कबीर एक बहुत ही सुल्झा और सरल लड़का था, कबीर ने हमेशा से सोचा हुआ था कि उसकी शादी सादगी से होगी, शोर-शराबे से कोसो दूर। जब अनन्या उसके जीवन में आई, सब कुछ सामान्य लगा। परिवार खुश था, रिश्तेदार संतुष्ट थे, और अनन्या शांत, संयमित और बेहद खूबसूरत लग रही थी। ठीक वैसी ही लगी जैसी लड़की घर वाले चाहते थे। और शादी पक्की कर दी गई। शादी के दिन उसकी मुस्कान में कुछ अजीब सा लग रहा था—जैसे होंठ मुस्कुरा रहे हों, पर आँखें नहीं। कबीर के मन में उसका एसा व्यवहार देखकर सवाल हो कई उठे लेकिन उसने इसे झिझक समझा और शादी के लिए आगे बड़ गया। शादी बड़ी ही सरलता से संपन हुई, ठीक वैसे ही जैसे कबीर ने सोचा था और चाहा था, सब बहुत खुश थे।
शादी के बाद के शुरुआती दिन सामान्य रहे। अनन्या घर के कामों में हाथ बँटाती, सबका सम्मान करती, लेकिन कबीर ने एक बात नोटिस की—कि वो जरूरत से ज्यादा ही शांत है, वह कभी खुलकर हँसती भी नहीं थी। रात को वह देर तक जागती रहती, और कई बार कबीर को लगा कि वह रो रही है। और कबीर के पूछने पर वह कहती, बस यूँ ही… पुरानी बातें याद आ जाती हैं। दोनों की अरेंज मैरिज थी तो कबीर भी किसी चीज़ की कोई जबरदस्ती नहीं करता। और उसका पूरा सम्मान करता।
एक रात कबीर की नींद अचानक खुली। घड़ी में 1:30 बजे थे। कबीर के करवट ली तो बिस्तर का दूसरा हिस्सा खाली था। वह चौक गया और उठकर बाहर आया तो देखा—अनन्या बालकनी में खड़ी थी। ठंडी हवा में उसका दुपट्टा उड़ रहा था, और वह बहुत धीमी आवाज़ में किसी का नाम ले रही थी—आयान…
कबीर ठिठक गया। यह नाम उसने पहले कभी नहीं सुना था। और उस रात पहली बार उसे लगा कि चीज़ो को वो जितनी सरलती से देख रहा है असल में चीज़े इतनी सरल है नहीं— और उसे ये भी समझ आ गया की इस शादी में वह अकेला नहीं है।
उस रात के बाद कबीर के मन में आयान नाम गूंजने लगा। सुबह उसने सामान्य बनने की कोशिश की, लेकिन अनन्या की आँखों के नीचे काले घेरे पहले से और भी गहरे लग रहे थे। नाश्ते की मेज़ पर वह चुप थी, जैसे रात की बात हुई ही न हो। कबीर ने बहुत हिम्मत जुटाई और सहज बनते हुए पूछा, कल रात तुम बालकनी में किससे बात कर रही थीं? अनन्या ने एक पल के लिए उसकी ओर देखा कि इसे कैसे पता, और फिर नज़र झुका ली। किसी से नहीं… तुम्हें सपना आया होगा, उसने धीमे से कहा।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। कयोकि अब कबीर जान चुका था कि उसकी बीवी उससे झूठ बोल रही है, कबीर ने उस समय कुछ कहा नही लेकिन उसी दिन कबीर ने देखा कि अनन्या अपने कमरे की अलमारी में एक छोटा-सा लकड़ी का बॉक्स छिपाकर रखती है। जब वह नहाने गई, तो कबीर खुद को रोक नहीं पाया। उसने बॉक्स खोला। अंदर एक पुरानी चिट्ठी, सूखे गुलाब के फूल, और एक तस्वीर थी—एक लड़का, मुस्कुराता हुआ। तस्वीर के कोने जले हुए थे, जैसे किसी ने उसे मिटाने की कोशिश की हो। पीछे लिखा था—हमेशा तुम्हारा, आयान।
कबीर का दिल तेज़ धड़कने लगा। और उसे समझ आ गया कि ये रिश्ता कभी उन दोनों का था ही नहीं ये तो अनन्या और कबीर का था, तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला। अनन्या सामने खड़ी थी। उसकी आँखों में इस बार डर नहीं… चेतावनी थी। क्योकि अब वो भी समझ चुकी थी की कबीर सच जान चुका है जिसके बाद उसने धीमे से कहा, कुछ चीज़ें दफन ही अच्छी लगती हैं, कबीर…
अनन्या की चेतावनी के बाद घर का माहौल बदल गया। वह पहले से भी ज्यादा शांत हो गई, लेकिन उसकी खामोशी अब भारी लगती थी। कबीर ने आयान के बारे में सच जानने का फैसला किया। उसने पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाले, कॉलेज के दोस्तों से बात की। धीरे-धीरे एक कहानी सामने आई—आयान और अनन्या कॉलेज में साथ थे। दोनों की शादी तय थी, लेकिन अचानक रिश्ता टूट गया। और शादी से ठीक एक दिन पहले… आयान ने आत्महत्या कर ली।
कबीर के हाथ काँपने लगे और उसके मन में सवाल उठने लगे। क्या अनन्या अब भी उसी में जी रही है?
