Jise sab bhool gye
Jise sab bhool gye

सुबह की शुरुआत बिल्कुल सामान्य थी—कम से कम आर्यन को ऐसा ही लगा। वह रोज़ की तरह उठा, चाय बनाई और ऑफिस के लिए तैयार हुआ। लेकिन जैसे ही वह बाहर निकला, उसे पहली अजीब बात महसूस हुई। सामने वाले शर्मा अंकल, जो रोज़ उसे देखकर मुस्कुराते थे, आज ऐसे गुज़रे जैसे वह वहाँ था ही नहीं।

आर्यन ने सोचा शायद उन्होंने देखा नहीं होगा। लेकिन ऑफिस पहुँचा तो स्थिति और अजीब हो गई। रिसेप्शन पर बैठी नेहा ने उसे रोका—आप किससे मिलना चाहते हैं?

वह हँस पड़ा। मज़ाक मत करो नेहा, मैं यहीं काम करता हूँ।

नेहा की भौंहें सिकुड़ गईं। सर, आप शायद गलत जगह आ गए हैं।

उसका आईडी कार्ड सिस्टम में स्कैन नहीं हुआ। उसका केबिन किसी और को दे दिया गया था। सहकर्मी उसे ऐसे देख रहे थे जैसे वह कोई अजनबी हो।

घबराकर वह घर पहुँचा। दरवाज़ा उसकी पत्नी, सिया, ने खोला। उसकी आँखों में डर था।
जी, आप कौन हैं?

आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। दीवार पर लगी शादी की तस्वीर गायब थी। अलमारी में उसके कपड़े नहीं थे। फोन में उसके नाम का कोई कॉन्टैक्ट नहीं।

उसने आधार कार्ड, बैंक ऐप, सोशल मीडिया—सब चेक किया। हर जगह  No Record Found।

उसकी पहचान… जैसे कभी थी ही नहीं।

रात को आईने में खुद को देखते हुए उसके मन में एक ही सवाल गूंज रहा था—
अगर दुनिया मुझे नहीं पहचानती…
तो क्या मैं सच में कभी मौजूद था?

आर्यन ने पूरी रात जागकर बिताई। उसे उम्मीद थी कि सुबह सब कुछ सामान्य हो जाएगा, जैसे यह सब एक बुरा सपना हो। लेकिन सुबह जब उसने दरवाज़ा खोला, तो बाहर लगी नेमप्लेट पर सिर्फ “सिया मेहरा” लिखा था। उसका नाम पूरी तरह गायब था।

वह सीधे पुलिस स्टेशन पहुँचा। मैं शिकायत दर्ज कराना चाहता हूँ, उसने घबराई आवाज़ में कहा। ड्यूटी ऑफिसर ने पूछा, पहचान पत्र?

आर्यन ने जेब टटोली—वॉलेट था, लेकिन अंदर सारे कार्ड खाली थे। जैसे किसी ने उसकी पहचान मिटा दी हो। पुलिस ने सिस्टम में उसका नाम खोजा—कोई रिकॉर्ड नहीं। जन्म प्रमाणपत्र नहीं, स्कूल रिकॉर्ड नहीं, पैन नंबर नहीं।

सर, आप कौन हैं? ऑफिसर ने सख्ती से पूछा।

यह सवाल अब उसके सीने में हथौड़े की तरह बजने लगा था।

बेचैन होकर वह अपने पुराने स्कूल पहुँचा। वहाँ भी वही नतीजा—एडमिशन रजिस्टर में उसका नाम नहीं था। कॉलेज, बैंक, अस्पताल—हर जगह वह एक अजनबी था।

शाम तक उसकी हालत बिगड़ चुकी थी। सड़क पर चलते हुए उसे लगा जैसे लोग सचमुच उसे देख ही नहीं पा रहे। एक बाइक लगभग उससे टकरा गई, लेकिन चालक ने उसे नोटिस तक नहीं किया।

घर लौटते समय उसने देखा—उसकी बिल्डिंग के सीसीटीवी कैमरे में उसका प्रतिबिंब ही नहीं दिख रहा था। स्क्रीन पर सिर्फ खाली गलियारा था।

घबराकर वह सीढ़ियों में बैठ गया। तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया—

तुम्हें इसलिए भुलाया गया है… क्योंकि तुमने वह देखा था, जो नहीं देखना चाहिए था।

उसके हाथ काँप उठे।

अगर वह कभी आधिकारिक रिकॉर्ड में था ही नहीं…
तो फिर यह संदेश भेजने वाला कौन था?
और उसे किस बात की सज़ा मिल रही थी?

