यह कहानी है प्यार, भरोसे और धोखे की। कहते हैं भरोसा एक ताले की तरह होता है — जब तक सही चाबी हो, सब सुरक्षित रहता है। लेकिन अगर वही चाबी किसी और के पास चली जाए, तो सिर्फ ताला ही नहीं, दिल भी टूट जाता है।

यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं…
यह उस रात की कहानी है जब एक कमरे का दरवाज़ा बंद हुआ, और कई राज खुल गए।

रात के 11 बजकर 47 मिनट हो रहे थे। होटल रॉयल ऑर्किड का कमरा नंबर 309 अंदर से बंद था। बाहर कॉरिडोर में सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन उस कमरे के भीतर बेचैनी का माहौल था। आरव बार-बार अपना फोन देख रहा था। स्क्रीन पर 17 मिस्ड कॉल्स चमक रही थीं — सब सिया की। सिया, उसकी तीन साल पुरानी गर्लफ्रेंड। वह लड़की जिसने उस पर आँख बंद करके भरोसा किया था।

लेकिन आज रात आरव होटल के कमरे में सिया के साथ नहीं था। कमरे में हल्की पीली रोशनी थी। और बिस्तर के किनारे बैठी थी मेहर — आरव की ऑफिस कलीग। लाल ड्रेस में, चेहरे पर आत्मविश्वास भरी मुस्कान। पिछले छह महीनों से दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ रही थीं। आरव ने उसे यही बताया था कि उसका और सिया का ब्रेकअप हो चुका है।

इतने परेशान क्यों हो? मेहर ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आरव ने जल्दी से फोन साइलेंट पर डाला। कुछ नहीं… बस अजीब सा लग रहा है। इसके बाद मेहर कुछ कहती कि तभी…

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।और दोनों चौंक गए। रूम सर्विस, बाहर से आवाज़ आई।

आरव ने एक गहरी सांस ली और दरवाज़ा खोला। सामने एक वेटर ट्रे लेकर खड़ा था। लेकिन उसकी नज़रें कुछ अलग थीं — जैसे वह आरव को पहचानता हो।

सर, आपका सरप्राइज़, उसने धीमी आवाज़ में कहा।

कौन सा सरप्राइज़? आरव ने चौंकते हुए पूछा।

वेटर ने ट्रे पर रखा एक लिफाफा उसकी ओर बढ़ा दिया और बिना कुछ कहे चला गया। लिफाफे पर बड़े अक्षरों में लिखा था —
धोखा देने वालों के लिए। आरव के हाथ काँपने लगे। उसने लिफाफा खोला। अंदर एक तस्वीर थी — होटल की लॉबी की। तस्वीर में वह और मेहर साफ दिखाई दे रहे थे, कुछ ही मिनट पहले अंदर आते हुए।

तस्वीर के नीचे लिखा था — सिया सब देख रही है।

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया। ये मज़ाक है क्या? उसने बुदबुदाया।

तभी मेहर का फोन बजा। अनजान नंबर से मैसेज आया — भरोसा एक ताले की तरह होता है। एक बार टूट जाए, तो असली चाबी भी काम नहीं आती। इतना ही नहीं इस एक ही पल में न जाने क्या कुछ उन दोनों के साथ हो गाया.,और अचानक कमरे की टीवी अपने आप चालू हो गई। स्क्रीन पर वीडियो चलने लगा — गोवा ट्रिप का पुराना वीडियो। आरव और सिया हँसते हुए, समुद्र किनारे एक-दूसरे से हमेशा साथ रहने का वादा करते हुए। और फिर स्क्रीन काली हो गई।

कुछ सेकंड बाद सफेद अक्षरों में लिखा उभरा — हमेशा आज खत्म होता है।

आरव ने घबराकर सिया को कॉल लगाया। उसका फोन स्विच ऑफ था। तभी कमरे का दरवाज़ा अपने आप लॉक हो गया। आरव ने हैंडल घुमाया, लेकिन वह नहीं खुला। मेहर घबरा गई। और वह लगभग रोते हुए बोली, ये सब क्या हो रहा है?

अचानक कमरे के स्पीकर से एक आवाज़ गूंजी।  एक लड़की की आवाज़। शांत… ठंडी… लेकिन चुभने वाली। हाय, आरव।

आरव का दिल जैसे रुक गया। सिया…?

हाँ, आवाज़ आई, तुम्हारी सिया। या शायद… अब एक्स।

मेहर स्तब्ध रह गई। तुमने कहा था तुम सिंगल हो…

स्पीकर से सिया की हँसी गूंजी — धीमी और कड़वी।
मेहर, सच में स्वागत है। आरव ने तुम्हें भी झूठ बोला है।

कमरे की लाइट्स टिमटिमाने लगीं। टीवी पर अब ऑफिस का फुटेज चल रहा था — आरव और मेहर का एक बेहद निजी पल।

मेहर की आँखों से आँसू बहने लगे। तुमने कहा था सब खत्म हो चुका है…

सिया की आवाज़ और ठंडी हो गई और बोली— भरोसा एक ताला है, आरव। और तुमने उसे तोड़ दिया।

