मै आरव, मेरा ट्रांस्फर एक नए शहर मे हुआ था और जल्द बाजी में मैने अपने लिए मकान भी आँफिस के पास ही ले लिया था… आज उस घर में मेरा पहला दिन था दिनभर का थका हुआ मैं, रात को जल्दी सो गया की तभी ठीक 2:17 बजे मुझे एक लड़की की चीखने की आवाज़ सुनाई दी, इस तीखे आवाज़ से मै ड़रकर उठा… मैने चारों तरफ देखा कोई नहीं था, मुझे लगा कोई बुरा सपना होगा।मैने पानी पिया और फिर सोने चला गया। फिर अगली सुबह मै आँफिस गया, रात को खा-पिकर सोया कि फिर आज रात ठीक 2:17 बजे एक लड़की की चीखने की आवाज़ आई, ये आवाज रूह कंपा देने वाली थी, एसा लगा कोई तड़प कर चीखा है। न ज़्यादा। न कम।
बस इतनी कि नींद टूट जाए और दिल धड़कना भूल जाए।
मैने खिड़की से देखा तो महसूस हुआ, यह आवाज़ आती है हाउस नंबर 17 से, लेकिन गार्ड ने मुझे बताया था हाउस नंबर 17 पिछले 20 सालों से बंद पड़ा है। वहा न बिजली है न पानी और न कोई रहने वाला जिस वज़ह से ये बात और भी डरावनी लगती है। वहा रहने वाले लोग कहते हैं— वहाँ कभी भयानक आग लगी थी और उसमें जलकर एक लड़की की मौत हुई थी इसलिए उस घर के बारे में बात करना ठीक नहीं हैं। लेकिन मैं इन बातों पर यक़ीन नहीं करता है। मैं एक साउंड इंजीनियर हू। मेरा मानना है— हर आवाज़ का कोई न कोई स्रोत ज़रूर होता है।
अब अगली रात मै अपना रिकॉर्डर लेकर, ठीक 2:10 बजे उस घर के बाहर खड़ा होता हूं।
2:16…
2:17…
आआआआह—!!!
चीख़ इतनी पास से आती है मानो कोई मेरे कानों के भीतर चिल्ला रहा हो। रिकॉर्डर की लाइट झपकती है और रिकॉर्डिंग हो चुकी होती है। मैं घबराकर वहाँ से भाग जाता हूं।अगली सुबह मैं हेडफ़ोन लगाकर रिकॉर्डिंग सुनता हूं।
शुरुआत में वही चीख़।
लेकिन फिर…
रिकॉर्डिंग के अंत में एक और आवाज़ होती है।
धीमी…
घबराई हुई…मैं… मैं यहीं हूँ… मेरा गला ये रिकाँड़िंग सुनकर सूख जाता है क्योकि यह आवाज़ मेरी ही होती है मै घबराकर रिकॉर्डर बंद कर देता हूं। शाम को जब मैं यह रिकॉर्डिंग अपने दोस्त को भेजता हू, तो फ़ाइल का नाम अपने आप बदल चुका होता है- आख़िरी_आवाज़_02.wav
और नीचे एक नया टाइमस्टैम्प लिखा होता है— अगली रिकॉर्डिंग: रात 2:17 बजे, तभी अब आरव को सच्चाई समझ आती है कि जो भी इस चीख़ को रिकॉर्ड करता है, उसकी आवाज़ धीरे-धीरे उसी रिकॉर्डिंग का हिस्सा बन जाती है और जिसकी आवाज़ पूरी तरह रिकॉर्ड हो जाए वह फिर कभी सुनाई नहीं देता। उस रात आरव सो नहीं पाया, उसे पूरी रात ड़र और बेचैनी रही।
घड़ी की टिक-टिक उसे चुभ रही थी। मोबाइल स्क्रीन पर बार-बार वही शब्द चमक रहे थे— अगली रिकॉर्डिंग: रात 2:17 बजे आरव ने खुद से कहा— ये सिर्फ़ एक टेक्निकल गड़बड़ी है कोई सुपरनेचुरल बकवास नहीं।
फिर भी… उसने रिकॉर्डर बंद करके अलमारी में बंद कर दिया लेकिन 2:16 बजे अलमारी के अंदर से एक हल्की सी बीप की आवाज़ आई। आरव का दिल ज़ोर से धड़का। 2:17…
अलमारी अपने आप खुल गई, रिकॉर्डर की लाल लाइट जल रही थी कि तभी— आआआआह—!!!