मैसेज पढ़ने के बाद आर्यन के भीतर डर से ज़्यादा गुस्सा भर गया। मैंने क्या देखा था? यह सवाल उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था। उसने जवाब में उसी नंबर पर कॉल किया, लेकिन फोन तुरंत स्विच ऑफ हो गया।

उसे अचानक एक धुंधली-सी याद आई—तीन महीने पहले की रात। वह देर से ऑफिस से लौट रहा था, जब उसने शहर के पुराने पुल के नीचे कुछ लोगों को किसी को गाड़ी में धकेलते देखा था। उसने दूर से वीडियो रिकॉर्ड करने की कोशिश की थी, लेकिन तभी किसी ने उसे देख लिया था। वह डरकर भाग गया था। अगले दिन खबर आई थी कि एक सरकारी अधिकारी “लापता” हो गया।

क्या वही घटना उसकी गुमनामी की वजह थी?

आर्यन उसी पुल के पास पहुँचा। जगह सुनसान थी, लेकिन दीवार पर काले रंग से एक अजीब-सा चिन्ह बना था—एक गोल घेरे के भीतर काटी हुई रेखा। जैसे किसी अस्तित्व को मिटा दिया गया हो।

अचानक पीछे से आवाज आई—तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।

वह पलटा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। तभी उसका फोन फिर से बीप हुआ।
तुम आधिकारिक रिकॉर्ड में कभी थे ही नहीं… हमने बस तुम्हें यह यकीन दिलाया था कि तुम हो।

उसका दिमाग चकरा गया। अगर उसका जन्म, स्कूल, शादी—सब नकली थे, तो वह जी किस जीवन में रहा था?

उसी वक्त उसे सामने पानी में अपना प्रतिबिंब दिखा… लेकिन अजीब बात यह थी कि पानी में उसका चेहरा धुंधला था, जैसे कोई तस्वीर धीरे-धीरे मिटाई जा रही हो।

डर उसके अंदर गहराता जा रहा था।

क्या वह किसी गुप्त प्रयोग का हिस्सा था?
या सच में उसकी ज़िंदगी किसी ने गढ़ी थी—और अब मिटा दी थी?

अब यह सिर्फ पहचान की लड़ाई नहीं थी।
यह साबित करने की जंग थी कि वह सच में मौजूद है।

पुल से लौटते समय आर्यन का दिमाग बिखर चुका था। हमने बस तुम्हें यह यकीन दिलाया था कि तुम हो… — यह लाइन बार-बार उसके कानों में गूंज रही थी। क्या सच में उसकी पूरी ज़िंदगी एक कहानी थी, जो किसी ने लिखी और अब मिटा दी?

घर पहुँचकर उसने आखिरी कोशिश की। उसने अपने लैपटॉप का पुराना हार्ड ड्राइव निकाला, जिसमें वह निजी फाइलें और तस्वीरें रखता था। सिस्टम ऑन किया—फोल्डर थे, लेकिन सब खाली। जैसे किसी ने अंदर से डेटा खींच लिया हो। तभी एक नई फाइल अपने-आप खुली।

वीडियो में वही पुराना पुल दिख रहा था। कैमरे का एंगल ऊपर से था, जैसे किसी ड्रोन से शूट किया गया हो। उसमें साफ दिख रहा था—कुछ लोग एक व्यक्ति को जबरन गाड़ी में डाल रहे हैं। और दूर खड़ा… आर्यन।

वीडियो रुका। स्क्रीन पर टेक्स्ट उभरा—
तुम गवाह नहीं थे। तुम प्रोजेक्ट ‘इरेज़र’ का हिस्सा थे।

उसका दिल जोर से धड़कने लगा। अचानक उसे याद आया—दो साल पहले उसे एक “सरकारी रिसर्च प्रोजेक्ट” में नौकरी का ऑफर मिला था, जिसकी शर्त थी पूर्ण गोपनीयता। उसे कभी समझ नहीं आया कि वह असल में करता क्या है।

तभी फोन फिर बजा। इस बार आवाज साफ थी—
हम लोगों को पहचान देते हैं… और जब ज़रूरत खत्म होती है, पहचान वापस ले लेते हैं।

क्यों मैं? आर्यन चीखा।

क्योंकि तुमने सवाल पूछना शुरू कर दिया था।

लाइन कट गई।

आर्यन अब समझ चुका था—वह सिर्फ एक आम इंसान नहीं, बल्कि किसी बड़े सिस्टम का प्रयोग था। उसकी शादी, नौकरी, दोस्त—सब एक निर्मित वास्तविकता।

लेकिन अगर उसकी पहचान उन्होंने बनाई थी…
तो क्या वह उसे वापस हासिल कर सकता था?

या फिर…
सिस्टम उसे पूरी तरह मिटाने ही वाला था?

