है।
अवनि अकेली रह गई… लेकिन खाली नहीं। क्योंकि कुछ लोग ज़िंदगी में रहने नहीं आते— वे हमें बदलने आते हैं। जैसे अवनी कि में आकर आरव ने उसे उसके अतीत के दर्द से निकाला.,
और कभी-कभी,
सबसे गहरा प्यार… विदाई के बाद शुरू होता है।
जैसे अवनी को आर्यन के जाने के बाद महसूस हुआ कि वो उसे पसंद करने लगी थी लेकिन उसे ये धैर्य भी था कि अब आर्यन आज़ाद है।

अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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