शादी के कुछ ही दिनों बाद से, रात का सन्नाटा घर में गूँजता। और हर रात मेरे पति की आवाज़ कानों में गूँजती—तुम रात को उठके कही चली जाकी हो।
शुरू में तो उन्होने इसे मेरा मज़ाक समझा, लेकिन धीरे-धीरे डर मेरी हकीकत बनता गया। हर रात उन्हे लगता जैसे कोई मेरे कमरे में खड़ा है, लेकिन जब वो पलटते, तो कोई नहीं होता। रात के तीन बजे फोन की घंटी की तरह सी आवाज़ आती, लेकिन उसका स्रोत अज्ञात।
कुछ दिनों बाद, उन्होने घर का CCTV चेक किया। स्क्रीन पर जो दिखा, उसने मेरी धड़कन रोक दी। वहां मैं नहीं थी। जो शख़्स रात में उठता दिखा, वह मेरी शक्ल का ही था, लेकिन हल्की धुंधली और अजीब तरह से थोड़ा अलग—जैसे कोई छाया मेरे पीछे चल रही हो।ये सब देखकर इंस्पेक्टर को बुलाया गया और अब तो इंस्पैक्टर और पति दोनों ही झटके में थे। जाँच करते हुए पुलिस ने तो हाथ खड़े कर लिए फिर मैने तांत्रिक को बुलाया क्योकि मुझे ये सब इन्ही चीज़ो से मेल खा रहा था और फिर तांत्रिक की जांच से पता चला कि यह मैं नहीं थी, बल्कि मेरा बचपन की मृत जुड़वाँ, जिसकी मौत मेरे जन्म के समय हो गई थी, वही थी।
अब हर रात वह मेरी जगह उठती है। कभी-कभी उसकी आँखें स्क्रीन में चमकती हैं, और कभी-कभी वह मेरे पति के पास खड़ी दिखती है, जैसे उसे भी वही प्यार चाहिए जो मुझसे जुड़ा था, मुझे मिल रहा था पर वो उस प्रेम के लिए हमेशी तरसी हो । डर और रोमांस दोनों एक साथ थे। रातें अब केवल सोने की नहीं, बल्कि छिपकर देखने की बन गईं। और सबसे अजीब बात—वह मेरी यादें भी जानती थी। मेरी खुशियाँ, मेरा डर, मेरे पति की नज़दीकियाँ।
मैं समझ गई थी कि अब हमारी शादी सिर्फ मेरे और मेरे पति की नहीं रही। यह मेरे और उस जुड़वाँ की छाया के बीच का खेल बन गया। और हर रात, वह मेरे पति को बुलाती, मुझे बाहर खड़ा छोड़कर।
रात की खामोशी अब मुझे डराने लगी थी। हर बार जब मैं सोने के लिए लेटी, मेरे पति की नींद में हल्की बेचैनी नजर आती। उसके हाथ में कभी-कभी वह मोबाइल होता, जिस पर रात के 3:00 बजे कुछ अजीब notification आती—CCTV clip की तरह। मैं चुपचाप उस clip को देखती, और हर बार वही तस्वीर—मेरी शक्ल, लेकिन ठंडी, फीकी, और डरावनी।
इस बार मैने धैर्य रखा और इंस्पेक्टर की मदद से मैंने पुराने दस्तावेज़ खोले। मुझे पता चला कि मेरे जुड़वाँ का नाम भी मुझ जैसा था। बचपन में अस्पताल की गलती या शायद कोई पुराना डर, जिसने उसे मेरी जगह दुनिया से छीन दिया। लेकिन अब वह मेरी जिंदगी में लौट आई थी—सिर्फ़ मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे पति के लिए भी।
हर रात वह मेरे पति के पास खड़ी होती, मुझे दूर से देखती और धीरे-धीरे उसकी परछाईं मेरे कमरे की दीवारों में फैलती। प्यार और डर दोनों मिश्रित थे—जैसे कोई अदृश्य तंतु मेरे दिल को खींच रहा हो। पति कहता, मैं उसे देख सकता हूँ, वह तुम्हारी तरह है… लेकिन डरावनी।
मैंने महसूस किया कि वह मेरी यादें भी जानती थी—मेरे बचपन की खुशियाँ, मेरे डर, मेरे पति के लिए मेरी मोहब्बत। हर दिन मैं उसकी ताकत महसूस करती—वह मेरे और मेरे पति के बीच की खाई को भर रही थी। अब मेरे लिए हर दिन सिर्फ़ डर की परीक्षा बन गया, और हर रात एक नया खेल।
लेकिन सबसे बड़ा रहस्य अभी खुला नहीं था। वह जुड़वाँ मेरे पति को क्यों चाहती थी? क्या उसकी नीयत सिर्फ़ डराने की थी, या उसका कोई पुराना रहस्य मेरे पास था, जिसे वह वापस लेने आई थी?
