शादी के बाद की पहली रात ही अदिति ने पहली बार आरव का हाथ पकड़ा था और हाथ पकड़कर उससे बोली अगर ज़िंदगी ने हमें अलग कर दिया तो भी तुम मुझे याद रखोगे न?
आरव हँसा और बोला तुम बड़ी ड्रामेबाज़ हो बाबू। उसे नहीं पता था— ये सवाल भविष्य की चेतावनी था।
उनकि शादी के बारह दिन बाद ही रात के 3:40 बजे अदिति के सीने में तेज़ दर्द उठा। साँस टूटने लगी और होंठ नीले पड़ने लगे।
आरव घबरा गया और उसे गोद में उठाकर सीधे अस्पताल ले आया।
ये एक इमरजेंसी थी। डॉक्टर ने बिना ज़्यादा सवाल किए दोनों मिया-बीवी के ब्लड सैंपल ले लिए। Routine genetic matching, नर्स ने कहा Transfusion ke liye zaroori hai. आरव ने ध्यान नहीं दिया क्योकि उसका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी बीवी पर था। अगर ध्यान देता… तो शायद ये शादी हमेशा के लिए यहीं रुक जाती।
सुबह। डॉक्टर ने दोनों को अपने केबिन में बुलाया। कमरा ठंडा था और फ़ाइल भारी। डॉक्टर की आवाज़ काँप रही थी। Report दो बार चैक हुई है, डाक्टर ने कहा।
आरव ने अदिति का हाथ कसके पक्ड़ लिया। डॉक्टर ने फ़ाइल खोली—
DNA COMPATIBILITY ANALYSIS
RESULT: SIBLING MATCH – 97.8%
अदिति हँस पड़ी। Doctor…ये क्या मज़ाक कर रहे हो? डॉक्टर ने नज़र नहीं मिलाई। आरव की उँगलियाँ सुन्न हो गईं और चौक कर बोला भाई… बहन…?
सबसे डरावनी बात तो ये थी दोनों के माता-पिता ज़िंदा थे। दोनों की अलग फैमिली।, अलग सरनेम।, अलग शहर और शादी से पहले अलग जिंदगिया थी।
तो फिर… DNA झूठ कैसे बोल सकता है? रात को अदिति ने आरव से कहा— अगर दुनिया कहे हम ग़लत हैं… उसकी आवाज़ टूट गई। तो क्या हमारी मोहब्बत भी ग़लत हो जाती है?….., आरव को कुछ नहीं समझ आ रहा था। इस खुलासे के बाद से वो मायूस हो गया था और सिर्फ़ अदिति को सीने से लगाना चाहता था।
लेकिन उसके दिमाग़ में एक ही सवाल घूम रहा था— गलती हमारी शादी में नहीं है… गलती हमारी पैदाइश में है।
उसी पल आरव के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया— DNA रिपोर्ट सच कह रही है, अपने माता-पिता से पूछो. आरव का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। क्योंकि ये मैसेज अस्पताल के सिस्टम से नहीं आया था।
रात के 1:12 बजे आरव अब भी उस मैसेज को देख रहा था— DNA रिपोर्ट सच कह रही है, अपने माता-पिता से पूछो, नंबर Unknown था उसमें कोई DP नहीं थी और कोई Last Seen भी नहीं था।
वही दूसरी तरह अदिति सो रही थी। या शायद… सोने की कोशिश कर रही थी। आरव ने धीरे से उसका माथा चूमा और कमरे से बाहर निकल गया। सबसे पहले वह अपने पिता के कमरे में गया। पिता की आँखें खुली थीं। जैसे वो इंतज़ार ही कर रहे हों उसके आने का। आरव ने बिना भूमिका बाँधे पूछा— पापा… क्या मैं आपका ही बेटा हूँ?