इस बार चीख़ किसी लड़की की नहीं थी। ये एक आदमी की चीख़ थी। आरव के कानों में सीटी बजने लगी क्योकि वो चीख़ उसे जानी-पहचानी लगी। अगली सुबह उसने हिम्मत करके नई रिकॉर्डिंग सुनी। पहले वही लड़की की चीख़ फिर उसकी अपनी आवाज़— मैं… मैं यहीं हूँ… और फिर आख़िर में— आरव, दरवाज़ा खोलो… ये सुनते ही आरव की सांस अटक गई क्योकि ये आवाज़ उसके पिता की थी। जिनकी मौत 15 साल पहले ही हो चुकी थी। घबराकर आरव पुलिस स्टेशन गया।
पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। हाउस नंबर 17 की फाइल में एक नाम बार-बार सामने आया— अनन्या वर्मा, उम्र: 19 वर्ष,मौत का कारण: आग में ज़िंदा जलना
लेकिन नीचे लिखी एक लाइन ने आरव को अंदर तक हिला दिया—
मृत्यु के समय,
अनन्या की आवाज़ रिकॉर्ड की जा रही थी।
रिकॉर्डिंग करने वाला कौन था? उसका पिता।
धीरे धीरे गुथ्थी सुलझने लगी, आरव को सच्चाई समझ में आने लगी, उसके पिता एक रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे— मानव आत्मा की अंतिम ध्वनि पर।अनन्या की मौत के समय उसकी आख़िरी चीख़ रिकॉर्ड हो गई थी। लेकिन उस चीख़ ने रिकॉर्डर को मरने के बाद तक भी नहीं छोड़ा।
वो आवाज़ हर उस इंसान को बुलाती है जो उसे सुनता है… जो उसे रिकॉर्ड करता है और फिर उसे अपने भीतर कैद कर लेती है।शाम होते-होते आरव को Unknown Number से एक नया मैसेज मिला तुम अगली आवाज़ हो, आरव।
उसी पल उसके मोबाइल पर एक ऑडियो फ़ाइल अपने आप डाउनलोड हुई—
Aakhri_Awaaz_03 और टाइमस्टैम्प— Tonight. 02:17 AM
आरव समझ चुका था, अगर वो आज रात हाउस नंबर 17 नहीं गया… तो कल उसकी आवाज़ भी सिर्फ़ एक रिकॉर्डिंग बन जाएगी।
रात के 1:58 बजे आरव हाउस नंबर 17 के सामने खड़ा था।
वही जला-सा घर। काली पड़ी दीवारें। टूटी खिड़कियाँ और हवा में जली हुई लकड़ी की हल्की-सी गंध। उसका मोबाइल काँप रहा था। 02:16 AM रिकॉर्डर अपने आप ऑन हो चुका था। आरव ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा धकेला।
क्रीईई—क…
दरवाज़ा खुलते ही ठंडक की एक लहर उसके शरीर से टकराई। अंदर अंधेरा नहीं था। दीवारों पर सैकड़ों पुराने टेप रिकॉर्डर लगे थे।
हर एक पर एक नाम लिखा था।
कुछ नामों पर साल पुराने।
कुछ… बहुत हाल के।
आरव की नज़र एक टेप पर अटक गई— Ananya_Verma.wav
और उसके नीचे—Aarav_Malhotra.wav (Status: Recording in progress) उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
2:17 AM, अचानक पूरा घर गूंज उठा।
आआआआह—!!!
लेकिन इस बार चीख़ बाहर से नहीं बल्कि दीवारों के अंदर से आ रही थी।
एक-एक करके रिकॉर्डर चलने लगे। हर स्पीकर से अलग-अलग आवाज़ें— रोते हुए लोग। मदद माँगती चीखें। अधूरी साँसें और फिर… एक जानी-पहचानी आवाज़— आरव… अब तुम्हारी बारी है।
वो आवाज़ उसके पिता की थी।
अचानक कमरे के बीचोंबीच एक जली हुई आकृति उभर आई। एक लड़की की आकृति बनि हुई थी, चेहरा अधजला। आँखों में आँसू नहीं— गुस्सा था।
अनन्या।
उसने कहा—मेरी चीख़ नहीं… मेरा दर्द क़ैद किया गया था।
जो मेरी आवाज़ सुनता है… वो मुझे ज़िंदा रखता है।
आरव काँपते हुए बोला— तो मुझे छोड़ दो…
अनन्या मुस्कुराई।
मैं छोड़ नहीं सकती पर तुम चुन सकते हो। उसने सामने एक रिकॉर्डर रखा। या तो तुम अपनी आवाज़ मुझे दे दो…या फिर किसी और की। उसी पल आरव का फोन बजा। उसकी छोटी बहन का कॉल।
02:17:30
आरव की आँखों से आँसू बह निकले। उसने रिकॉर्डर उठाया… और ज़ोर से फेंक दिया।
पूरा घर हिलने लगा।
रिकॉर्डर टूटे। आवाज़ें चिल्लाईं।
अनन्या की चीख़ आख़िरी बार गूंजी— आआआआह—!!!
और फिर… सन्नाटा।
सुबह।
हाउस नंबर 17 ज़मीन में धँसा हुआ था कोई रिकॉर्डर नहीं कोई आवाज़ नहीं। आरव ज़िंदा था लेकिन… उसके मोबाइल में एक फ़ाइल थी। Aakhri_Awaaz_Final.wav
आरव ने कभी उसे नहीं सुना।
क्योंकि उसे डर था— कि अगर उसने Play दबाया… तो अगली आवाज़
शायद उसकी ही होगी।
इस कहानी में सुनाई देने वाली
हर आवाज़
कल्पना पर आधारित है।
लेकिन…
अगर आज रात 2:17 बजे आपको भी कोई आवाज़ सुनाई दे— तो उसे रिकॉर्ड करने की कोशिश मत करना।
क्योंकि कुछ आवाज़ें सुनी नहीं जातीं बल्कि वे आपको सुन लेती हैं।
मैं अन्वी हूँ। शब्द मेरे लिए सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी दुनिया के दरवाज़े हैं। मुझे उन अनकहे एहसासों को कहानी में पिरोना पसंद है जो दिल की गहराइयों में छुपे रहते हैं। मेरी कहानियों में कभी हल्की-सी मोहब्बत की खुशबू होती है, तो कभी किसी अनदेखे रहस्य की आहट। मैं चाहती हूँ कि जब आप मेरी कहानी पढ़ें, तो कुछ पल के लिए समय ठहर जाए और आप खुद को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करें।