बारिश का मौसम हर कपल के लिए बहुत रॉमंटिक होता है.., और बारिश के साथ कई हसीन यादें भी होती है चाहे वो बारिश में हाथ पड़ककर भीगना हो या फिर गरम गरम चाय पीना। लेकिन कभी ये हसीन बारिश जुदाई बन जाएगी ये उस लडकी ने नहीं सोचा था। दरसल पहली बारिश की शाम थी। बस स्टॉप पर खड़ी लड़की को लोग रोज़ देखते थे, पर आज वो कुछ ज़्यादा ही टूटी हुई लग रही थी।
हाथ में मोबाइल था, स्क्रीन बार-बार ऑन होती… फिर ऑफ।ठीक इसी जगह, ठीक इसी समय, उसने आख़िरी बार अपने प्रेमी को जाते देखा था। वो हँसा था, हल्की बारिश में भागते हुए बोला था —पाँच मिनट में आता हूँ, बस यहीं रुको।

पाँच मिनट बीते। फिर दस… फिर एक घंटा। बारिश तेज़ होती गई, लेकिन वो नहीं लौटा, लड़की वहीं खड़ी रही, उसके इंतजार में। उसे विश्वास था की उसका प्रेमी जरूर लौटेगा। आज पूरे तीन साल हो चुके थे। फिर भी हर बारिश में उसका दिल उसी पाँच मिनट पर अटका रहता था। जैसे वक़्त आगे बढ़ा ही नहीं रहा हो।

लोगों को लगता था वो पागल है। पर वो जानती थी — इंतज़ार कभी पागल नहीं होता, बल्कि इंतजार तो प्यार होता है। और उसका यू पागलो की तरह इंतजार करना ये साफ बता रहा था कि वो उस लड़के से सच में पागलों की तरह प्यार करती थी।

आज फिर बारिश हुई और इस बार की ये बारिश कुछ अलग थी। बूंदें तेज़ थीं, जैसे आसमान भी किसी पुराने ज़ख़्म को कुरेद रहा हो। लड़की बस स्टॉप पर खड़ी थी,और उसकी आँखें सड़क पर टिकी हुईं थी। तभी अचानक किसी ने उसका नाम पुकारा। आवाज़ बहुत हल्की थी, पर इतनी जानी-पहचानी कि उसकी साँस अटक गई और उसे एसा लगा की उसके तीन साल का इंतज़ार अब खत्म हो गया हो। उसने पलटकर देखा—लेकिन वहाँ कोई भी नहीं था।

वो खुद को समझाने लगी कि शायद उसका वहम है, शायद यादों का असर है। तभी बस स्टॉप के शीशे में उसे एक परछाईं दिखी। वही चाल, वही कंधों का झुकाव… उसका दिल ज़ोर से धड़क उठा और उसका दिल खुशी से बेचैन हुआ। उसने हिम्मत करके कहा, अब मज़ाक मत करो। जवाब में सिर्फ़ बारिश की आवाज़ थी।

अगले दिन उसने तीन साल में पहली बार उस हादसे के बारे में पूछताछ की क्योकि जबसे वो लड़का गया था वो सदमे में उसका इंतज़ार कर रही थी लेकिन उसकी परछाई ने मानो उसका दिमाग खोला हो। पूछताछ के दौरान उसे पुलिस रिपोर्ट, अख़बार की कटिंग—सब कुछ मिला जो उसके लिए एक कड़वा सच था। उसका प्रेमी सच में मर चुका था। फिर सवाल उठता था—जो वो देख रही थी, वो क्या था? यादें इतनी ज़िंदा कैसे हो सकती हैं?

शाम को जब फिर बारिश हुई, वो वापस बस स्टॉप पहुँची। इस बार डर नहीं था, सिर्फ़ एक सवाल था। अगर वो सच में चला गया है, तो फिर हर साल इसी दिन, इसी बारिश में, वो उसे क्यों महसूस करती है?, क्यो वो उसे रोज़ महसूस नहीं कर पाती?

कहीं ऐसा तो नहीं… कि कुछ प्यार जाते नहीं, बस किसी और रूप में लौट आते हैं?

उस दिन लड़की ने खुद को रोकना छोड़ दिया। वह सीधे अस्पताल के रिकॉर्ड रूम पहुँची, जहाँ धूल भरी फाइलों में उस रात का सच बंद था। एक्सीडेंट की तारीख़, समय और जगह—सब वही था। रिपोर्ट के आख़िरी पन्ने पर उसका नाम लिखा था, और सामने एक ठंडी सी लाइन—मौके पर मौत। काग़ज़ हाथ में काँप रहा था, पर आँखों से आँसू नहीं निकले। जैसे आँसू भी सच्चाई मानने से इंकार कर रहे हों।