कुछ सेकंड बाद दरवाज़ा अचानक क्लिक की आवाज़ के साथ खुल गया।

सन्नाटा।

आरव और मेहर तेजी से बाहर भागे। कॉरिडोर खाली था। लिफ्ट के पास ज़मीन पर एक और लिफाफा पड़ा था। आरव ने उसे खोला।

उसमें सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी — अलीगढ़ के ताले टूट सकते हैं… पर जो दिल बंद हो जाए, उसकी चाबी कभी नहीं मिलती।

नीचे सिर्फ एक अक्षर लिखा था —स, और यहीं से शुरू होता है असली खेल…

लिफ्ट के पास खड़े आरव के हाथ अब भी काँप रहे थे। लिफाफे में लिखी लाइन उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बज रही थी —
जो दिल बंद हो जाए, उसकी चाबी कभी नहीं मिलती। मेहर की आँखों से आँसू रुक ही नहीं रहे थे। आरव… ये सब क्या था? सिया यहाँ कैसे हो सकती है?

आरव खुद समझ नहीं पा रहा था। उसने तुरंत होटल मैनेजर को बुलाया। कुछ ही मिनटों में स्टाफ वहाँ जमा हो गया। मैनेजर बार-बार यही कह रहा था कि होटल की तरफ से ऐसा कोई सरप्राइज़ या वीडियो नहीं चलाया गया। सर, CCTV सिस्टम में कुछ मिनटों के लिए ग्लिच आया था, मैनेजर ने घबराते हुए कहा, लगता है किसी ने सिस्टम हैक किया है।

आरव के दिमाग में सिर्फ एक नाम घूम रहा था — सिया।

उसने तुरंत सिया के घर जाने का फैसला किया। रात के करीब 1 बज चुके थे, लेकिन उसे जवाब चाहिए था।  सिया के अपार्टमेंट के बाहर सन्नाटा था। लाइट्स बंद थीं। उसने दरवाज़ा खटखटाया — कोई जवाब नहीं। पड़ोसी ने दरवाज़ा खोलकर बताया,
सिया तो दो दिन पहले ही अपनी मम्मी के पास कानपुर गई है।

आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।क्या…? लेकिन…

उसने तुरंत सिया की इंस्टाग्राम स्टोरी चेक की। आख़िरी स्टोरी 8 घंटे पहले की थी — कानपुर के एक कैफे की फोटो। तो फिर होटल में जो आवाज़ थी… वो किसकी थी?

अगली सुबह खबर आई — होटल रॉयल ऑर्किड के CCTV सर्वर को किसी ने रिमोटली एक्सेस किया था। पुलिस जांच में जुट गई।आरव को थाने बुलाया गया। मेहर भी वहाँ मौजूद थी। दोनों एक-दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे। तभी पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा,
जिस IP एड्रेस से सिस्टम हैक हुआ… वो आपके ऑफिस के नेटवर्क से जुड़ा है। आरव चौंक गया। और बोला क्या?

इंस्पेक्टर ने आगे कहा, और उस समय ऑफिस में सिर्फ एक ही सिस्टम लॉग-इन था। कमरे में खामोशी छा गई। किसका? आरव ने घबराकर पूछा।इंस्पेक्टर ने फाइल बंद की और सीधे मेहर की ओर देखा। मेहर खन्ना। मेहर का चेहरा सफेद पड़ गया। न-नहीं… ये झूठ है! आरव हैरान था। मेहर? तुमने…?

मेहर की आँखों में अब आँसू नहीं थे… सिर्फ एक अजीब सी शांति थी। कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद उसने धीमी आवाज़ में कहा —
हाँ। मैंने किया।

आरव को जैसे करंट लगा। लेकिन क्यों??

मेहर ने गहरी सांस ली। क्योंकि मैं सिंगल नहीं थी, आरव।

यह सुनकर सब स्तब्ध रह गए। मेरा भी कोई था… जो मुझे ऐसे ही धोखा दे रहा था। और जब मुझे पता चला कि तुम भी सिया के साथ यही कर रहे हो… तो मुझे लगा तुम्हें भी वही दर्द महसूस होना चाहिए।

आरव का दिमाग सुन्न हो चुका था। लेकिन… सिया की आवाज़? उसने टूटती आवाज़ में पूछा। मेहर हल्का सा मुस्कुराई। और बोली AI वॉइस क्लोनिंग। आजकल सब मुमकिन है आरव। ये बाते सुनकर कमरे में सन्नाटा फैल गया।

मैं तुम्हें बर्बाद नहीं करना चाहती थी, मेहर बोली, बस तुम्हें एहसास दिलाना चाहती थी कि भरोसा टूटता कैसा है। आरव कुर्सी पर बैठ गया। उसे पहली बार समझ आया कि उसने क्या खो दिया है। उसी शाम उसके फोन पर एक मैसेज आया। सिया का।

आरव, मुझे सब पता चल चुका है। मेहर ने मुझे खुद सब बता दिया था। जो हुआ… वो तुम्हारे लिए सबक था, मेरे लिए अंत।
अब मेरे दिल का ताला हमेशा के लिए बंद है। अपना ख्याल रखना। आरव ने तुरंत सिया को कॉल किया।