उस रात फिर 1:30 बजे उसकी नींद खुली। इस बार वह पहले से तैयार था। वह चुपचाप बालकनी की ओर बढ़ा। अनन्या वहाँ खड़ी थी, लेकिन इस बार वह अकेली नहीं लग रही थी। वह जैसे किसी की आँखों में देख रही थी। उसकी आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी—मैंने कहा था ना, मैं तुम्हें कभी छोड़ूँगी नहीं…
अचानक हवा ठंडी हो गई। कबीर ने अपने कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस किया। उसने मुड़कर देखा—पीछे कोई भी नहीं था। लेकिन बालकनी के शीशे में उसे तीन परछाइयाँ दिखीं।
एक उसकी। एक अनन्या की। और तीसरी… किसी और की। और ये देखकर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई और उसकी हालत खराब होने लगी। तीसरी परछाईं देखने के बाद कबीर की हिम्मत टूटने लगी, लेकिन डर से बड़ा उसका शक था। अगले दिन वह सीधे उस शहर गया जहाँ अनन्या और आयान पढ़ते थे। कॉलेज के पुराने चौकीदार ने उसे पहचान लिया। बहुत मनाने पर उसने सच बताया—आयान ने आत्महत्या नहीं की थी। वह शादी रुकवाने अनन्या के घर गया था। वहाँ कबीर भी मौजूद था। बहस हुई। धक्का-मुक्की हुई। और सीढ़ियों से गिरकर आयान की मौत हो गई। मामला पैसे देकर दबा दिया गया और आत्महत्या का नाम दे दिया गया।
कबीर के दिमाग में सब घूम गया। उसे याद आया—वह सचमुच वहाँ गया था। अनन्या पर शादी के लिए दबाव था। आयान रास्ते में था। गुस्से में उसने उसे धक्का दिया था… बस एक धक्का लेकिन उसे ये नहीं पता था की उस धक्के के बाद क्या हुआ।
उस रात 1:30 बजे, अनन्या खुद उसके सामने आकर खड़ी हो गई। उसकी आवाज़ बदल चुकी थी। तुमने उसे मारा… और मुझे उसके बिना जीने को छोड़ दिया, उसने कहा। कमरे की लाइट झपकने लगी। बालकनी का दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
आज सौदा पूरा होगा, अनन्या फुसफुसाई। आईने में इस बार साफ दिख रहा था—आयान कबीर के पीछे खड़ा था। और उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।
उस रात हवा में अजीब-सी सरसराहट थी। बालकनी का दरवाज़ा खुला था और परदे ऐसे लहरा रहे थे जैसे कोई अदृश्य बारात अंदर आ चुकी हो। कबीर पीछे हटना चाहता था, लेकिन आयान की परछाईं अब सिर्फ आईने में नहीं थी—वह उसके बिलकुल पास खड़ी थी। अनन्या की आँखों में आँसू नहीं थे, सिर्फ एक चमक थी… जैसे किसी अधूरी दुल्हन की।
तुमने मेरी शादी छीनी थी, आयान की आवाज़ कमरे में गूँजी, अब मैं तुम्हारी ले जाऊँगा।
अचानक कमरे का माहौल बदल गया। दीवारों पर टंगी शादी की तस्वीरें जीवित-सी लगने लगीं। ढोल की धीमी आवाज़ सुनाई देने लगी। कबीर को लगा जैसे वह किसी और ही मंडप में खड़ा है। सामने अनन्या लाल जोड़े में थी—लेकिन उसके बगल में दूल्हा आयान था।
कबीर चीखा, मैंने जानबूझकर नहीं किया! मुझे तो कुछ पता भी नही था।
अनन्या मुस्कुराई—गुनाह इरादे से नहीं, नतीजे से पहचाना जाता है।
अगली सुबह पड़ोसियों ने खबर सुनी—कबीर बालकनी से गिर गया था। पुलिस ने इसे हादसा कहा।
तेरहवें दिन अनन्या गायब हो गई।
लोग कहते हैं, आधी रात को उस फ्लैट की बालकनी में अब भी रोशनी जलती है।
और कभी-कभी… वहाँ शहनाई की हल्की-सी आवाज़ सुनाई देती है।
इस तरह मरने के बाद भी उनकी प्रेम कहानी अमर रही, सच्चा प्यार हो तो मौत के बाद भी जिंदा रहता है।