कमरे में हवा भारी हो गई। पिता ने चश्मा उतारा और काफ़ी देर चुप रहे। फिर आखे चुराते हुए बोले— तुम पैदा नहीं हुए थे, आरव… बल्कि तुम हमें एक अस्पताल के गलियारे में मिले थे। एक फ़ाइल के साथ।आरव की साँस अटक गई। उधर अदिति भी जाग चुकी थी और माँ के घर जा पहुची और उसने अपनी माँ से पूछा माँ… क्या आपने मुझे जन्म दिया था? माँ की आँखें भर आईं और बोली नहीं… इस एक शब्द पर जैसे ज़िंदगी हिल गई। तुम्हारी माँ मर गई थी, तुम्हें हमें सौंप दिया गया था।
अलग-अलग कमरों में दो ज़िंदगियाँ टूट रही थीं पर सच एक ही जगह से जुड़ा था।
सुबह। आरव और अदिति अपने ड्रॉइंग रूम में आमने-सामने बैठे थे।
दोनों के हाथों में अलग-अलग सच था… मैं adopt हुआ हूँ, आरव ने कहा।अदिति की आँखों से आँसू बह निकले और बोली मैं भी…
कमरे में घड़ी की टिक-टिक गूँज रही थी। अब सवाल ये नहीं था क्या वो भाई-बहन हैं? बल्कि सवाल ये था— कौन थे उनके असली माता-पिता?
उसी पल आरव के फोन पर एक ई-मेल आया।
Sender: ClinicArchive@redmail.com
Subject: A-17 | Donor History
अदिति ने काँपते हाथों से मेल खोला। अंदर सिर्फ़ एक लाइन थी— If you were born between 2003–2004, you are not an accident.You are a batch. और नीचे एक PDF अटैच थी।
नाम— K-FERTILITY-UNIT.pdf अदिति ने आरव की ओर देखा और बोली हम बच्चे नहीं थे…, हम प्रोजेक्ट थे… मेल के अंत में
एक आख़िरी लाइन थी—अगर सच जानना है, तो कल रात 11 बजे K-Fertility Unit आना. और उसके नीचे— 📍 Location shared, आरव ने अदिति का हाथ पकड़ा और कहा अगर ये सच है… तो हमें साथ में सामना करना होगा। अदिति ने उसकी उँगलियाँ कस लीं। अगर हम टूटे… तो भी साथ। लेकिन उन्हें नहीं पता था— उस क्लिनिक में सिर्फ़ उनका अतीत नहीं… उनका रिश्ता भी टेस्ट होने वाला था।
रात के 10:57 बजे K-Fertility Unit के बाहर आरव और अदिति खड़े थे। वो पुरानी इमारत थी बिना बोर्ड और बिना लाइट के।
दरवाज़े पर लगा बोर्ड आधा टूटा हुआ था— Closed Since 2005
अदिति ने धीरे से कहा—अगर ये जगह बंद है तो हमें बुलाया किसने?
आरव ने जवाब नहीं दिया क्योंकि उसी पल दरवाज़ा अपने आप खुल गया। अंदर कदम रखते ही एक अजीब-सी गंध आई— दवाइयों और जली हुई फाइलों की। लॉबी में एक पुराना कंप्यूटर पड़ा था। स्क्रीन अचानक जल उठी।
LOGIN: A-17 REQUIRED
अदिति का दिल धड़क उठा। A-17…, यही donor code… आरव ने काँपते हाथों से कीबोर्ड छुआ। स्क्रीन पर एक वीडियो चला।वीडियो में एक आदमी था और उसका चेहरा धुंधला था।
आवाज़ साफ़— अगर तुम ये देख रहे हो… तो इसका मतलब तुम दोनों ज़िंदा हो। अदिति की आँखें भर आईं। हम दोनों?