इस बार फोन स्विच ऑफ नहीं था। लेकिन… नंबर अस्तित्व में ही नहीं था। जैसे सिया उसकी जिंदगी से नहीं,
उसकी दुनिया से ही गायब हो गई हो। आरव बालकनी में खड़ा आसमान को देख रहा था।

उसे अब समझ आया —कुछ ताले बाहर से नहीं, अंदर से बंद होते हैं। और जब दिल अंदर से बंद हो जाए…
तो कोई चाबी, कोई माफी, कोई प्यार उसे दोबारा नहीं खोल सकता।

अब तीन दिन बीत चुके थे। आरव अब भी समझ नहीं पा रहा था कि उसके साथ हुआ क्या था। मेहर पुलिस की पूछताछ के बाद बेल पर बाहर थी। ऑफिस में अफवाहें थीं, लोग कानाफूसी कर रहे थे। लेकिन सबसे ज़्यादा खामोशी उसके अंदर थी।

उसे लग रहा था कि कहानी खत्म हो चुकी है। लेकिन असली कहानी तो अब शुरू होने वाली थी। उस शाम आरव के फोन पर एक अनजान ईमेल आया। Subject: Game Over? Not Yet.

अंदर एक ही वीडियो फाइल थी। उसने काँपते हाथों से वीडियो खोला। स्क्रीन पर एक कैफे दिखाई दिया। वही कैफे… जिसकी तस्वीर सिया ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में डाली थी — कानपुर वाला। कैमरा ज़ूम हुआ। टेबल पर दो लड़कियाँ बैठी थीं। एक… सिया।दूसरी… मेहर। आरव का दिल रुक सा गया। वीडियो में साफ दिख रहा था — दोनों आराम से कॉफी पी रही थीं। मुस्कुरा रही थीं। जैसे पुरानी दोस्त हों। फिर ऑडियो साफ सुनाई देने लगा।

मेहर: उसे शक तो नहीं हुआ? सिया हल्की हँसी हँसी। आरव को? वो हमेशा खुद को सबसे चालाक समझता है।
मेहर: लेकिन तुम उसे अब भी प्यार करती हो ना?
कुछ सेकंड की चुप्पी।
सिया की आवाज़ बदल गई — ठंडी, सख्त।
प्यार और सम्मान में फर्क होता है, मेहर। उसने मेरा प्यार तोड़ा… मैं उसका सम्मान तोड़ूँगी।

वीडियो यहीं खत्म हो गया।  आरव के हाथ से फोन गिर गया। तो ये सब…
होटल, हैकिंग, AI आवाज़… सब पहले से प्लान था?

उसी रात उसके दरवाज़े की घंटी बजी। आरव ने दरवाज़ा खोला। सामने… सिया खड़ी थी। सफेद सूट में। शांत चेहरा। आँखों में अजीब सा सुकून। हैलो, आरव। उसकी आवाज़ बिल्कुल वैसी ही थी जैसी उस रात स्पीकर से आई थी।

आरव के पास शब्द नहीं थे। तुम… कानपुर में थीं… हाँ, सिया मुस्कुराई, और नहीं भी।

वो अंदर आई। आराम से सोफे पर बैठ गई। जैसे कुछ हुआ ही न हो। तुम सोच रहे होगे… ये सब कैसे? उसने कहा। आरव बस उसे देख रहा था।

सिया ने आगे कहा — जब मुझे पहली बार तुम्हारे और मेहर के बारे में पता चला, उसी दिन मैंने फैसला कर लिया था कि मैं रोऊँगी नहीं। मैं तुम्हें वही महसूस कराऊँगी जो मैं महसूस कर रही थी।

तो मेहर…?आरव की आवाज़ टूटी हुई थी।

उसे सच्चाई पता थी। उसके साथ भी यही हुआ था। बस फर्क इतना था कि वो बदला चाहती थी… और मैं न्याय। आरव ने गुस्से में कहा, ये न्याय है? मुझे बर्बाद कर देना? सिया की आँखें सीधी उसकी आँखों में टिक गईं।

बर्बाद? नहीं, आरव। मैंने तुम्हें सिर्फ आईना दिखाया है। कमरे में सन्नाटा छा गया।

सिया उठी। दरवाज़े की तरफ बढ़ी। फिर बिना मुड़े बोली — तुमने मुझे धोखा दिया था। मैंने तुम्हें सच दिखाया। अब फैसला तुम्हारा है —तुम खुद से नज़र मिला पाते हो या नहीं। दरवाज़ा बंद हुआ।

आरव अकेला खड़ा रह गया। टेबल पर उसे एक छोटी सी चीज़ दिखाई दी — एक धातु का छोटा ताला।

उसके साथ एक पर्ची थी —दिल का ताला बाहर से नहीं खुलता, जब तक अंदर वाला इंसान बदल न जाए।

नीचे लिखा था — सिया

और पहली बार, आरव को लगा कि असली सज़ा बदनामी नहीं थी… बल्कि वो खालीपन था, जो अब उसके अंदर हमेशा के लिए बंद हो चुका था।

अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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