बारिश की बूंदें हवेली की पुरानी खिड़कियों से टकरा रही थीं। आरव ने दरवाज़ा खोला। लकड़ी की चरमराहट पूरे गलियारे में गूंज उठी। अब ये हमारा घर है…उसने मुस्कुराकर कहा।  उसकी बीवी भी झूम उठी। इस घर में आना जैसे उसका कोई सपना हो और उसकी जिंदगी का मक्सद पूरा हो गया हो… वो अपने पति के साथ एक नई शुरूआत जो करने आई थी उसकी खुशी का कोई ठीकाना नहीं था। वो झूम रही थी और पूरे घर में घूम रही थी।

नायरा ने चारों तरफ देखा। ऊँची छतें। मोटी दीवारें। लंबे अंधेरे गलियारे। जैसे घर नहीं… कोई खामोश राज़ हो। रात तक सारा सामान सैट हो गया। मोमबत्तियों की हल्की रोशनी में दोनों पास बैठे थे। नायरा आरव के कंधे पर सिर रखे मुस्कुरा रही थी।

नई शादी।
नई जगह।
नई शुरुआत।

तभी… बहुत हल्की आवाज आई।

जैसे कोई… धीरे-धीरे सांस ले रहा हो। नायरा सीधी हो गई। और उसने कहा तुमने सुना?

आरव ने हंसकर कहा, पुराना घर है… आवाजें आती रहती हैं।

लेकिन कुछ सेकंड बाद फिर वही आवाज आई। इस बार… थोड़ा और साफ क्योकि कान और दिमाग इस बार सर्तक थे ।

ये आवाज़ बेड के ठीक पीछे वाली दीवार से आ रही थी। नायरा उठी और धीरे से दीवार के पास गई। उसने कान लगाया।

ठंडी… नमी भरी दीवार और उसके अंदर से… साफ-साफ… सांसों की आवाज।

धीमी। थकी हुई। जैसे कोई बंद जगह में कैद हो।

अचानक दीवार के भीतर से बहुत हल्की फुसफुसाहट आई—…बचाओ…

नायरा पीछे हट गई। उसका दिल ड़र में सहम गया और तेज़ धड़क रहा था। वो मुड़ी तो आरव वहाँ पर नहीं था। और कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था। इतना ही नहीं बाहर गलियारे में… किसी के कदमों की आहट गूंज रही थी।

अगली सुबह हवेली अजीब खामोशी में डूबी हुई थी। रात की वो सांसें नायरा के दिमाग से निकल ही नहीं रही थीं। आरव सामान्य बनने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी आंखों के नीचे हल्की थकान साफ दिख रही थी। नायरा ने बहाना बनाकर पड़ोस की एक बूढ़ी औरत से बात की। पहले तो वो चुप रही, फिर धीमे स्वर में बोली— बीस साल पहले इस घर से एक लड़की गायब हुई थी… नाम था काव्या। बहुत हंसती थी… लेकिन एक रात बस गायब। ना लाश मिली, और ना कोई सुराग।

ये सब सुनकर नायरा का गला सूख गया। शाम को जब वो वापस लौटी, हवेली पहले से ज्यादा भारी लग रही थी। दीवारें जैसे उसे घूर रही हों। रात होते ही फिर वही आवाज… इस बार और साफ। सांसों के साथ जैसे हल्की-सी सिसकी। नायरा धीरे से उठी और दीवार से कान लगाया।

अंदर से बहुत हल्की फुसफुसाहट आई— तुम… सुन सकती हो ना?

उसके हाथ कांपने लगे और ठंडे पड़ गए। तभी पीछे से आरव ने उसे पकड़ लिया। फिर वही? उसने धीमे लेकिन सख्त स्वर में पूछा।उसकी पकड़ कुछ ज्यादा कस गई थी। नायरा ने पहली बार महसूस किया— शायद उसे दीवारों से नहीं… बल्कि अपने ही पति से डरना चाहिए।

तीसरी रात हवेली की हवा और भारी लग रही थी। नायरा की नींद बार-बार टूट रही थी। हर बार वही एहसास—जैसे कोई उन्हें देख रहा हो। अचानक फिर वही सांसें… इस बार तेज़। बेचैन। जैसे दीवार के अंदर कोई घबराया हुआ हो। नायरा ने लाइट ऑन की। आरव उसके पास नहीं था।उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

वो धीरे-धीरे कमरे से बाहर निकली। लंबा अंधेरा गलियारा सामने फैला था। हवा में सीलन और पुराने लकड़ी की गंध घुली थी। तभी उसे हल्की-सी खटखट की आवाज सुनाई दी। वो आवाज उसी दीवार की तरफ से आ रही थी। नायरा करीब गई… और वह जम गई। क्योकि आरव वहाँ खड़ा था। उसका हाथ दीवार पर टिका हुआ था, जैसे वो किसी की धड़कन महसूस कर रहा हो। उसकी आंखें अजीब तरीके से खाली थीं। आरव…? नायरा की आवाज कांपी।