आर्यन अब डर से आगे निकल चुका था। उसके भीतर सिर्फ एक जिद बची थी—सच जानना और अपनी पहचान वापस लेना। वीडियो में दिखे प्रोजेक्ट इरेज़र के नाम ने उसे एक दिशा दे दी थी। उसने शहर के बाहरी इलाके में स्थित उस रिसर्च सेंटर को याद किया, जहाँ वह कभी काम करता था।

रात के अंधेरे में वह वहाँ पहुँचा। इमारत बाहर से बंद पड़ी थी, लेकिन पीछे की ओर एक छोटा दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर जाते ही उसे ठंडी हवा और मशीनों की हल्की गूंज सुनाई दी। दीवारों पर स्क्रीन लगी थीं, जिन पर अलग-अलग लोगों की प्रोफाइल खुली थीं—नाम, फोटो, रिश्ते, बैंक डिटेल्स।

हर स्क्रीन के नीचे एक बटन था—Activate और Erase।

उसका दिल बैठ गया।

एक स्क्रीन पर अचानक उसका चेहरा उभरा—Subject: A-17। Status: Erased.

नीचे नोट लिखा था—
अत्यधिक जिज्ञासु। नियंत्रण से बाहर। स्मृति और पहचान हटाई गई।

आर्यन को याद आया—उसे कभी-कभी अजीब सिरदर्द होता था, जैसे दिमाग में कुछ दबाया जा रहा हो। शायद उसकी यादें कृत्रिम थीं, जिन्हें अब बंद कर दिया गया था।

अचानक कमरे में रोशनी तेज़ हो गई। स्पीकर से आवाज गूंजी—
तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था, A-17।

आर्यन ने पास की कंसोल पर हाथ रखा। उसकी प्रोफाइल खुली थी। Activate बटन चमक रहा था।

अगर तुमने इसे दबाया, आवाज बोली, तो तुम्हें सब याद आ जाएगा—लेकिन कीमत चुकानी होगी।

कौन-सी कीमत?

कुछ पल सन्नाटा रहा।

फिर जवाब आया—
तुम्हें सच में जानना होगा कि तुम कौन थे… और क्यों मिटाए गए।

आर्यन ने गहरी सांस ली।

अब फैसला उसका था—
झूठी, सुरक्षित गुमनामी…
या खतरनाक, सच्चा अस्तित्व।

कमरे में सन्नाटा था। Activate बटन नीली रोशनी में चमक रहा था। आर्यन के हाथ काँप रहे थे, लेकिन इस बार डर से ज़्यादा उसके भीतर जवाब पाने की आग थी। उसने आँखें बंद कीं… और बटन दबा दिया।

एक झटका-सा उसके पूरे शरीर में दौड़ गया। स्क्रीनें तेजी से बदलने लगीं। उसके सामने यादों के टुकड़े चमकने लगे—लैब में बैठा वह खुद, कंप्यूटर स्क्रीन पर कोड लिखता हुआ। प्रोजेक्ट इरेज़र… वह कोई साधारण कर्मचारी नहीं था।

वह इस सिस्टम का मुख्य डेवलपर था।

उसने ही वह एल्गोरिद्म बनाया था जो लोगों की डिजिटल और सामाजिक पहचान को मिटा सकता था। सरकार इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर इस्तेमाल करना चाहती थी। लेकिन जब उसे पता चला कि इस तकनीक का उपयोग निर्दोष लोगों को गायब करने के लिए हो रहा है, तो उसने विरोध किया।

और तब… उसे ही मिटा दिया गया।

उसकी शादी, दोस्त, घर—सब एक कृत्रिम पहचान थी, जो उसे शांत रखने के लिए बनाई गई थी। जैसे ही उसने सवाल उठाए, सिस्टम ने “Erase” दबा दिया।

स्पीकर से वही आवाज गूंजी—
तुम्हें चेतावनी दी गई थी, A-17। अब बहुत देर हो चुकी है।

अचानक पूरे सेंटर में अलार्म बज उठा। सर्वर ओवरलोड होने लगे। आर्यन ने तेजी से कीबोर्ड पर कमांड टाइप की। उसने अपने अलावा बाकी सभी “Erased” प्रोफाइल्स को भी “Activate” कर दिया।

अगर मैं मिटाया गया था… तो मैं अकेला नहीं रहूँगा, उसने बुदबुदाया।

कुछ ही पलों में सिस्टम क्रैश हो गया। स्क्रीनें बुझ गईं।

बाहर पुलिस सायरन की आवाजें गूंजने लगीं।

सुबह की पहली किरण के साथ खबर फैल चुकी थी—सैकड़ों लोग, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में कभी थे ही नहीं, अचानक वापस दर्ज हो गए थे।

आर्यन सड़क पर खड़ा था। इस बार लोग उसे देख रहे थे।

वह मौजूद था।

और अब कोई उसे फिर से मिटा नहीं सकता था।

By अन्वी शब्द

मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।

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