आदमी बोला—2003–2004 में मैंने 27 बच्चों का DNA एक ही sequence से बनाया। आरव की साँस रुक गई। कि तभी वो बोला तुम सब भाई-बहन नहीं हो… लेकिन तुम अलग भी नहीं हो। अचानक स्क्रीन पर कई बच्चों की तस्वीरें आईं।
सबके चेहरे आरव और अदिति से डरावनी हद तक मिलते-जुलते थे। अदिति फुसफुसाई—ये सब तो हम जैसे हैं…
आवाज़ फिर गूँजी— तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें जन्म नहीं दिया… उन्होंने तुम्हें चुना कि तभी अचानक पीछे से आवाज़ आई— और अब… तुम्हें भी चुनना होगा। आरव मुड़ा तो वहाँ एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। सफ़ेद कोट। थकी आँखें। अदिति की आवाज़ काँप गई— और बोली आप… Donor A-17 हैं? आदमी मुस्कुराकर बोला नहीं… मैं तो सिर्फ़ इस गलती को ज़िंदा रखने वाला हूँ।
उसने एक फाइल आगे बढ़ाई, कवर पर लिखा था—Next Phase – Emotional Pairing
आरव की आँखें फैल गईं और उसने पूछा मतलब…हमारा प्यार भी एक experiment था? बूढ़ा आदमी बोला— प्यार सबसे सटीक टेस्ट होता है। उसी पल इमारत की सारी लाइटें बुझ गईं। सायरन बज उठा। कंप्यूटर स्क्रीन पर लाल अक्षरों में लिखा आया—TRIAL SUCCESSFUL और नीचे— SUBJECTS BONDED, अदिति ने आरव को पकड़ लिया। अगर हमारा प्यार झूठ था…तो दर्द इतना असली क्यों है?, आरव के पास कोई जवाब नहीं था क्योंकि दरवाज़ा बंद हो चुका था और स्पीकर से एक आख़िरी आवाज़ आई—Phase Two कल शुरू होगा।
सुबह के 5:03 बजे अदिति की आँख खुली। कमरा पूरी तरह बदल चुका था। सफेद दीवारें। एक ही पलंग। लेकिन… आरव वहाँ नहीं था। उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा, उसने आवाज़ लगाई आरव…? कोई जवाब नहीं आया।
उधर आरव एक काँच के कमरे में था। चारों तरफ़ स्क्रीन। हर स्क्रीन पर अदिति की लाइव फ़ीड। एक आवाज़ गूँजी—Phase Two: Separation Test. अगर भावनात्मक जुड़ाव कृत्रिम है, तो दूरी उसे तोड़ देगी। आरव चिल्लाया— उसे कुछ मत करना! आवाज़ शांत थी— आपका रिएक्शन एक डेटा है, भावना नहीं।
अदिति के कमरे में एक स्पीकर ऑन हुआ। आरव यहाँ नहीं है और वह तब तक नहीं मिलेगा… जब तक तुम उसे छोड़ने के लिए
तैयार नहीं हो जाती। अदिति हँस पड़ी उसकी हँसी काँप रही थी। छोड़ना? तुम लोगों ने हमें बनाया है… तो तोड़कर दिखाओ, कि तभी स्क्रीन पर एक काउंटडाउन शुरू हुआ।
24:00:00 नीचे लिखा था— If emotional bond breaks, Phase Two successful. घंटे बीतते गए। आरव ने देखा— अदिति खाना नहीं खा रही, पानी नहीं पी रह, वह बस दीवार के सहारे बैठी थी। हर कुछ मिनट में वह फुसफुसाती— अगर तुम मुझे देख पा रहे हो…तो जान लो…मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी, बेपनाह प्यार देखकर आरव की आँखें भर आईं।
12 घंटे बाद एक नया टेस्ट शुरू हुआ। अदिति के सामने एक आदमी लाया गया। चेहरा साफ़। मुस्कान नकली। स्पीकर बोला— ये Subject B-19 है। Genetically compatible. Emotionally replaceable. आदिति ने उसकी ओर देखा तक नहीं और बोली मेरा प्यार replace नहीं होता। लेकिन आरव के कमरे में एक और स्क्रीन जली। उसमें अदिति बेहोश पड़ी थी। आवाज़— अगर वह होश में रही… तो टेस्ट फेल हो जाएगा।आप तय कर सकते हैं… या उसे सुला दें… या खुद उससे अलग हो जाएँ। आरव काँप गया। कैसे? स्क्रीन पर एक बटन उभरा— DISCONNECT
नीचे लिखा था— Permanent emotional disassociation.