शाम होते ही बारिश फिर शुरू हो गई। बिना सोचे-समझे उसके कदम उसी बस स्टॉप की ओर बढ़ गए। सड़क खाली थी, लाइटें धुंधली, और हवा में वही जानी-पहचानी खुशबू। अचानक उसे महसूस हुआ कि कोई पास खड़ा है। इस बार परछाईं नहीं, पूरा एहसास था—कंधे से कंधा छूता हुआ जैसे उसे किसी ने अपनी बांहो में घेर लिया हो।

उसने धीमे से कहा, अगर तुम हो, तो प्लीज़ मेरे सामने आ जा, मै तुम्हे बहुत याद करती हूँ। जवाब में बारिश कुछ पल के लिए थम गई। और उसी सन्नाटे में किसी ने फुसफुसाकर कहा, मैं गया नहीं हूँ… बस देर हो गई थी।

उसकी साँस रुक गई। डर और प्यार एक साथ टकरा गए। अब सवाल सिर्फ़ ये नहीं था कि वो कौन है—
सवाल ये था कि अगर वो सच में सामने आया, तो क्या वो उसे खोने का दर्द दूसरी बार झेल पाएगी?

उस आवाज़ के बाद लड़की कई पल तक वहीं जमी रही। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, जैसे सीने से बाहर निकल आएगा। बारिश फिर से शुरू हो चुकी थी, पर इस बार उसे ठंड नहीं लग रही थी। उसे साफ़ महसूस हो रहा था कि वह अकेली नहीं है। किसी की मौजूदगी, वही पुराना अपनापन, वही सुकून—जो सिर्फ़ उसी के साथ होता था, वो भी उसके साथ ही है।

धीरे-धीरे धुंध के बीच एक आकृति उभरने लगी। चेहरा पूरी तरह साफ़ नहीं था, लेकिन आँखें… वही आँखें थीं। लड़की की आवाज़ भर्रा गई। उसने कहा, अगर तुम यहीं हो, तो चले क्यों गए? जवाब में हल्की सी मुस्कान महसूस हुई, जैसे हवा में तैर गई हो। फिर वही फुसफुसाहट—मैं जाना नहीं चाहता था, पर उस रात वक़्त मुझसे पहले पहुँच गया।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। इतने सालों का इंतज़ार, हर बारिश की तड़प, सब एक साथ टूटकर बाहर आ गया। वह आगे बढ़ी, हाथ बढ़ाया, पर उसकी उँगलियाँ सिर्फ़ हवा को छू सकीं। तभी आवाज़ आई, अब मुझे जाने देना होगा… क्योंकि मेरा रुकना तुम्हें बाँध रहा है।

लड़की समझ गई—ये मुलाक़ात अलविदा के लिए थी। प्यार सामने था, लेकिन पकड़ में नहीं। और सबसे मुश्किल था… उसे छोड़ना।

उस रात बारिश धीरे-धीरे हल्की हो गई थी, जैसे आसमान भी उनकी बात सुन रहा हो। लड़की बेबस हालत में बस स्टॉप पर खड़ी थी, आँखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब-सी शांति थी। सामने वही धुंधली आकृति थी—अब पहले से ज़्यादा साफ़, लेकिन पहले से ज़्यादा दूर। उसने काँपती आवाज़ में पूछा, क्या ये आख़िरी बार है? जवाब में सिर्फ़ एक हल्की-सी हाँ महसूस हुई।

उसने मन ही मन कहा, मैं तुम्हें हर बारिश में ढूँढती रही, क्योंकि मुझे लगा तुम लौटोगे। उस मौजूदगी ने धीरे से कहा, मैं लौटता रहा… ताकि तुम टूट न जाओ। लेकिन अब तुम्हें जीना सीखना होगा। पहली बार उसे एहसास हुआ—वो इंतज़ार उसकी कमज़ोरी नहीं, उसकी ताक़त था।

बारिश थम चुकी थी। बस स्टॉप पर अब सिर्फ़ वो थी, पर खाली नहीं। उसके अंदर एक भारी बोझ हल्का हो चुका था। उसने आख़िरी बार उसी जगह को देखा, मुस्कुराई, और बिना पीछे देखे आगे बढ़ गई। एसा लगा था कि वो ये सब कुछ सहन नहीं कर पाएगी लेकिन जब वो सामने आया और जब उसने खुद समझाया तो उसे दुश तो हुआ लेकिन वो ठहराव के साथ सच्चाई को समझी और उसी को हकीकत मानकर आगे बड़ गई।

कुछ महीने बाद, उसी रास्ते पर, उसी बस में, उसकी ज़िंदगी में एक नई शुरुआत आई। वो जानती थी—ये किसी को भूलना नहीं था, बल्कि यादों के साथ आगे बढ़ना था और उसके दिल में पहले ही उसकी खूबसूरत याद बसी हुई थी।

क्योंकि कुछ प्यार साथ चलने के लिए नहीं होते…
वो हमें चलना सिखाने के लिए आते हैं।

 

By अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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