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन सब कुछ समझना बहुत जरूरी हो गया था क्योकि वो सिर्फ मुझ तक सीमित नहीं थी बल्कि मेरे सुहाग पर भी उसकी नज़र थी
रात का अंधेरा और बढ़ गया। हर चीज़ अब वास्तविक लग रही थी—कहीं परछाई मेरे कमरे में हलके-हलके हिल रहे थे, और मेरे पति की नींद में हल्की बेचैनी। मैंने सीधा CCTV देखा, और स्क्रीन पर वही chilling image—ये देखते ही मैने तांत्रिक और पुलिस दोनों को फ़ोन किया क्योकि मुझे उस वक्त यही सही लगा। जिसके बाद अब हम मिलकर CCTV देख रहे थे कि तभी मेरी शक्ल का भूत, मेरे पति की ओर हाथ बढ़ा रहा था।
हम तीनों ये देखकर बहुत डर गए। मैंने पुराने रिकॉर्ड खोले और पता चला कि मेरा जुड़वाँ सिर्फ मेरी “shadow” नहीं थी। बचपन में उसके पास कुछ रहस्यमयी चीज़ थी—एक छोटी डायरी, जिसमें हमारे परिवार की पुरानी गलतियों और खतरों की जानकारी थी। बचपन में जुड़वाँ की मौत के समय डायरी कहीं गुम हो गई थी, और अब वह उसे पाने के लिए वापस आई थी।
हर रात की कॉल, हर छाया, हर अजीब आवाज़—सिर्फ चेतावनी नहीं थी। वह मेरे पति को भी उस डायरी तक पहुँचाने की कोशिश कर रही थी, ताकि परिवार के पुराने रहस्य और खतरे सामने आ सकें। मैंने महसूस किया कि अब डर केवल मेरे लिए नहीं था—यह मेरे पति और परिवार की सुरक्षा का खेल बन गया था।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी—उस जुड़वाँ ने मेरे और मेरे पति के बीच की दूरी भी महसूस कर ली थी। वह चाहती थी कि सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे पति भी उसका ध्यान दे। प्यार और डर एक साथ थे, और मैं खुद को फँसी हुई महसूस करने लगी।
अब मैं समझ गई थी—रात के shadows, कॉल्स और CCTV सब सिर्फ़ डराने के लिए नहीं, बल्कि पुराने रहस्यों को उजागर करने, परिवार की सुरक्षा और जुड़वाँ की अधूरी जिंदगी पूरी करने के लिए थे। और अब असली खेल शुरू होने वाला था—जो रातों में मेरे पति और मुझे सीधे चुनौती देगा।
रात अब और गहरी हो गई थी। हर आवाज़ और shadow मेरे दिल को तेजी से धड़कने पर मजबूर कर रही थी। CCTV में जुड़वाँ की छाया लगातार मेरे पति के पास दिखाई देती, जैसे वह उसे अपनी ओर खींच रही हो। मैंने डायरी की तलाश तेज़ कर दी—मुझे समझ आ गया कि जुड़वाँ का मकसद केवल डराना नहीं था, बल्कि पुराने परिवार के रहस्यों को उजागर करना और खतरे को रोकना।
जुड़वाँ की परछाईं मेरे पति के पास खड़ी थी, लेकिन जैसे ही उसने डायरी देखी, उसकी नजरें बदल गईं। वह अब केवल मेरे पति को डराने नहीं, बल्कि उसे निर्देश देने लगी—कौन सा कदम उठाना है, कौन सी गलतियों को सुधारना है। मैंने महसूस किया कि प्यार और डर का यह मिश्रण मेरे पति के लिए भी सीख बन गया। हर रात की चुनौती अब समझदार बन चुकी थी।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि जुड़वाँ अब मेरी यादों में घुस चुकी थी। मेरे डर, मेरी खुशियाँ, मेरे पति की नज़दीकियाँ—उसने सब कुछ पढ़ लिया था। अब मैं डर और मोहब्बत दोनों में उलझ गई थी।
अंतिम रात आई। जुड़वाँ की परछाईं अब केवल डराने वाली नहीं थी, बल्कि राह दिखाने वाली थी। उसने मेरे पति और मुझे डायरी तक पहुँचाया, जिसमें परिवार की पुरानी गलतियों और खतरे का पूरा सच लिखा था। समझ आ गया कि मेरी शादी में हर रात का डर और हर call केवल एक चेतावनी थी—हमारे लिए सुरक्षा और परिवार को बचाने का तरीका। और मुझे बहुत दुख हुआ कि अपनी बहन को मैने कितना गलत समझा
रात के 3:00 बजे, मैंने जुड़वाँ को देखा—वह अब हल्की रोशनी में शांत थी। उसकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि अधूरी मोहब्बत और सुरक्षा का संदेश था। उसने धीरे से हमारी तरफ देखा और धीरे-धीरे fading होने लगी, जैसे अब उसका काम पूरा हो गया।
सुबह हुई। डायरी हमारे हाथ में थी, जुड़वाँ की छाया अब नहीं थी। पति और मैं दोनों ही अब समझ चुके थे—हर डर, हर shadow, हर midnight call एक परिवार की सुरक्षा और अधूरी जिंदगी की पूर्ति का हिस्सा था।
हमारी शादी अब सिर्फ़ मेरे और मेरे
पति की नहीं रही—यह उन रहस्यमयी बंधनों की कहानी बन गई, जो कभी दिखते नहीं, लेकिन हमेशा साथ रहते हैं।