आरव को समझ आ गया। अगर उसने बटन दबाया तो अदिति ज़िंदा रहेगी… लेकिन उसे भूल जाएगी। अगर नहीं दबाया तो अदिति टूट जाएगी और शायद मर भी जाए। उसकी उँगली बटन के ऊपर रुकी और तभी स्पीकर से अदिति की आवाज़ आई— आरव… अगर तुम सुन रहे हो… तो याद रखना… प्यार चुनना कभी ग़लत नहीं होता।
काउंटडाउन
00:00:10
आरव ने आँख बंद की और—
काउंटडाउन
00:00:05
आरव की उँगली
अब भी DISCONNECT बटन के ऊपर थी। दिल ज़ोर से धड़क रहा था। दिमाग़ चीख़ रहा था— बचा लो उसे… लेकिन दिल फुसफुसा रहा था— बिना प्यार के बचाना, बचाना नहीं होता।
00:00:03
स्पीकर से अदिति की आख़िरी आवाज़ आई— अगर तुम मुझे भूल भी जाओ… तो कोई बात नहीं… पर ये मत मानना… कि हमारा प्यार किसी ने बनाया था। आरव की आँखों से आँसू गिर पड़े।
उसने धीरे से कहा—अगर प्यार भी experiment है तो मैं इसका सबसे बड़ा defect हूँ।
00:00:01
आरव ने बटन नहीं दबाया बल्कि स्क्रीन के नीचे लगे इमरजेंसी ग्लास को ज़ोर से तोड़ दिया। पूरा सिस्टम झटके से बंद हो गया पूरे कमरे में अलार्म बज उठे, लाइटें टिमटिमाईं। अदिति के कमरे का दरवाज़ा धड़ाम से खुला। आरव अंदर भागा। अदिति ज़मीन पर गिरी हुई थी। साँस चल रही थी… कमज़ोर, पर ज़िंदा। आरव ने उसे बाहों में भर लिया। हम किसी की फ़ाइल नहीं हैं… हम इंसान हैं…अदिति की पलकें हिलीं। तो… तुमने मुझे नहीं छोड़ा? आरव रो पड़ा और बोला मैं तुम्हें भूलकर ज़िंदा नहीं रह सकता था।, ये सीन किसी मूवी से कम नहीं लग रहा था कि तभी पीछे से वही बूढ़ी आवाज़ आई— तुम्हें समझ नहीं आया… तुम्हारे प्यार ने हमारे सालों का डेटा बर्बाद कर दिया।, आरव मुड़ा। वही आदमी। सफ़ेद कोट। ठंडी मुस्कान। Donor A-17…
आदमी बोला— नहीं… मैं तो बस इस experiment का आख़िरी हिस्सा था।
उसने सिर से मास्क हटाया। चेहरा देखकर अदिति चीख पड़ी। वो आदमी आरव जैसा दिखता था।
उसने कहा, मैं तुम्हारा prototype हूँ, पहला subject। जो प्यार नहीं कर पाया लेकिन तुम दोनों…मेरी नाकामी हो।
पुलिस सायरन की आवाज़ बाहर से आने लगी। किसी ने क्लिनिक की लोकेशन लीक कर दी थी। आदमी हँसा और बोला Experiment खत्म नहीं हुआ… बस lab बदल गई है और वो पीछे के दरवाज़े से भाग गया।
सुबह। डॉक्टर ने साफ़ कहा— आप दोनों genetically related नहीं हैं पर एक ही illegal genetic trial का हिस्सा ज़रूर थे तो कानूनी तौर पर आप पति-पत्नी हैं। अदिति ने राहत की सास ली और अपने आरव का हाथ थाम लिया और दिल से? आरव मुस्कुराया। वो तो हमने ख़ुद चुना है।कुछ हफ्तों बाद आरव को एक ईमेल मिला। Sender: A-17_v2 Subject: Phase Three Message में सिर्फ़ एक लाइन थी—True love survived once. Let’s see how many times it can.
आरव ने मेल delete कर दिया और अदिति को गले लगा लिया। क्योंकि वो जानता था— कभी-कभी सबसे बड़ा rebellion
प्यार को ज़िंदा रखना होता है।
मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।