एक दिन की दुल्हन, नौ महीने का सच
शर्मा जी के घर में पिछले एक महीने से जैसे मेला लगा था। रिश्तेदार, फोन कॉल, पंडित की तारीखें, कपड़ों…
शर्मा जी के घर में पिछले एक महीने से जैसे मेला लगा था। रिश्तेदार, फोन कॉल, पंडित की तारीखें, कपड़ों…
शाम की लोकल ट्रेन में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं और देखा जाए तो ये रोज़…
वो मेरी ज़िंदगी में अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे घुसी थी। कभी चाय पर, कभी माँ की दवाइयों के बहाने। माँ…
उससे पहली मुलाक़ात बिल्कुल फ़िल्मी नहीं थी। ना बारिश थी, ना स्लो मोशन। बस एक जेल की दीवार थी… और…
उसने जाते वक़्त बस एक ही बात कही थी— इंतज़ार करना… मैं लौटूँगी। उस पल उसकी आँखों में मैंने कोई…
राज अपनी प्रेमिका रिया के साथ रहता था, दिन में उसे देखकर राज को लगता था कि उसकी दुनिया पूरी…
कमरा नंबर 302—होटल की तीसरी मंज़िल पर, पीछे की ओर बना वो कमरा, जो दिन के उजाले में भी अजीब…
उसकी हँसी में कुछ ऐसा था जो सीधे दिल पर वार करता था। ना ज़्यादा तेज़, ना ज़्यादा मीठी—बस इतनी…
कहते हैं कुछ मुलाक़ातें इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं — वो पहले से तय होती हैं। मुझे इस बात पर कभी यक़ीन…
कभी-कभी डर सिर्फ़ हमारे सामने नहीं होता। वो हमारी आंखों में, हमारे दिल में, हमारे दिमाग में, हमारे कमरे में,…
रेलवे स्टेशन सुबह-सुबह किसी ज़िंदा शहर जैसा होता है— घड़ियों की टिक-टिक, चाय की केतली, ट्रेन की सीटी, और भागते…
हर जुर्म खून से नहीं होता। कुछ जुर्म ऐसे होते हैं, जो सालों तक सांस लेते रहते हैं— दीवारों के…
सुबह की बस में कुछ लोग रोज़ चढ़ते हैं, कुछ रोज़ उतरते हैं — और इसी उतार चडाव में कुछ…
कुछ जगहें मरी हुई नहीं होतीं… बस इंतज़ार करती हैं — किसी के लौट आने का। वह कॉल जो नहीं…
कहानी क्यों लिखी गई? हर क़त्ल में खून ज़रूरी नहीं होता। हर अपराध में हथियार ज़रूरी नहीं होता। कुछ अपराध…