वो धीरे से बोला— अब तुमने उसे जगा दिया है…

किसे? नायरा ने घबराकर पूछा।

आरव उसकी तरफ मुड़ा। उसके चेहरे पर अजीब-सी मुस्कान थी। और बोला कुछ चीज़ें सोई रहें तो बेहतर होता है। अचानक दीवार में हल्की-सी दरार उभरी… जैसे अंदर से किसी ने ज़ोर लगाया हो।नायरा ने पहली बार महसूस किया—यह सिर्फ एक घर नहीं…यह किसी का बंद पड़ा सच है, जो बाहर आना चाहता है।
अब हवेली सिर्फ डर नहीं, शक भी देने लगी थी। नायरा ने तय कर लिया कि वह सच जाने बिना चैन से नहीं बैठेगी। उसने पुराने स्टोर रूम में रखे धूल से ढके अखबार और फाइलें खंगालनी शुरू कीं। घंटों बाद उसे एक पीला पड़ चुका अखबार मिला। हेडलाइन थी — स्थानीय लड़की रहस्यमयी तरीके से लापता। नीचे छपी तस्वीर देखकर उसके हाथ कांप उठे। काव्या… उसकी आंखें, उसका चेहरा, उसकी मुस्कान—सब कुछ नायरा से मिलता-जुलता था। जैसे आईने में खुद को देख रही हो।

उस रात हवेली में अजीब-सी गंध फैल गई—गीली मिट्टी और किसी पुरानी चीज़ के सड़ने जैसी। नायरा को लगा जैसे दीवारों के भीतर सिर्फ सांसें नहीं, कई सारी यादें भी कैद हैं। वह कमरे में लौटी तो आरव असामान्य रूप से शांत था। उसने नायरा को अपने करीब खींचा। उसका स्पर्श गर्म था, लेकिन उसकी हथेलियां पसीने से भीगी हुई थीं।

तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो? नायरा ने फुसफुसाकर पूछा।

आरव ने उसकी आंखों में देखा… कुछ पल चुप रहा… फिर हल्की मुस्कान देकर बोला। तुम बहुत सोचती हो। दोनों के बीच करीबिया बड़ ही रही थी कि उसी क्षण फिर वही आवाज जैसे वो चीज़ इन दोनों को करीब आने ही न देना चाहती हो—इस बार दीवार के भीतर से हल्की-सी खरोंच भी थी। और बहुत धीमी फुसफुसाहट — वो झूठ बोल रहा है…

नायरा का दिल बैठ गया। क्योंकि इस बार… आरव ने भी वह आवाज सुनी थी। और उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था। नायरा ने उसी रात आरव का सामना किया। उसके हाथ में पुरानी फाइलें थीं, आँखों में डर नहीं—सवाल थे। बीस साल पहले इस घर का मालिक तुम्हारा परिवार था… है ना? कमरे में कुछ पल के लिए खामोशी जम गई। आरव की सांसें तेज हो गईं। दीवार के भीतर से फिर हल्की-सी खरोंच सुनाई दी, जैसे कोई सच बाहर निकलने को बेताब हो।

आरव ने आखिरकार बोलना शुरू किया। उसकी आवाज भारी थी। काव्या… मेरी दोस्त थी। उस रात झगड़ा हुआ। वो सीढ़ियों से गिरी… उसका सिर लग गया… वो मर गई थी। उसकी आँखें खाली थीं, जैसे वो वही रात फिर से देख रहा हो। मैं डर गया था… पापा ने कहा किसी को मत बताना। हमने सबको कहा वो भाग गई।

लाश? नायरा की आवाज फुसफुसाहट से भी धीमी थी।

आरव ने नजरें झुका लीं। पीछे पुराने कुएँ में…

नायरा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। तभी अचानक हवेली के पीछे से कोई भारी चीज गिरने की आवाज आई। दोनों चौंक कर बाहर भागे। अंधेरे में कुएँ के पास मिट्टी धंसी हुई थी… जैसे भीतर से किसी ने धक्का मारा हो।

और फिर… उसी गहराई से आवाज आई—मैं अभी भी यहाँ हूँ…

इस बार वो आवाज guilt नहीं थी। वो… ज़िंदा थी। कुएँ के पास खड़ी नायरा की साँसें टूट रही थीं। अंदर से आती आवाज अब साफ थी… जिंदा… भारी… और इंतज़ार से भरी।

आरव ने काँपते हाथों से टॉर्च नीचे डाली। और जो दिखा… उससे उसका चेहरा सफेद पड़ गया। कुएँ की दीवार से अंदर की तरफ एक छोटा-सा बंद कमरा बना था… जैसे किसी ने जानबूझकर जगह छोड़ी हो। यह मैंने नहीं किया… आरव बुदबुदाया।

तभी पीछे से धीमी ताली की आवाज आई। नायरा खड़ी थी। उसकी आँखों में अब डर नहीं था। सिर्फ ठंडा सन्नाटा।

तुमने उसे मारा नहीं था, आरव…वो बोली।
तुमने बस उसे मरने के लिए छोड़ दिया था।

सच सामने आया। काव्या उस रात मरी नहीं थी। वो बस बेहोश हुई थी। आरव और उसके पिता ने उसे छुपा दिया था डर से। और कुछ घंटों बाद… वो वहीं दम तोड़ गई। और इसके बाद एक एसा खुलासा होता है जो आरव को जिंदा ही सदमें मे ड़ाल देता है, दरसल… नायरा… काव्या की छोटी बहन थी। वो सच जान चुकी थी।

दीवारों में लगे स्पीकर, आवाजें, खरोंचें—सब उसका खेल था। वो चाहती थी कि आरव वही महसूस करे…
जो उसकी बहन ने किया था।

कैद।
घुटन।
इंतज़ार।

पुलिस सायरन दूर से सुनाई देने लगे। नायरा ने आख़िरी बार हवेली को देखा। और बोली…

कुछ जुर्म चाकू से नहीं होते…
कुछ जुर्म कायरता से होते हैं।

आरव घुटनों पर गिर चुका था। हवेली खामोश थी। अब वहाँ कोई सांस नहीं थी। क्योंकि सच…
आख़िरकार बाहर आ चुका था।

 

अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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